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इटली में Snow Cannon से स्की रिजॉर्ट में 45 करोड़ की बर्फ जमाई, ग्लोबल वॉर्मिंग ने पिघला दिया ड्रीम प्रोजेक्ट

aajtak.in
  • रोम,
  • 04 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 1:17 PM IST
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इटली अपने स्की रिजॉर्ट्स के लिए प्रसिद्ध रहा है. दुनियाभर के लोग बर्फ पर फिसलने के लिए यहां के स्की रिजॉर्ट्स में जाते रहे हैं. लेकिन इस बार सबसे फेमस स्की रिजॉर्ट मॉन्टे सिमोन (Monte Cimone) में स्की के लिए जरूरी बर्फ नहीं जमी. नकली बर्फ जमाने के लिए Snow Cannon यानी बर्फ जमाने वाली तोप लगाई गई. वो भी एक नहीं कई सारी. (सभी फोटोः रॉयटर्स/गेटी)

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स्नो कैनन ने पहाड़ के ढाल पर बर्फ जमाई भी लेकिन सूखे और जंगल की आग से जूझ इटली का तापमान इस समय काफी ज्यादा है. बर्फ जमाने में लगाए गए 44.77 करोड़ रुपये बढ़ते हुए तापमान की वजह से बर्बाद हो गए. इटली की स्की इंडस्ट्री ग्लोबल वॉर्मिंग से जूझ रही है. लेकिन उनके द्वारा लगाए गए सारे पैसे बर्बाद हो गए. 

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स्नो कैनन बेकार साबित हुए क्योंकि ये तोप हवा में जो पानी की बूंदें फेंकते हैं, उन्हें बर्फ में बदलने के लिए ठंडा तापमान चाहिए. ताकि वह स्नो की तरह जमीन पर गिर सकें. इसके लिए तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के नीचे होना चाहिए. लेकिन पारा ऊपर था. बर्फ जमी लेकिन टिकी नहीं. यानी स्की रिजॉर्ट के बिजनेस को तगड़ा झटका. 

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स्की टूरिज्म ऑपरेटर्स के स्थानीय प्रमुख लुसियानो मगनानी ने कहा कि स्की लिफ्ट बंद है. स्की इंस्ट्रक्टर और कर्मचारियों के पास कोई काम नहीं हैं. हमने ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से 40 फीसदी का नुकसान बर्दाश्त किया है. 40 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ था कि जब इटली के ज्यादातर स्की रिजॉर्ट बंद थे. क्योंकि पर्याप्त बर्फ थी ही नहीं. 

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इटली के स्की रिजॉर्ट्स दुनिया के अन्य स्की रिजॉर्ट्स की तुलना में कम ऊंचाई पर हैं. वहां पर आर्टिफिशियल तरीके से ही बर्फ जमाकर स्कीईंग का मजा लिया जाता था. लेकिन इस बार आर्टिफिशियल बर्फ भी नहीं जमी. इटली के स्की रिजॉर्ट्स 90 फीसदी, ऑस्ट्रिया के 70 फीसदी, स्विट्जरलैंड के 50 फीसदी और फ्रांस के 39 फीसदी आर्टिफिशियल बर्फ का इस्तेमाल होता है. 

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लेकिन जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से स्की इंड्स्ट्री और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है. यूरोप लगातार बढ़ते तापमान से जूझ रहा है. इटली अब नदियों या अन्य जलस्रोतों से पानी लेकर बर्फ नहीं बना सकता है. क्योंकि कई यूरोपीय देश सूखे की वजह से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं. 

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यूरोप में बर्फ जमाने के लिए जितनी बिजली इस्तेमाल होती है. उतने में चार सदस्यों वाले 1.30 लाख परिवारों को बिजली सप्लाई पूरे साल की जा सकती है. लेकिन बिजली खपत करके स्नो कैनन चलाए गए. 45 करोड़ रुपये लगे. लेकिन बढ़ते तापमान ने स्की इंडस्ट्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को पिघला दिया. 

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इटली एसोसिएशन ऑफ स्की-लिफ्ट ऑपरेटर्स के प्रमुख वैलेरिया घेजी ने कहा कि अगर बर्फ नहीं होगी तो स्की नहीं होगा. इसकी वजह से स्की रिजॉर्ट के जरिए कमाने वाले लोगों को हालत खराब हो जाएगी. कम से कम 300 कंपनियां बैठ जाएंगी. मार्केट का 90 फीसदी नुकसान हो जाएगा. स्की रिजॉर्ट्स इंडस्ट्री में 4 लाख लोग जुड़े हैं. 

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