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पहली बार इंसान-बंदर के सेल से बना 'भ्रूण', 95 साल पहले 'ह्यूमैन्जी' बनाने का हुआ था प्रयोग

aajtak.in
  • न्यूयॉर्क,
  • 16 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST
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पहली बार वैज्ञानिकों ने इंसानों और बंदरों की कोशिकाओं को मिलाकर एक भ्रूण तैयार किया है. एकदूसरे का विरोध करने वाले अमेरिका और चीन के साइंटिस्ट्स ने मिलकर ये काम किया है. इस प्रयोग का मकसद है भविष्य में इंसानों और बंदरों के लिए नए अंगों को विकसित करना ताकि किसी को ट्रांसप्लांट के समय दिक्कत न हो. वैसे 95 साल पहले रूस के एक वैज्ञानिक ने इंसानों और चिम्पैंजी को मिलाकर एक हाइब्रिड जीव बनाने की कोशिश की थी. हालांकि उस समय इस प्रयोग को लेकर काफी विरोध और चर्चा हुई थी. इस जीव को नाम दिया गया था ह्यूमैन्जी (Humanzee). (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टीट्यूट की साइंस एंड टेक्नोलॉजी की शोधकर्ता क्रिस्टेन मैथ्यूस ने पूछा कि आखिर ये प्रयोग किया क्यों गया? क्रिस्टेन ने पूछा कि क्या इस प्रयोग से लोगों में चिंता नहीं बढ़ेगी. इससे जिस प्रजाति का जीव पैदा होगा उसके साइड इफेक्ट्स क्या होंगे? वैसे अमेरिका और चीन के साइंटिस्ट का यह प्रयोग साइंस जर्नल Cell में प्रकाशित हुआ है. (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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कैलिफोर्निया स्थित साल्क इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज की जीन एक्सप्रेशन लेबोरेटरी के प्रोफेसर जुआन कार्लोस इज्पीसुआ बेलमॉन्ट ने कहा कि अंगों के प्रत्यारोपण को लेकर होने वाली समस्या से निजात मिलेगी. क्योंकि इस समय शरीर के अंगों की मांग सप्लाई से बहुत ज्यादा है. प्रोफेसर जुआन कार्लोस इस इंसानों और बंदरों की कोशिकाओं को मिलाकर भ्रूण बनाने वाले प्रयोग में शामिल हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बायोएथिसिस्ट इन्सू ह्यून ने कहा कि मुझे इस प्रयोग में कोई दिक्कत नहीं दिख रही है. यह लंबे समय बाद इंसानों के फायदे के लिए किया गया प्रयोग है. जुआन कार्लोस ने चीन और कुछ अन्य देशों के वैज्ञानिकों की टीम बनाई. इसके बाद इंसानों के इंड्यूस्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल्स की 25 कोशिकाएं लेकर उन्हें बंदर के भ्रूण में डाला. क्योंकि इन बंदरों के जीन्स इंसानों के जीन्स से बहुत ज्यादा मिलते हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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जुआन कार्लोस ने बताया कि एक दिन बाद हमने देखा कि भ्रूण के अंदर इंसान की 132 कोशिकाएं विकसित हो रही थीं. इसके बाद हमने 19 दिनों तक इसका अध्ययन किया. इस दौरान हमने स्टडी की कि इंसान की कोशिकाएं अन्य जीवों की कोशिकाओं के साथ कैसे बातचीत करती हैं. भविष्य में इससे फायदा ये होगा कि हम किसी अन्य जीव के शरीर में इंसानी अंग विकसित कर सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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जुआन ने कहा कि इस तरह के मिश्रित भ्रूण को चिमेरास (Chimeras) कहते हैं. ऐसे जीवों का जिक्र ग्रीस की प्राचीन कहानियों में होता था. जिसमें एक जीव शेर, बकरी और सांप और आधा इंसान होता था. हमारा मकसद किसी नए जीव को पैदा करने का नहीं है. न ही हम किसी शैतान को बनाना चाहते हैं. हम सिर्फ इंसानों की भलाई के लिए सोच रहे हैं. इस प्रयोग से 95 साल पहले भी रूस के एक वैज्ञानिक ने इंसानों और चिम्पैंजी का हाइब्रिड जीव बनाया था. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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इंसानों और चिम्पैंजी का हाइब्रिड ह्यूमैन्जी (Humanzee) बनाने वाले रूसी साइंटिस्ट का नाम था इलिया इवानोविच इवानोव (Ilya Ivanovich Ivanov). इलिया 1870 में रूस में पैदा हुए थे. बायोलॉजिस्ट इलिया ने आर्टिफिशियल इसेंमिनेशन यानी कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में बहुत काम किया था. आज भी इनके किए हुए प्रयोगों का अध्ययन किया जाता है. इलिया ने  ह्यूमैन्जी (Humanzee) बनाने से पहले जेडॉन्क (Zebra और Donkey) बनाया. इसके बाद चूहे से गिनी पिग बनाया. इसके अलावा इन्होंने हिरण और गाय को मिलाकर एक जीव बनाने की असफल कोशिश की थी. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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साल 1910 में इलिया ने दुनिया भर के बड़े जंतु विज्ञानियों को बताया था कि वो बहुत जल्द इंसानों (Human) और चिम्पैंजी (Chimpanzee) को मिलाकर ह्यूमैन्जी (Humanzee) बनाएंगे. उस समय ये एक थ्योरी मात्र थी. तब जंतु विज्ञानियों ने कहा था कि हो सकता है कि इससे एलियन जैसा कुछ पैदा हो. लेकिन साल 1917 में रूसी आंदोलन के समय इलिया को ये एक्सपेरिमेंट करने का मौका मिला. उन्होंने फ्रेंच गुएना से एक चिम्पैंजी मंगाया. उन्हें उनका एक्सपेरीमेंट पूरा करने के लिए सोवियत फाइनेंशियल कमीशन की तरफ से 10 हजार डॉलर की फंडिंग हुई थी. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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तब इलिया इवानोविच इवानोव ने कहा था कि मैं मुझे इंसानों के स्पर्म को वानर में डालना है. हम इसे एक सकारात्मक प्रयोग बनाना चाहते हैं. मैं डार्विन की उस थ्योरी को पुख्ता करना चाहता हूं जिसमें उन्होंने कहा था कि वानर इंसानों के सबसे करीबी जीव हैं. लेकिन मुझे पता है कि मेरे इस प्रयोग से दुनिया भर के कई धर्मों के लोगों को दिक्कत होगी. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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1926 में इलिया इवानोविच अपनी लैब में गए और प्रयोग शुरू किया. इसमें उनका साथ दिया सर्ज वोरोनॉफ (Serge Voronoff) ने. सर्ज ने इंसान की ओवरी को चिम्पैंजी के शरीर में ट्रांसप्लांट किया. इसके बाद इन दोनों लोगों ने इंसान के स्पर्म को उस चिम्पैंजी की प्रत्यारोपित ओवरी में डाला. लेकिन नतीजा नहीं निकला. दो बार प्रयास करने के बाद ये दोनों लोग विफल रहे. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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लेकिन इलिया इवानोविच नहीं माने. उन्होंने एक बेहद विवादित कदम उठाने के बारे में सोचा. जिसके बारे में उन्होंने किसी को नहीं बताया. लेकिन उन्हें इसके लिए फ्रांसीसी गवर्नर से अनुमति लेनी थी. उन्हों गवर्नर को बताया कि वो पहले अफ्रीकन महिला के शरीर में चिम्पैंजी का स्पर्म डालेंगे. जिसके बारे में उस महिला को पता नहीं होगा. इसके कुछ महीने बाद जब महिला ने एक बच्चे को जन्म देगी तो उन्हें उम्मीद है कि वो बच्चा लंबे बालों वाला होगा. लेकिन, फ्रांस के गवर्नर ने अनुमति नहीं दी. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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इसके बाद भी इलिया इवानोविच नहीं माने. वो 20 चिम्पैंजी के साथ अबखाजिया इलाके में रहने लगे. उन्होंने सोवियत की महिलाओं को समझाने की कोशिश की लेकिन कोई नहीं माना. लेकिन पांच महिलाएं कुछ दिन बाद इस प्रयोग के लिए खुद वॉलंटियर करने आईं. किस्मत खराब थी, उस समय इलिया के पास चिम्पैंजी के स्पर्म की कमी पड़ गई. इस बार फिर हाथ से मौका निकल गया. क्योंकि उनके पास एक ही नर चिम्पैंजी था. इस चिम्पैंजी को ब्रेन हेमोरेज हो गया. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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इसके बाद इलिया इवानोविच को सोवियत संघ के वैज्ञानिकों के दबाव में वहां की सरकार ने इन्हें कजाकिस्तान भेज दिया. साथ ही उन्हें किसी भी तरह का प्रयोग करने पर मनाही लगा दी गई. कजाकिस्तान से जब छोड़ा गया तो वह उसके एक साल के अंदर दुनिया छोड़कर चले गए. लेकिन तब से यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार इलिया इवानोविच आधा इंसान-आधा चिम्पैंजी वाला जीव क्यों बनाना चाहते थे. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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इलिया दुनिया भर के लोगों को बताना चाहते थे कि डार्विन की वह थ्योरी सही है कि इंसान वानरों के वंशज हैं. दूसरा मकसद ये था कि किसी जीव की एक बेहतर प्रजाति बनाना ताकि वह बुद्धिमान और ताकतवर हो. तीसरा मकसद ये हो सकता था कि इससे समाज में एक नए जीवों की पौध पैदा होती. (फोटोः इलिया इवानोविच/सोशल मीडिया)

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