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साइंस न्यूज़

बृहस्पति ग्रह की रहस्यमयी चमक का राज खुला, ब्रह्मांड की सबसे ताकतवर घटनाओं में एक

aajtak.in
  • लंदन,
  • 12 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST
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बृहस्पति ग्रह पर लगातार दिख रहे रहस्यमयी एक्स-रे चमक ने कई सालों तक वैज्ञानिकों को हैरानी में रखा है. अब जाकर इस रहस्यमयी नीली-बैंगनी रंग की चमक का खुलासा हुआ है. वैज्ञानिकों ने काफी जांच पड़ताल करने के बाद ये पता लगाया कि ये बृहस्पति ग्रह के अरोरा यानी नॉर्दन लाइट्स का हिस्सा हैं. अब ये रहस्यमयी एक्स-रे चमक वैज्ञानिकों को धोखा नहीं दे पाएंगी. क्योंकि अब इनकी उत्पत्ति और उनके काम का पता चल गया है. (फोटोःNASA)

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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के साइंटिस्ट विलियम डुन ने कहा कि पिछले 40 सालों में बृहस्पति ग्रह (Jupiter) के इन रहस्यमयी एक्स-रे चमक (Mysterious X-Ray Flares) का खुलासा कोई नहीं कर पाया. इसे हमने ही खोजा था, आखिरकार हमारी टीम ने ही इसके रहस्य से पर्दा हटाया. इसके लिए हमने यूरोपियन स्पेस एजेंसी के XMM-Newton Space Telescope की मदद ली. (फोटोःगेटी)

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विलियम ने कहा कि इसके अलावा हमने नासा (NASA) के जूनो ऑर्बिटर स्पेसक्राफ्ट की मदद से बृहस्पति ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के डेटा का अध्ययन किया. दोनों यंत्रों के उपयोग से किए गए अध्ययन से पता चला कि ग्रह के उत्तरी ध्रुव पर हर 27 मिनट के बाद क्लॉकवाइज ये एक्स-रे चमक बनती है. इसी समय बृहस्पति ग्रह में चुंबकीय कंपन पैदा होती है. जिससे ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड में बदलाव आता है. (फोटोःगेटी)

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विलियम डुन ने कहा कि ये एक्स-रे चमक बृहस्पति ग्रह की मैग्नेटिक फील्ड के साथ वैसे ही आती-जाती है, जैसे किसी संगीतमय यंत्र से तार छेड़ने पर निकलने वाली आवाज, जैसे गिटार. इसमें गिटार के तार कंपन करते हैं तो आवाज निकलती है. ठीक इसी तरह बृहस्पति ग्रह में मैग्नेटिक फील्ड में जब कंपन होती है, जब ये एक्स-रे चमक दिखाई पड़ते हैं. जो उत्तरी ध्रुव पर अरोरा (Aurora) बनाते हैं. (फोटोःगेटी)

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विलियम कहते हैं कि इसे समझना इसलिए जरूरी था क्योंकि ब्रह्मांड में कई स्थानों, तारों और ग्रहों पर ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं. ये काफी ताकतवर प्रक्रिया है. उसमें काफी ज्यादा ऊर्जा लगती है. अगर इस ऊर्जा के प्रवाह को समझा जाए तो हम सौर मंडल के कई रहस्यों का उद्घाटन कर सकते हैं. (फोटोःगेटी)

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विलियम डुन ने बताया कि एक्स-रे की स्टडी करना अपने आप में ही हैरान करने वाला होता है. ये सुपर एनर्जी से भरे हुए होते हैं. ये ठीक ब्लैक होल, न्यूट्रॉन स्टार, या दो आकाशगंगाओं के बीच चलने वाली गैस की तरह ताकतवर भी होते हैं. ये सारी चीजें इंसानी सोच से बहुत आगे की चीज है, जो कि प्रकृति में लगातार हो रही हैं. (फोटोःगेटी)

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बृहस्पति ग्रह पर हो रही इस खूबसूरत, उच्च उर्जा से भरपूर और ताकतवर प्राकृतिक घटना को और समझने के लिए हमें इसके और करीब जाना होगा. यानी किसी यान को इसके बेहद नजदीक भेजना होगा, ताकि इसका डिटेल में अध्ययन किया जा सके. बृहस्पति ग्रह अपने-आप में एक अबूझ पहेली है. जिसे लगातार सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है. (फोटोःगेटी)

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पिछली साल बृहस्पति ग्रह पर एक साथ कई तूफान आए थे. इनमें से कुछ तो इतने बड़े थे कि ये हमारी धरती को पूरा समा लें. 25 अगस्त 2020 को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने बृहस्पति ग्रह की तस्वीर ली थी. इसमें ये तूफान दिखाई दे रहे हैं. सफेद, नारंगी, लाल, नीली और भूरे रंग की लहरें बन रही थीं. (फोटोःगेटी)

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हबल टेलिस्कोप (Hubble Telescope) द्वारा ली गई बृहस्पति ग्रह (Jupiter) की इन तस्वीरों में कई सारी लहरें दिखाई दे रही हैं. इन लहरों को ही बृहस्पति ग्रह का तूफान कहा जाता है. बृहस्पति ग्रह पर इस समय आए हुए तूफानों की गति 560 किलोमीटर प्रतिघंटा है. आपको बतां दे हर छह साल पर बृहस्पति ग्रह पर ऐसे कई तूफान एकसाथ आते हैं. आमतौर पर छोटे-मोटे इक्का-दुक्का तूफान ही आते हैं. इनकी गति कम ज्यादा हो सकती है. (फोटोःगेटी)

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ये तूफान बीच में गोलाकार आकृति बना लेते हैं. इनके आगे-पीछे लहरों की एक लंबी पूंछ होती है. जब इन तूफानों में अंतर देखने के लिए हबल टेलिस्कोप ने अल्ट्रावॉयलेट, विजिबल और नीयर इंफ्रारेड लाइट कैमरे से अलग-अलग तस्वीरें लीं. जब इन तस्वीरों को जोड़ा गया तो सामने आई फोटो में एकसाथ कई भयावह तूफान देखने को मिले थे. (फोटोःगेटी)

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