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नीचे से गायब हो जाएगी जमीन... 16 साल में मुंबई का इतना हिस्सा निगल लेगा समंदर

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST
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जिस हिसाब से तापमान बढ़ रहा है. जलवायु बदल रहा है. ग्लेशियर पिघल रहे हैं. उसकी वजह से समंदर का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. बढ़ेगा भी. इसका नतीजा ये होगा कि साल 2040 तक मुंबई का 13.1 फीसदी इलाका यानी जमीन समंदर के आगोश में होगा. यह खुलासा किया है बेंगलुरु स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (CSTEP). (फोटोः पीटीआई)

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चेतावनी दी गई है कि यदि उत्सर्जन पर रोक नहीं लगी तो बढ़ते समुद्री जलस्तर से मुंबई में करीब 830 वर्ग km इलाका डूब जाएगा. साल 2100 तक 1,377.13 वर्ग km (21.8%) डूब जाएगा. ऐसी ही हालत अन्य तटीय शहरों की भी होगी. चेन्नई का 86.8 वर्ग km (7.3%) डूब जाएगा. सदी के अंत तक यह बढ़कर 215.77 वर्ग km (18%) हो जाएगा. यनम और थूथुकुड़ी में करीब 20 फीसदी हिस्सा डूब जाएगा. (फोटोः एपी)

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समुद्र का बढ़ता जलस्तर कोच्चि, मैंगलोर, विशाखापत्तनम, हल्दिया, उडुपी, पारादीप और पुरी में 1 से 5 फीसदी जमीन निगल लेगा. अगर कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है तो मुंबई-चेन्नई की तुलना में बाकी इलाके जल्दी डूब जाएंगे. CSTEP ने देश के 15 तटीय शहरों और कस्बों में समुद्र के बढ़ते जलस्तर का आंकलन किया है. (फोटोः मंदार देवधर/इंडिया टुडे)

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इनमें विशाखापट्टनम, पणजी, मंगलौर, उडुपी, कोचीन, कोझिकोड, तिरुवनंतपुरम, मुंबई, पाराद्वीप, पुरी, यनम, चेन्नई, कन्याकुमारी, तूतीकोरिन और हल्दिया भी हैं. 1987 से 2021 के बीच मुंबई में समुद्री जलस्तर में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई. करीब 4.44 सेंटीमीटर. (फोटोः एपी)

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हल्दिया में 2.726 सेंटीमीटर, विशाखापट्टनम में 2.381 सेंटीमीटर, कोच्चि में 2.213 सेंटीमीटर, पारादीप में 0.717 सेंटीमीटर और चेन्नई के जलस्तर में 0.679 सेंटीमीटर का इजाफा हुआ. आशंका है कि सदी अंत तक इन सभी शहरों में समुद्र के जलस्तर में इजाफा होता रहेगा. सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई होगा.  (फोटोः एपी)

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अगर ज्यादा उत्सर्जन हुआ तो मुंबई का समुद्री जलस्तर 101.4 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा. जो मुंबई के 22% हिस्से को निगल लेगा. चेन्नई में जलस्तर 94.7 सेंटीमीटर तक बढ़ जाएगा. यानी वहां के 18.2% (216 वर्ग km) से ज्यादा इलाका पानी में होगा. हल्दिया में समुद्र का जलस्तर 90.9 सेंटीमीटर तक बढ़ेगा. इससे जो 27.86 वर्ग km क्षेत्र डूब जाएगा. (फोटोः एपी)

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कोच्चि में समुद्र के जलस्तर में सदी के अंत तक 100 सेंटीमीटर बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं कोझिकोड में 99.9 सेंटीमीटर, मैंगलोर में 100.1 सेंटीमीटर, तिरुवनंतपुरम में 99.4 और विशाखापटनम में 91.3 सेंटीमीटर. इसका असर जलापूर्ति, कृषि, वन और जैव विविधता के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ेगा. (फोटोः गेटी)

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इससे बैकवॉटर और मैंग्रूव पर भी खतरनाक असर होगा. जिसका असर पर्यटन पर होगा. हल्दिया, उडुपी, पणजी और यनम में कृषि क्षेत्र, वेटलैंड्स और जलस्रोत बढ़ते समुद्री जलस्तर के शिकार बनेंगे. पूरी दुनिया में जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, उससे समुद्री जलस्तर भी बढ़ रहा है. यह दिक्कत बड़ी होती जा रही है. (फोटोः पीटीआई)

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पहाड़ों पर जमा बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने से भी समंदर में पानी का लेवल बढ़ रहा है. आईपीसीसी ने भी आशंका जताई थी कि सदी के अंत तक उच्च उत्सर्जन परिदृश्य में वैश्विक स्तर पर समुद्र का जलस्तर 1.6 मीटर तक बढ़ सकता है. कहीं न कहीं समुद्र का बढ़ता जलस्तर ऐसी सच्चाई है, जिसे झुठला नहीं सकते. (फोटोः गेटी)  

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