अगर आपको खिड़की पर या घर में कभी कोई मक्खी मरी मिले, जिसके ऊपर फंगस यानी कवक लगा हो, तो समझ जाइए कि यह एक डेथ ट्रैप यानी मौत का जाल है. मरी हुई मक्खी पर फंगस ने हमला करके उसके शरीर पर अपना कब्जा कर लिया है. अब वह ऐसा रसायन छोड़ रहा है जिससे नर मक्खी उसकी ओर खिंचती चली आती है. उस रसायन के असर में फंगस से लिपटी मृत मादा मक्खी के साथ बनवाता है शारीरिक संबंध. इसके बाद जो होता है वह हैरान कर देने वाली घटना है...(फोटोः गेटी)
असल में यह फंगस मादा मक्खी के शरीर को संक्रमित करने के बाद उसके दिमाग में असर करता है. मादा मक्खी राहत की खोज में ऊंचाई पर उड़ने की कोशिश करती है. ऊर्जा खत्म होने के साथ ही वह मर जाती है. इसके बाद फंगस उसके शरीर में अपने कण बढ़ाता है. उन्हें हवा में रिलीज करता है. जिसकी गंध से नर मक्खी आती है. सूजी हुई सफेद मक्खी को देखकर वह उसके साथ सेक्स करता है. यही फंगस उस नर मक्खी को अपना शिकार बनाता है. (फोटोः गेटी)
नर मक्खी के मरने के बाद फंगस उसका उपयोग सिर्फ अपनी आबादी बढ़ाने के लिए करता है. इस तरह से ये फंगस कई मक्खियों को अपना शिकार बनाता है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट कैरोलिन इलिया ने अपने रिसर्च में बताया कि यह काम बेहद खतरनाक है. फंगस किस तरह से मक्खियों को अपना शिकार बनाता है, वो तरीका एक मौत का जाल है. (फोटोः गेटी)
इस फंगस का नाम है एंटोमॉफथोरा मस्के (Entomophthora muscae). यह ऐसा फंगस है जो प्रकृति का अजूबा है. खतरनाक शिकारी है. कैरोलिन ने बताया कि यह फंगस नर और मादा मक्खी के शारीरिक संबंधों का फायदा उठाकर अन्य मक्खियों के बीच फैलता है. इससे निकलने वाले रसायन की वजह से नर मक्खी को यह नहीं पता चलता कि वह जीवित मक्खी के साथ सेक्स कर रहा है या फिर मृत मक्खी के साथ. यानी यह फंगस दिमाग पर भी असर करता है. (फोटोः गेटी)
इस स्टडी को और आगे बढ़ाने के लिए कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के इवोल्यूशनरी इकोलॉजिस्ट हेनरिक डे फाइन लिट और पीएचडी स्टूडेंट आंद्रियास नॉनड्रप हैनसेन ने कहा लैब में यह प्रयोग किया. उन्होंने एक मादा मक्खी में फंगस का संक्रमण कराया. जिससे वह मक्खी कुछ ही मिनटों में मर गई. उसके बाद उस जगह पर एक स्वस्थ नर मक्खी को छोड़ा गया. वहां एक हैरान करने वाला नजारा सामने आया. पांच बार प्रयास करने के बाद नर मक्खी ने जैसे ही मरी हुई मादा मक्खी से संबंध बनाया, वह भी फंगस के असर से तुरंत मर गया. लेकिन इतनी सी प्रक्रिया में फंगस ने अपने हजारों कण हवा में छोड़ दिए. (फोटोः गेटी)
दूसरा प्रयोग किया गया. जिसमें एक मृत मादा मक्खी फंगस से संक्रमित थी, दूसरी नहीं थी. नर मक्खी को छोड़ा गया ताकि वह फैसला करे कि उसे किसके साथ संबंध बनाना है. लेकिन नर मक्खी यह समझ ही नहीं पा रहा था कि मृत मादाओं में से स्वस्थ तरीके से कौन मरा है. वह फंगस से संक्रमित मरी हुई मक्खी के साथ जाकर संबंध बनाने लगता है. उसके बाद वह भी मर जाता है. हेनरिक और हैनसन ने कहा कि फंगस के कण नर मक्खी के लिए एफ्रोजिडिएक (Aphrodisiac) का काम कर रहे हैं. यानी उसके यौन व्यवहार को उत्तेजित कर रहे थे. वह भी बेहद उच्च स्तर पर यानी जिधर से ज्यादा उत्तेजना मिली, नर मक्खी उसी तरफ चला गया. (फोटोः गेटी)
वेस्ट वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के मैथ्यू कैसन कहते हैं कि यह स्टडी बेहद हैरान करने वाली है. मैथ्यू कीड़ों को मारने वाले फंगस के एक्सपर्ट हैं. मैथ्यू अब हेनरिक और हैनसन से फंगस का जीनोम लेकर उसकी स्टडी कर रहे हैं. वैज्ञानिकों ने देखा कि एंटोमॉफथोरा मस्के (Entomophthora muscae) फंगस की गंध ही नर मक्खी का दिमाग खराब करती है. यह घास के जैसी मीठी गंध होती है. इसका अध्ययन करने के लिए हेनरिक और हैनसन ने एक नर मक्खी के एंटीना पर सूक्ष्म इलेक्ट्रोड लगाया ताकि गंध का दिमाग पर पड़ने वाला असर मापा जा सके. (फोटोः गेटी)
परिणाम हैरान करने वाले आए. जब नर मक्खी फंगस की गंध के पास आया तो उसके दिमाग में इलेक्ट्रिकल करंट ज्यादा हो गया. यानी फंगस के गंध का रसायन उसके दिमाग को तेजी से अपनी ओर खींच रहा था. मरी हुई मादा मक्खी के साथ सेक्स करने के लिए उसकी उत्तेजना को उच्चतम स्तर पर ले जा रहा था. जब फंगस के केमिकल की जांच की गई तब पता चला कि इसमें मिथाइल ब्रांच्ड एलकेंस (Methyl-branched Alkanes) जैसा असर है. (फोटोः गेटी)
मिथाइल ब्रांच्ड एलकेंस (Methyl-branched Alkanes) घरेलू मक्खियों को संभोग करने के लिए मादा की तरफ खींचती हैं. लेकिन वैज्ञानिक अभी तक फंगस के अंदर मौजूद असली रसायन का पता नहीं कर पाए हैं. लेकिन इस दौरान वैज्ञानिकों को यह पता चला कि घर से अगर मक्खियों को भगाना हो तो इस रसायन का उपयोग करके उन्हें एक जगह बंद करके खत्म किया जा सकता है. या फिर कहीं दूर ले जाकर छोड़ा जा सकता है. (फोटोः गेटी)
हेनरिक ने कहा कि फंगस का संक्रमण घर या बाहर कहीं भी हो सकता है. ये फंगस मादा मक्खी को खत्म करने से पहले उसे पूरी तरह से निचोड़ लेता है. इसी दौरान वह नर मक्खी से संबंध बनवाता है. ताकि वह अपने संक्रमण को अन्य मक्खियों तक फैला सके. इसलिए लोगों को भी चाहिए जो लोग फूलों की खुशबू लेने के शौकीन हैं, वो ये न करें, क्योंकि हो सकता है कि उस फूल पर कोई संक्रमित मक्खी बैठी हो, जिससे फंगस का संक्रमण आपमें फैल जाए. (फोटोः गेटी)