ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ ने ISG-ISRS नेशनल सिम्पोजियम में एक प्रेजेंटेशन दिया. उन्होंने चांद पर भारतीय एस्ट्रोनॉट्स के पहुंचने का पूरा प्लान बताया. उनका टॉपिक था स्पेस एक्स्प्लोरेशनः द एप्रोच एंड विजन इन अमृत काल. यह कार्यक्रम विक्रम साराभाई मेमोरियल लेक्चर का 32वां हिस्सा था.
सोमनाथ ने बताया कि सबसे पहले हमें ह्यूमन रेटेड रॉकेट्स बनाने होंगे. जिनका इस्तेमाल फिलहाल Gaganyaan प्रोजेक्ट में किया जा रहा है. इन्हें LVM3 रॉकेट बुलाया जा रहा है. बाद में इन्हें अपग्रेड करके सेमी-क्रायो इंजन से चलाएंगे. (फोटोः गेटी)
इसके बाद गगनयान के फॉलो-ऑन मिशन पूरे किए जाएंगे. रोबोट्स को चांद के ऑर्बिट की यात्रा कराई जाएगी. इसके बाद इंसानों को चांद के ऑर्बिट में भेजा जाएगा. सिर्फ इतना ही नहीं इसी दौरान इसरो अपना स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्थापित करेगा. (फोटोः गेटी)
इस बीच चंद्रयान के अगले मिशन पूरे होते रहेंगे. अगला मिशन डॉकिंग और रोबेटिक्स का प्रदर्शन करेगा. साथ ही वहां से सैंपल लेकर वापस भारत आएगा. यह लंबे समय का मिशन होगा. इसके बाद शुरू करेंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा पर पहुंचाने का मिशन. (फोटोः एएफपी)
साल 2035 तक भारत अपना स्पेस स्टेशन बना लेगा, जो धरती के चारों तरफ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की तरह चक्कर लगाता रहेगा. इसके बाद 2040 तक इसरो अपने एस्ट्रोनॉट्स को चांद पर भेजेगा. पूरी कोशिश रहेगी कि इस मिशन में रॉकेट, लैंडर, रोवर से लेकर सारी तकनीकें स्वदेशी हों. (फोटोः गेटी)
ISRO का प्लान ये है कि वह 2025 में Gaganyaan मिशन के तहत अपने एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में भेजेगा. यानी पहली बार भारतीय एस्ट्रोनॉट्स गगनयान में बैठकर पृथ्वी के चारों तरफ लोअर अर्थ ऑर्बिट में चक्कर लगाएंगे. इसके बाद स्पेस स्टेशन की तैयारी शुरू की जाएगी. (फोटोः गेटी)
2030 के दशक के मध्य में भारत 20 टन का स्पेस स्टेशन धरती से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात करेगा. इस स्पेस स्टेशन पर भारतीय एस्ट्रोनॉट्स 15-20 दिन के लिए रह पाएंगे. बाद में इस स्पेस स्टेशन को और बड़ा किया जाएगा. ताकि एस्ट्रोनॉट्स ज्यादा दिनों के लिए रह सकें. (फोटोः गेटी)
इसरो की बढ़ती स्पेस ताकत को देखते हुए अमेरिका की नासा समेत कई स्पेस एजेंसियां भारत की मदद के लिए आगे आ रही हैं. कुछ दिनों पहले ही भारत ने अमेरिका के साथ आर्टेमिस एकॉर्ड पर हस्ताक्षर किया था. (फोटोः गेटी)
नासा एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा है कि वो अगले साल भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन भेजने के लिए तैयार हैं. इसके लिए भी नासा और इसरो में समझौता हो रहा है. (फोटोः गेटी)