चीन में इन दिनों भयानक सूखा पड़ा है. स्थिति ऐसी है कि उनकी सबसे महत्वपूर्ण और एशिया की सबसे लंबी नदी यांग्त्जे नदी (Yangtze River) में पानी का स्तर कम हो गया है. उससे जुड़े रिजरवायर सूखते जा रहे हैं. यांग्त्जे नदी करोड़ों लोगों के लिए पीने का पानी प्रदान करती है. सिंचाई में मदद करती है. अब चीन की योजना है कि वह मेघ बीजन (Cloud Seeding) करेगा. यानी आर्टिफिशियल बारिश कराएगा ताकि पानी का स्तर सुधारा जा सके. (फोटोः बिनेक बरीवल/अन्स्प्लैश)
भयानक सूखे और गर्मी से सिर्फ चीन ही नहीं अमेरिका और यूरोप के हिस्से भी जूझ रहे हैं. चीन के सरकारी अखबार China Daily की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के नेशनल मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने पिछले हफ्ते बढ़ते तापमान को देखते हुए रेड अलर्ट घोषित किया था. क्योंकि चीन के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस था. चीन में पिछले 63 सालों से तापमान में इजाफा हो रहा है. निकट भविष्य में इसके कम होने की कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है. (फोटोः एपी)
एकतरफ इतनी भयानक गर्मी ऊपर से इस बार चीन में बारिश भी 45 फीसदी कम हुई है. चीन में पानी का मुख्य स्रोत यांग्त्जे नदी ही है. उसका पानी भी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है. चीन के कई इलाकों में सरकार ने फैक्टरियों को पिछले हफ्ते बंद करवा दिया था. ताकि वो पानी की कमी को पूरा कर सकें. हाइड्रोपावर प्लांट्स को ज्यादा चलाया जा रहा है. (फोटोः एपी)
क्लाउड सीडिंग यानी मेघ बीजन की प्रक्रिया अलग-अलग देशों में अलग-अलग हो सकती है. लेकिन आमतौर पर इस प्रक्रिया के तहत आसमान में सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide) या फिर अन्य क्रिस्टल कण जो बादलों में मौजूद बर्फ के कणों जैसे हों उन्हें तय ऊंचाई पर छोड़ दिया जाता है. वायुमंडल में पानी की बूंदें इन क्रिस्टल कणों के आसपास जमा होने लगती हैं. जैसे पानी की बूंदों के बीज. जब इनकी मात्रा बढ़ जाती है, तब ये बारिश बनकर गिरने लगते हैं. (फोटोः एएफपी)
ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि जब चीन मौसम में बदलाव करने की योजना बना रहा है. पिछली साल उसने बीजिंग में क्लाउड सीडिंग की थी, क्योंकि उसे चाइनीज कम्यूनिस्ट पार्टी के सौवें साल पर फेस्टिवल मनाना था. उसे बारिश के बाद साफ आसमान और सूरज चाहिए था. इसके पहले उन्होंने इसी तरीके का उपयोग करके 2008 में ओलंपिक से पहले बादलों को आसमान से खाली कराया था. (फोटोः एएफपी)
आमतौर पर लोग सिल्वर आयोडाइड को प्लेन में भरकर उसे आसमान में एक तय ऊंचाई पर उड़ाया जाता है. पीछे स्प्रिंकर्ल्स लगे होते हैं, जिनसे सिल्वर आयोडाइड आसमान में छोड़ते हुए प्लेन निकल जाता है. प्लेन को ऐसे कई राउंड लगाने होते हैं. ताकि बड़े इलाके में बारिश हो सके. यानी प्लेन जितनी दूरी यात्रा करता है उतनी दूर बारिश होने की उम्मीद रहती है. (फोटोः गेटी)
चीन के क्लाउड सीडिंग प्रोसेस को लेकर दुनिया के सभी वैज्ञानिक सहमत नहीं हैं. क्योंकि वो जानते हैं कि यह प्रक्रिया बहुत सफल नहीं है. कुछ स्टडीज में तो यह भी कहा गया है कि क्लाउड सीडिंग से किसी भी मौसम में बहुत ढंग की बारिश नहीं कराई जा सकती. लेकिन कुछ को लगता है कि इससे अच्छी बारिश हो सकती है. (फोटोः एपी)
यह बात स्पष्ट है कि चीन सूखे से जंग लड़ रहा है. अगले कुछ महीने कृषि के हिसाब से बेहद जरूरी हैं. क्योंकि वहां चावल आदि की खेती शुरू होगी. लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट है कि चीन में गर्मी की वजह से 11.30 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन सूख गई है. जिसकी वजह से चीन को 400 मिलियन डॉलर्स यानी 3193 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. (फोटोः गेटी)