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Invisible Black Hole: 6 साल की मेहनत के बाद पहली बार दिखाई पड़ा अदृश्य ब्लैक होल

aajtak.in
  • नई दिल्ली/न्यूयॉर्क,
  • 15 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST
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अदृश्य ब्लैक होल (Invisible Black Hole) यानी ऐसे ब्लैक होल जो दिखाई न दे. उनमें किसी तरह की रोशनी न हो. ऐसे ब्लैक होल्स को खोजना बेहद मुश्किल होता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलिस्कोप (Hubble Space Telescope) की मदद से ऐसे ब्लैक होल को खोज लिया है. जिसके बारे में स्टडी रिपोर्ट को एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित होने के लिए ऑनलाइन सबमिट किया गया है. इसका पीयर रिव्यू होना बाकी है. (फोटोः NASA’s Goddard Space Flight Center; ESA/Gaia/DPAC)

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ब्लैक होल्स (Black Holes) आमतौर पर किसी बड़े तारे के मरने और उसके केंद्र के खत्म होने के बाद बची हुई ऊर्जा और अवशेषों की वजह से बनते हैं. ये बेहद घने, ताकतवर गुरुत्वाकर्षण शक्ति वाले होते हैं कि इनसे प्रकाश (Light) भी नहीं गुजर सकती. अंतरिक्ष विज्ञानी लगातार ऐसे ब्लैक होल्स की स्टडी करते रहते है. क्योंकि इनके बारे में ज्यादा किसी को पता नहीं है. 2019 में खोजे गए ब्लैक होल की पहली तस्वीर ये है. (फोटोः Event Horizon Telescope Collaboration)

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ब्लैक होल्स की स्टडी से पता चलता है कि वह कितने बड़े तारे के मरने के बाद बना होगा. उस तारे का वजन और आकार कितना रहा होगा. तारे का अंत कैसा हुआ होगा. कायदे से वैज्ञानिक परिभाषा के अनुसार यह माना जाता है कि ब्लैक होल्स आमतौर पर अदृश्य ही होते हैं. लेकिन उन्हें उनकी रोशनी खींचने की ताकत की वजह से पहचाना जा सकता है. इसी आधार पर उन्हें नाम भी दिया जाता है. (फोटोः गेटी)

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ब्लैक होल्स को पहचानने का एक तरीका होता है उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (Gravity) की जांच करना. इस तरीके से ही सैकड़ों छोटे ब्लैक होल्स को खोजा जा सका है, जो इसी शक्ति की वजह से अन्य तारों से संचार स्थापित करते हैं. इन्हें पहचानने के दो तरीके प्रसिद्ध हैं. पहला है एक्स-रे बाइनरी स्टार्स (X-ray binary stars). इसमें तारा और ब्लैक होल की कक्षा (Black hole's orbit) का केंद्र एक्स-रे निकालता है. ब्लैक होल तारे से अलग-अलग चीजें खींचता रहता है. जो घर्षण की वजह से गर्म होता चला जाता है. यही चीजें ब्लैक होल के चारों तरफ घूमती हैं. यहीं से एक्स-रे किरणों का निर्माण होता है. जिससे ब्लैक होल दिखने लगते हैं.  (फोटोः गेटी)

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कुछ ब्लैक होल्स दुष्ट यानी बदमाश होते हैं. ये अंतरिक्ष में यात्रा करते रहते हैं. वह बिना किसी से संचार स्थापित किए बगैर. इन्हें पकड़ पाना बेहद मुश्किल होता है. यह एक बड़ी समस्या है कि आप किसी भागते हुए ब्लैक होल को देख सकें. इनके बारे में कुछ भी पता करना बेहद मुश्किल होता है. बस ये पता चलता है कि अंतरिक्ष में इस जगह पर एक ब्लैक होल था, जो अब नहीं है. अदृश्य हो गया. कहां गया, कैसे बना था, किससे बना था यह सब पता नहीं चल पाता. (फोटोः गेटी)

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ऐसे अदृश्य ब्लैक होल (Invisible Black Hole) को पकड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने दो तरह से ऑब्जरवेशन किया. वह भी कई सालों तक. जिससे यह नया ब्लैक होल मिला है. आइंस्टीन की जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी (General Theory of Relativity) के मुताबिक बड़े वस्तु इसके पास या अंदर से गुजरने वाली रोशनी को मोड़ सकते हैं. यानी अगर कोई रोशनी किसी अदृश्य ब्लैक होल के बगल से गुजरती है, तो वह मुड़ जाती है. जैसे किसी कांच के लेंस से रोशनी मुड़ती है. इसे ग्रैविटेशनल लेंसिंग (Gravitational Lensing) कहते हैं. इसी तरीके से वैज्ञानिक अदृश्य ब्लैक होल्स को खोजते हैं.  (फोटोः गेटी)

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लेकिन इस नए अदृश्य ब्लैक होल (Invisible Black Hole) को खोजने के लिए दो तरह के ग्रैविटेशनल लेंसिंग की मदद ली. पहला तो ये दूसरे तारे से आ रही रोशनी अंतरिक्ष में इसके करीब आते ही बढ़ जा रही थी. ज्यादा चमकदार हो रही थी. घूम रही थी और उसके बाद सामान्य हो जा रही थी. लेकिन वहां सामने की तरफ कुछ नहीं दिख रहा था. तब पता चला कि यहां पर एक अदृश्य ब्लैक होल (Invisible Black Hole) है. दिक्कत ये थी कि ये किसी धुंधले तारे (Faint Star) के खत्म होने के बाद बना था.  (फोटोः गेटी)

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धुंधले तारे का नाम आते ही दूसरे तरीके की जांच शुरु होती है. यानी डायरेक्ट विजन मतलब सीधी नजर रखना. यहां पर हबल स्पेस टेलिस्कोप का काम शुरु हुआ. जिसने इस ब्लैक होल की दिशा में छह साल तक नजर गड़ाए रखी. तस्वीरें लेता रहा ताकि यह पता चल सके कि यह ब्लैक होल कितनी बार दिखता है, कितनी बार गायब होता है. इसके बाद यह पता किया गया कि वह वस्तु कितना बड़ा है और उसकी रोशनी के मुड़ने वाली जगह से दूरी कितनी है. पता चला कि यह अदृश्य ब्लैक होल (Invisible Black Hole) हमारे सूरज के वजन से सात गुना भारी है. यह सूरज से 5000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर है. यह दूरी गणना में बहुत ज्यादा लगती है, लेकिन अंतरिक्ष में यह दूरी ज्यादा नहीं है.  (फोटोः गेटी)

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मतलब ये है कि जिस तारे की वजह से ये अदृश्य ब्लैक होल (Invisible Black Hole) बना वह अगर हमारे सौर मंडल के इतने नजदीक था तो उसे दिखना चाहिए था. क्योंकि वह सूरज से बड़ा भी था. लेकिन दिखा नहीं, इसका मतलब वह धुंधला तारा था. वैज्ञानिकों ने कहा कि अब वे इसके बाद Gaia Survey, Vera Rubin Observatory और Nancy Grace Roman Space Telescope की मदद से इस ब्लैक होल के बारे में और अध्ययन करेंगे.  (फोटोः गेटी)
 

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