इंसानों की सोच से 14 फीसदी ज्यादा पेड़ों की प्रजातियां धरती पर मौजूद हैं. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह अब तक का सबसे सटीक डेटा है. दुनिया में पेड़ों की 73,300 प्रजातियां हैं. जिनके बारे में जानकारी है. लेकिन 9200 प्रजातियां ऐसी हैं, जिनके बारे में अब भी खोज किया जाना बाकी है. समस्या ये है कि इनमें से ज्यादातर दुर्लभ पेड़ उष्णकटिबंधीय जंगलों में हैं, जो जलवायु परिवर्तन और जंगलों के कटने की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं. (फोटोः गेटी)
वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने पेड़ों की प्रजातियों का पता करने के लिए सर्वे किया है. उन्होंने लाखों-करोड़ों पेड़ों के डेटा से इन 73,300 प्रजातियों को खोजा है. ये पेड़ धरती पर मौजूद 1 लाख से ज्यादा जंगलों में मौजूद हैं. समस्या ये है कि जिन 9200 प्रजातियों के बारे में किसी को नहीं पता, उनकी स्टडी कैसे की जाए. क्योंकि वो बेहद विपरीत परिस्थितियों वाले इलाकों में है. (फोटोः गेटी)
साइंटिस्ट्स को यह पता है कि 9200 दुर्लभ प्रजाति के पेड़ हैं. लेकिन उनके बारे में स्टडी नहीं हुई है. यह सर्वे और स्टडी इसलिए किया गया था ताकि जंगलों, पेड़ों और उनके उत्पादों के बारे में जानकारी मिल सके. साथ ही खाद्य पदार्थ, टिंबर और दवाओं के उपयोग के लिए जरूरी पेड़ों का पता चल सके. साथ ही उन पेड़ों का भी पता चले जो कार्बन डाइऑक्साइड सोख कर हमें हवा दे रहे हैं और जलवायु परिवर्तन रोकने में मदद कर रहे हैं. (फोटोः गेटी)
यह स्टडी हाल ही में प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुई है. जिसमें दुनिया भर के 150 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने 4 करोड़ से ज्यादा पेड़ों की पहचान की है. यूनिवर्सिटी ऑफ बोलोना के प्रोफेसर और स्टडी में शामिल रॉबर्टो कैजोला गैटी ने कहा कि जितने ज्यादा पेड़ों की जानकारी हमें होगी, हम उसी हिसाब से अलग-अलग जगहों के इकोसिस्टम को बचा पाएंगे. (फोटोः गेटी)
प्रो. रॉबर्टो ने बताया कि हमें अब भी अपनी धरती के बारे में सारी जानकारी नहीं है. ये डेटा तो फील्ड पर आधारित सर्वे के आधार पर निकाला गया है. हमारी भी सीमाएं होती हैं, हम हर जगह जाकर पेड़ों की स्टडी नहीं कर सकते. इसमें देश की सीमाएं, दुरूह रास्ते, घने और खतरनाक जंगल आदि शामिल हैं. जब यह स्टडी पूरी हो गई तो हमने डेटा एनालिसिस के लिए सुपर कंप्यूटर की मदद ली. जिसका नाम है फॉरेस्ट एडवांस्ड कंप्यूटिंग एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (FACAI). (फोटोः गेटी)
FACAI अमेरिका के इंडियाना में स्थित पर्ड्यू यूनिवर्सिटी की लेबोरेटरी में है. इसी प्रयोगशाला से पेड़ों की गिनती की गई है. यहीं से पता चला कि कितने पेड़ किस प्रजाति के हैं. कितनी प्रजातियां अभी खोजी जानी है. यहीं से पता चला है कि 14 फीसदी पेड़ों की प्रजातियां यानी कुल 9200 प्रजातियां अब भी खोजी जानी बाकी हैं. (फोटोः गेटी)
जिस महाद्वीप में सबसे ज्यादा पेड़ों की प्रजातियों के बारे में नहीं पता है, वो है दक्षिण अमेरिका. यहां पर 43 फीसदी पेड़ों की प्रजातियों के बारे में जानकारी नहीं है. यूरेशिया में 22%, अफ्रीका में 16%, उत्तरी अमेरिका में 15% और ओशिएनिया में 11%. आमतौर पर जंगलों की सेहत सही रहती है. वह वायुमंडल को साफ-सुथरा रखते हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा हैं ये जंगल लेकिन इन पर भी लगातार खतरा है. (फोटोः गेटी)
पहला खतरा है पश्चिमी देशों में खाया जाने वाले बीफ, पाम ऑयल और सोया. पाम ऑयल और सोया का उपयोग मवेशियों के खाने में भी होता है. दूसरा खतरा है- जलवायु परिवर्तन. तीसरी नई और खतरनाक दिक्कत है जंगल की आग. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. यादविंदर मलही ने कहा कि ट्रॉपिकल जंगल हमारी धरती के फेफड़ों के रूप में काम करते हैं. ये लगातार कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं, ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करते हैं. इसलिए इनपर ध्यान देना बहुत जरूरी है. (फोटोः गेटी)
अब हम आपको बताते हैं कि किस महाद्वीप पर कितनी प्रजातियां और पेड़. उत्तरी अमेरिका में 1873 प्रजातियों के 2.40 करोड़ से ज्यादा पेड़, यूरेशिया में 4560 प्रजातियों के 60 लाख से ज्यादा पेड़, ओशिएनिया में यूरेशिया जितनी ही प्रजातियां और पेड़ हैं, दक्षिण अमेरिका में 16,890 प्रजातियों के 17.90 लाख से ज्यादा पेड़ मौजूद है. जबकि, अफ्रीका में 3529 प्रजातियों के 1.57 लाख से ज्यादा पेड़ मौजूद हैं. (फोटोः गेटी)
जिन प्रजातियों के बारे में नहीं पता है उनमें से सबसे ज्यादा 40 फीसदी दक्षिण अमेरिका में हैं. इसके अलावा अमेजन और एंडीज के ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल जंगलों, ग्रासलैंड्स, सवाना और श्रबलैंड्स में कई दुर्लभ पेड़ मौजूद हैं, जिनके बारे में अभी तक जानकारी नहीं है. करीब 3000 प्रजातियां तो बेहद दुर्लभ और खत्म होने की कगार पर पहुंच चुकी है. (फोटोः गेटी)