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साइंस न्यूज़

अमेरिका-कनाडा में पड़ी भीषण गर्मी से मर गए 100 करोड़ से ज्यादा समुद्री जीव

aajtak.in
  • टोरंटो,
  • 11 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 4:22 PM IST
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उत्तर-पश्चिम अमेरिका और कनाडा में पिछले 15 दिन पड़ी भीषण गर्मी की वजह से प्रशांत महासागर और आसपास के सागरों में 100 करोड़ से ज्यादा समुद्री जीव मारे गए हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक अधिक तापमान को ये जीव बर्दाश्त नहीं कर पाए. इस इलाके में इतनी गर्मी पड़ी थी कि सड़कों पर दरारें आ गई थीं. खुले में रखे अंडों से ऑमलेट बन जा रहा था. कनाडा में तो एक कस्बा जलकर खाक हो गया. और तो और घरों की दीवारें तक पिघल गई थीं. (फोटोः गेटी)

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अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के मुताबिक पिछले दो हफ्तों में पड़ी भीषण गर्मी की वजह से पश्चिमी अमेरिका और कनाडा के आसपास मौजूद सागरों में 1 बिलियन यानी 100 करोड़ से ज्यादा समुद्री जीवों की मौत हुई है. घोंघे (Mussels) अपने सेल में पक गए. समुद्री किनारों और पत्थरों पर मृत और सूखे हुए सी स्टार (Sea Stars) देखे गए. इतना ही नहीं गर्मी की वजह से पक रही नदियों में सालमन मछली (Salmon Fish) को तैरने में दिक्कत हो रही थी. (फोटोः क्रिस्टोफर हार्ले)

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यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के मरीन बायोलॉजिस्ट क्रिस्टोफर हार्ले कहते हैं कि यह उन हॉलीवुड फिल्मों जैसा नजारा था, जिनमें प्रलय आने के बाद की स्थिति दिखाते हैं. इन मृत जीवों की संख्या पता करने के लिए क्रिस्टोफर हार्ले ने कहा समुद्री तटों का सहारा लिया. उससे एक मॉडल बनाया. उन्होंने बताया कि एक समुद्री तट पर कितने मरे हुए घोंघे और सी स्टार दिखे, उससे अंदाजा लगता है कि उनके निवास स्थान पर कितने और ऐसे जीव मारे गए होंगे.  (फोटोः क्रिस्टोफर हार्ले)

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कुछ सरकारी संस्थान गर्म इलाकों से समुद्री जीवों को उठाकर ठंडे पानी में छोड़ने का प्रयास भी कर रहे हैं. उदाहरण के लिए इडाहो फिश एंड गेम एजेंसी गर्म नदियों से सालमन मछली को पकड़कर ठंडे हैचरी में स्थानांतरित कर रहे हैं. लेकिन हर मछली की किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. कैलिफोर्निया के सेंट्रल वैली में स्थित चिनूक सालमन मछलियां (Chinook Salmon Fish) लाखों की संख्या में मारी गईं. कइयों के तो अंडे ही खराब हो गए.  (फोटोः क्रिस्टोफर हार्ले)

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नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉसफियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के बायोलॉजिस्ट जोनाथन एंब्रोस ने कहा कि करीब इस गर्मी में हमें समुद्री जीवों के बीच 90 फीसदी मृत्यु दर देखने को मिला है. हो सकता है कि ये इससे ज्यादा है. लेकिन इस बार गर्मी से मरने वाले समुद्री जीवों की संख्या ने झकझोर कर रख दिया है. 100 करोड़ से ज्यादा समुद्री जीवों के मरने का मतलब है किसी बड़े इलाके में पूरे पारिस्थितिक तंत्र का बिगड़ जाना. (फोटोः क्रिस्टोफर हार्ले)

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जोनाथन एंब्रोस कहते हैं कि फिलहाल देश भर के समुद्री वैज्ञानिक और रिसर्चर इन जीवों को गर्मी से बचाने का उपाय खोज रहे हैं. क्योंकि अगर हम इन मृत जीवों की संख्या देखकर डिप्रेस हो गए तो हम उन्हें बचाने के लिए कोई काम नहीं कर पाएंगे. हमें गर्मी कम करने के लिए, उससे बचने के लिए, जीव-जंतुओं को उससे बचाने के लिए काफी ज्यादा इनोवेटिव और बड़े पैमाने के प्रयास करने होंगे. (फोटोः क्रिस्टोफर हार्ले)

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आपको बता दें कि जून महीने के आखिरी दो हफ्तों में कनाडा और उत्तर-पश्चिम अमेरिका में भीषण गर्मी पड़ी थी. पारा 49.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. जो कि एक नया रिकॉर्ड था. वर्ल्ड मेटरियोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक इसे 'प्रेशर कूकर' हीटवेव कहा जा रहा था. इस गर्मी की वजह से कनाडा और उत्तरी-पश्चिम अमेरिका में स्कूलों को बंद कर दिया गया था. कोरोना जांच केंद्रों को भी बंद कर दिया गया था. क्योंकि गर्मी की वजह से सड़कों पर दरारें आ चुकी थी. अंडे को बाहर रख दो तो वो ऑमलेट बन जा रहा था. घरों के बाहर लगे धातु के कवर पिघल कर अपना आकार बदल रहे थे. कई स्थानों पर धातुओं से बने ढांचे पिघले हुए और टेढ़े-मेढ़े देखे गए थे.

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सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही थीं. मौसम विज्ञानियों के अनुसार पैसिफिक नॉर्थवेस्ट में उच्च दबाव की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हुई थी. जलवायु परिवर्तन की वजह से इसकी स्थिति और बिगड़ती जा रही थी. गैर-सरकारी संस्था बर्कले अर्थ की माने तो इस इलाके के तापमान में पिछली आधी सदी में 1.7 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हुआ है. धातुओं से बनने वाली सड़कों और ढांचों के लिए ये बढ़ता हुए तापमान नुकसानदेह है. जिन घरों या इमारतों के बाहर इनकी परत होती है, उनका आकार बिगड़ता जा रहा था.  (फोटोः गेटी)

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इसे 'प्रेशर कूकर' हीटवेव (Pressure Cooker Heatwave) क्यों कह रहे हैं. WMO के अनुसार जो तापमान में वृद्धि हुई है, वह आसपास के इलाकों से बाहर निकल नहीं पा रही है. वह इस बड़े इलाके में सीमित हो गई है. जिसकी वजह से यह प्रेशर कूकर जैसा काम कर रहा है. इस वजह से बहुत से लोगों को दिक्कत होने वाली है, क्योंकि यह इलाका आमतौर पर ठंडा रहता है. लोग एसी नहीं लगाते हैं. लेकिन अब उन्हें इसकी व्यवस्था भी करनी होगी. (फोटोः गेटी)

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WMO ने कहा था कि इस गर्मी की वजह से लोगों की सेहत, खेती और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. WMO की कनाडा की मौसम विज्ञानी आर्मेल कैस्टेलैन ने कहा कि इस हफ्ते यह तापमान और बढ़ सकता है. जून के पहले दो हफ्ते में ही अमेरिका के उत्तर-पश्चिम में स्थित रेगिस्तान और कैलफोर्निया में ऐसी ही भयानक गर्मी पड़ी थी. (फोटोः गेटी)

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धरती के उत्तरी गोलार्द्ध यानी उत्तरी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप, पूर्वी यूरोप, इरान और उत्तर-पश्चिम भारतीय महाद्वीप में भी इसी तरह की गर्मी पड़ रही थी. हालांकि इतनी ही गर्मी अब भी हो रही है. लेकिन जून के आखिरी दो हफ्ते जैसी स्थिति फिलहाल कहीं नहीं हैं. लेकिन दुनिया के कई इलाकों में रोज का औसत तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. कुछ स्थानों पर यह 50 डिग्री सेल्सियस तक भी जा रहा है. (फोटोः गेटी)

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पश्चिमी रूस और कैस्पियन सागर के आसपास का इलाका भी काफी ज्यादा गर्म हो रहा है. WMO के मुताबिक रूस की राजधानी मॉस्को और उसके आसपास के इलाके में दिन में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और रात में 20 डिग्री सेल्सियस तक रहने की उम्मीद है. लेकिन कैस्पियन सागर के आसपास यह दिन में अधिकतम 40 और रात में 25 डिग्री सेल्सिय तक जा सकती है. जो कि इस इलाके के हिसाब से ज्यादा गर्म है. (फोटोः गेटी)

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कनाडा के वैंकूवर में गर्मी की वजह से 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. चारों तरफ भयानक लू चल रही है. इसके बाद एक कस्बा 90 फीसदी जलकर खाक हो गया था. यहां पर भी काफी नुकसान हुआ था. उस समय तापमान 49.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा था. यहां पर उस समय यह तापमान लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड तोड़ रहा था. (फोटोः गेटी)

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गर्मी की यह हालत अमेरिका ओरेगॉन प्रांत से लेकर कनाडा के आर्कटिक इलाके तक फैला हुई है. इन इलाकों के ऊपर गर्म हवा बह रही है. अमेरिका में पोर्टलैंड, ओरेगॉन और सिएटल की हालत बहुत खराब है. यहां पर 1940 के बाद इतनी गर्मी पड़ी है. (फोटोः रॉयटर्स)

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