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साइंस न्यूज़

गोवा के पांच Sea Beach को लील रहा समंदर, बचाने के लिए अपनाई जाएगी नीदरलैंड की ये टेक्नोलॉजी

aajtak.in
  • पणजी,
  • 25 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST
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गोवा के पांच बीच यानी समुद्री तटों पर भारी खतरा मंडरा रहा है. ये समुद्र में डूब रहे हैं. वजह है मिट्टी का कटाव. ये बात बताई राज्य के पर्यावरण मंत्री निलेश कबराल ने. वो विधानसभा में निर्दलीय विधायक एलेक्सियो रेजिनाल्डो लोरेंको द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब दे रहे थे. (फोटोः एएफपी)

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निलेश ने बताया कि पेरनेम तालुका के केरी बीच, मजोर्डा, सालसेटे के मोबोर से बेतूल बीच तक, बेतलबातिम बीच, क्वेपेम में कनागिनी बीच और बार्डेज का कोको बीच खतरे में है. यहां पर लगातार मिट्टी का कटाव हो रहा है. ये तट समुद्री बहाव में बहते जा रहे हैं. डूब रहे हैं. (फोटोः एएफपी)
 

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निलेश ने बताया कि गोवा सरकार के वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट ने इसकी स्टडी के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) को कहा था. जिसके बाद 2021 में उन्होंने रिपोर्ट दी थी. यह स्टडी विश्व बैंक द्वारा पोषित नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट के तहत की गई थी. (फोटोः गेटी)

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गोवा कोस्टल मैनेजमेंट एनवायरमेंट सोसाइटी ने समुद्री तटों की सुरक्षा पर काम शुरू कर दिया है. ये नीदरलैंड्स की एक एजेंसी से संपर्क में हैं. सोसाइटी ने एजेंसी के एक्सपर्ट को गोवा बुलाया है. ताकि वो आकर शुरुआती स्टडी करके यह बता सकें कि किस समुद्री तट को किस तरह से बचाया जा सकता है. (फोटोः अन्स्प्लैश)

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फिलहाल सरकार ने केरी बीच पर टेट्रापॉड्स लगाए हैं. बार्डेज के कोको बीच पर कॉन्क्रीट के ब्लॉक्स, खानागिनिम बीच पर पत्थर लगाकर मिट्टी के कटाव को रोकने का प्रयास किया जा रहा है. अब ये जानिए कि आखिर कार नीदरलैंड्स वाले कैसे अपने समुद्री तटों को बचाते हैं... (फोटोः पिक्साबे)

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नीदरलैंड्स का 26 फीसदी हिस्सा समुद्री जलस्तर से नीचे है. यानी सर्वाइवल के लिए जंग लड़नी पड़ती है. इसलिए इस डच देश ने अपने देश के चारों तरफ कई तरह के इनोवेटिव निर्माण किए हैं. इसमें सबसे बड़ा है स्टॉर्म सर्ज बैरियर मेस्लेंट. यह रॉटरडम इलाके को समुद्री तूफान, उफान और सुनामी से बचाता है. (फोटोः गेटी)

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रॉटरडम यूरोप का सबसे बड़ा बंदरगाह है. ये बैरियर दो एफिल टावर जितना बड़ा है. नीदरलैंड्स के अंदर दो बड़ी नदियां बहती हैं. रीन और मूज. रीन और मूज नीदरलैंड्स के पूर्व से पश्चिम की दिशा में बहती हैं. नीदरलैंड्स के प्रशासन ने नदियों को इस हिसाब से मोड़ा है कि यातायात आसान हो और बाढ़ से बचाव हो. 

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नदियों और समुद्री किनारों पर जहां भी हैं... वहां पर बंधे बना रखे हैं. यानी ऐसे बांध जो शहरों, गांवों और कस्बों को नदियों की बाढ़ और समुद्री उफान से बचाते हैं. नीदरलैंड्स में बाढ़ को सैन्य दुश्मन माना गया है. इसलिए इसे नियंत्रित करने का बड़ा काम मिलिट्री के पास भी है. ये नदियों और समुद्र के पानी विचित्र इस्तेमाल करते हैं. 

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नीदरलैंड्स की मिलिट्री नदियों और समुद्री बाढ़ के पानी से ऐसा कवर तैयार कर चुके हैं, जो सिर्फ एक फीट पानी से भरता है. यानी न इसमें कोई नाव आ सकती है. न ही सैनिक गोते लगा सकता है. न ही चल सकता है. क्योंकि पानी के अंदर नहरें बनी हैं. गड्ढे बने हैं. ट्रैप्स हैं. जाल बिछे हैं. इसके वजह से नीदरलैंड्स कई बार जंग हारने से बचा है. 

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20वीं सदी में नीदरलैंड्स में जुईदर्जी वर्क्स शुरू किया गया. इसका मकसद था पूरे देश में बांध बनाना. जमीन का सही इस्तेमाल करना. पानी के ड्रेनेज का सिस्टम बनाना. इसके बाद डेल्टा वर्क्स शुरू हुए. ये समुद्री लहरों से बचाने के लिए बनाई गई ऊंची-ऊंची दीवारें थीं. इस काम को बढ़ावा दिया 1953 में आई नॉर्थ सी की बाढ़ ने.

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फिर Oosterscheldekering स्टॉर्म सर्ज बैरियर बनाया गया. जो समुद्री तूफानों के समय बंद कर दिया जाता है. यह एक तरह का बांध है. जिसके दरवाजे आम दिनों में खुले रहते हैं. बाद में इसको ध्यान में रखते हुए मेस्लेंट स्टॉर्म सर्ज बैरियर बनाया गया. यह बैरियर आमतौर पर खुला रहता है. पिछली बार यह 2007 में ही बंद हुआ था. 

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हालांकि अब नीदरलैंड्स पर समुद्र का खतरा है. क्योंकि समुद्र का जलस्तर लगातार ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बढ़ रहा है. ऐसी गणना है कि इस सदी के अंत तक इस इलाके में समुद्री जलस्तर तीन फीट बढ़ जाएगा. अभी नीदरलैंड्स की सरकार समुद्री किनारों पर और अधिक डाइक्स बनाने की योजना पर काम कर रही है. 
 

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