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साइंस न्यूज़

LCH Prachand: सेना में शामिल होंगे 156 प्रचंड अटैक हेलिकॉप्टर्स, China-PAK की हालत हो जाएगी खराब

मंजीत नेगी
  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:23 PM IST
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इंडियन एयरफोर्स ने डिफेंस मिनिस्ट्री ने 156 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर्स प्रचंड (Light Combat Helicopters Prachand) की मांग की है. केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इंडिया टुडे को यह जानकारी दी. ऐसी उम्मीद है कि मंत्रालय वायुसेना की इस मांग को जल्द ही हरी झंडी दे देगा. ये सारे हेलिकॉप्टर्स स्वदेशी होंगे. 156 में से 66 वायुसेना के पास रहेंगे. जबकि, 90 प्रचंड हेलिकॉप्टर्स भारतीय थल सेना के पास जाएंगे. 

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इन दोनों ही सेनाओं के पास फिलहाल 15 हेलिकॉप्टर्स हैं. 10 वायुसेना के पास. पांच थल सेना के पास. जिन्हें चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के पास तैनात किया गया है. इसके अलावा जो नए हेलिकॉप्टर्स आएंगे, उन्हें भी चीन और पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक प्वाइंट्स पर तैनात किया जाएगा. वायुसेना ने इन हेलिकॉप्टर्स के साथ सेना का युद्धाभ्यास भी किया था. 

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पाकिस्तान की सीमा के पास पहला स्क्वॉड्रन तैनात है. जिसकी वजह से पाकिस्तान सीमा के आसपास निगरानी करना ज्यादा बेहतर और सुरक्षित हो गया है. साथ ही आतंकी और घुसपैठियों पर लगाम लगाने में मदद मिल रही है. प्रचंड हेलिकॉप्टर्स को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बना रही है. 

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प्रचंड हेलिकॉप्टर्स की वजह से कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR), डिस्ट्रक्शन ऑफ एनेमी एयर डिफेंस (DEAD), काउंटर इनसर्जेंसी (CI) ऑपरेशन, रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA's) को मार गिराने में आसानी होगी और हाई एल्टीट्यूड बंकर बस्टिंग ऑपरेशंस में मदद मिलेगी. 

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इससे पहले बेंगलुरु में LCH का पहला स्क्वॉड्रन बना चुकी है. ताकि LAC के पास चीन की हरकतों को रोकने में मदद मिले. इन हेलिकॉप्टरों को सात यूनिटों में सात अलग-अलग पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा. LCH में दो लोग बैठ सकते हैं. यह 51.10 फीट लंबा, 15.5 फीट ऊंचा है. 

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पूरे साजो सामान के साथ इसका वजन 5800 किलोग्राम हता है. इसपर 700 KG के हथियार लग सकते हैं. अधिकतम गति 268 किमी प्रतिघंटा है. रेंज 550 किमी है. लगातार 3 घंटे 10 मिनट की उड़ान भरने की क्षमता है. यह पर्याप्त मात्रा में हथियारों और जरूरी चीजों के साथ 16,400 फीट की ऊंचाई पर भी टेकऑफ कर सकता है. 

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LCH में 20 मिमी की एक तोप है. चार हार्डप्वाइंट्स होते हैं यानी रॉकेट्स, मिसाइल और बम लग सकते हैं. या फिर इनका मिश्रण. इस हेलिकॉप्टर का कॉकपिट ग्लास का है. साथ ही फ्रेम कंपोजिट है. भविष्य में इसके वर्जन को और भी ज्यादा अपग्रेड किया जाएगा. 

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ध्रुव हेलिकॉप्टरों को विकसित करके ही LCH बनया गया है. इस हेलिकॉप्टर की जरुरत तब पड़ी थी, जब करगिल युद्ध हो रहा था. तब से इसे लेकर काम चल रहा था. ट्रायल्स के दौरान इसने भारत के हर तरह के इलाकों में उड़ान भरने की क्षमता को प्रदर्शित किया था. चाहे वह सियाचिन हो या फिर 13 हजार से लेकर 16 हजार फीट ऊंचे हिमालय के पहाड़ हों. या फिर रेगिस्तान या जंगल. 

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एलसीएच हेलिकॉप्टरों की तैनाती के बाद पुराने Mi-35 और Mi-25 हेलिकॉप्टरों को हटाया जाएगा. ये दोनों ही हेलिकॉप्टर रूस ने बनाए थे. इनका उपयोग वायु सेना बहुत पहले से करती आ रही है. इनके एक स्क्वॉड्रन तो खत्म कर दिया गया है. उनकी जगह क्योंकि इनकी जगह पर बोईंग कंपनी का एएच-64ई (AH-64E) अपाचे हेलिकॉप्टर तैनात किए गए है. 

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