अर्टेमिस 1 (Artemis 1) अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का मार्स पर्सिवरेंस रोवर के बाद बेहद महत्वपूर्ण मिशन है. इसे 29 अगस्त 2022 की शाम साढ़े छह से साढ़े 8 के बीच लॉन्च करना था. लेकिन ईंधन लीक की वजह से टाल दिया गया. आइए जानते हैं कि आखिर ये मिशन है क्या? नासा स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) को चांद के चारों तरफ चक्कर लगाकर वापस आने के लिए भेज रहा है. आइए जानते हैं सिर्फ 8 प्वाइंट्स में इस मिशन की सभी बड़ी बातें.... (फोटोः AP)
1. अर्टेमिस 1 मिशन का ओवरव्यू (Overview of Artemis 1 Mission)
कहां से लॉन्च होगा यानी लॉन्च साइट (Launch Site): फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर का लॉन्च पैड 39बी.
मिशन का समय (Mission Duration): 42 दिन, 3 घंटे और 20 मिनट.
गंतव्य (Destination): चंद्रमा के बाहर की रेट्रोग्रेड कक्षा.
कितने किलोमीटर की यात्रा (Total Mission Distance): 21 लाख किलोमीटर
कहां पर वापस लौटेगा स्पेसशिप (Splashdown Site): सैन डिएगो के आसपास प्रशांत महासागर में
लौटते समय स्पेसशिप की गति (Return Speed): 40 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा
2. बिना स्पेस स्टेशन की मदद के ही जाकर लौटेगा ओरियन अंतरिक्षयान
इस उड़ान के दौरान ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship), जो कि दुनिया के सबसे ताकतवर और बड़े रॉकेट के सबसे ऊपरी हिस्से में होगा. वह इंसानों की अंतरिक्ष उड़ान के लिए बनाया गया है. यह वह दूरी तय कर सकता है, जो आज तक किसी स्पेसशिप ने नहीं की है. यह मिशन के दौरान धरती से चंद्रमा तक पहले 4.50 लाख किलोमीटर की यात्रा करेगा. उसके बाद चंद्रमा के फार साइड यानी अंधेरे वाले हिस्से की तरफ 64 हजार किलोमीटर दूर जाएगा. ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) बिना इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर जुड़े ही इतनी लंबी यात्रा करने वाला पहला अंतरिक्षयान होगा. वहां से सकुशल वापस भी आएगा. (फोटोः NASA)
3. पहले अर्टेमिस मिशन का क्या मकसद है?
अर्टेमिस 1 (Artemis 1) मिशन के दौरान ओरियन स्पेसक्राफ्ट और SLS रॉकेट चंद्रमा तक जाकर और धरती पर वापस आकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे. यह मिशन भविष्य में होने वाले चंद्र मिशनों के लिए एक लिटमस टेस्ट है. अगर यह मिशन सफल होता है तो साल 2025 तक अर्टेमिस मिशन के तरह पहली बार चंद्रमा पर किसी महिला और किसी ब्लैक एस्ट्रोनॉट को भेजा जाएगा. अर्टेमिस 1 मिशन की सफलता के बाद ही नासा के वैज्ञानिक चंद्रमा तक जाने के लिए जरूरी अन्य तकनीकों को विकसित करेंगे. उनकी जांच करेंगे. ताकि चंद्रमा से आगे मंगल तक की यात्रा भी की जा सके. इसके लिए नासा निजी स्पेस एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करेगी. (फोटोः एपी)
4. लॉन्च में ऐसा क्या खास है, जो पूरी दुनिया नजर गड़ाकर बैठी है?
नासा के केनेडी स्पेस स्टेशन पर SLS रॉकेट और ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) को लॉन्च पैड 39बी से छोड़ा जाएगा. यह लॉन्च पैड अत्याधुनिक है. इस रॉकेट को पांच सेगमेंट वाले बूस्टर्स से लॉन्च किया जाएगा. जिनमें से चार में RS-25 इंजन लगे हैं. ये इंजन बेहद आधुनिक और ताकतवर हैं. ये 90 सेकेंड में वायुमंडल के ऊपर पहुंच जाएंगे. सोचिए कितनी ताकत होगी इनके अंदर. इसके सॉलिड बूस्टर्स दो मिनट से पहले ही अलग हो जाएंगे. इसके बाद RS-25 इंजन करीब 8 मिनट बाद अलग होगा. फिर सर्विस मॉड्यूल और स्पेसशिप को उसके बूस्टर्स अंतरिक्ष में आगे की यात्रा के लिए एक जरूरी गति देकर छोड़ देंगे. ये गति देने वाले बूस्टर्स असल में क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज (ICPS) हैं. (फोटोः एपी)
5. अंतरिक्ष में क्या होगा यानी धरती से बाहर और चंद्रमा तक?
ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) अपने सर्विस मॉड्यूल के साथ क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज (ICPS) से लॉन्च के दो घंटे बाद अलग हो जाएगा. इसके बाद ICPS दस छोटे सैटेलाइट्स यानी क्यूबसैट्स (CubeSats) को अंतरिक्ष में तैनात करेगा. ये सैटेलाइट्स इस मिशन के दौरान ओरियन की यात्रा और सुदूर अंतरिक्ष की गतिविधियों पर नजर रखेंगे. इस दौरान ओरियन अंतरिक्षयान धरती से चंद्रमा की ओर अपनी यात्र जारी रखेगा. सर्विस मॉड्यूल को यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने बनाया है. यह मॉड्यूल ही ओरियन का मुख्य प्रोपल्शन सिस्टम है. उसे ताकत देता है. (फोटोः NASA)
6. ओरियन चंद्रमा से कितनी दूर और कितने पास लगाएगा चक्कर?
ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) चंद्रमा के सबसे नजदीक 97 किलोमीटर की दूरी पर रहेगा. सबसे दूर की यात्रा 64 हजार किलोमीटर होगी. यानी चंद्रमा पर इसकी कक्षा अंडाकार होगी. अपोलो-13 (Apollo-13) मिशन ने चंद्रमा की सतह से सबसे अधिक 48 हजार किलोमीटर की यात्रा की थी. लेकिन ओरियन उसके भी आगे जा रहा है. यह पहली बार होगा जब इंसानों के लिए बनाया गया कोई अंतरिक्षयान अंतरिक्ष में इतनी दूर जाएगा. अंतरिक्ष से धरती पर लौटने के लिए ओरियन चंद्रमा की ग्रैविटी का लाभ उठाएगा. वह चंद्रमा का दूसरा चक्कर लगाने के बाद अपने इंजन को ऑन करेगा और चंद्रमा की ग्रैविटी से बाहर निकलेगा. ताकि धरती की सही समय और जगह से लौट सके. (फोटोः NASA)
7. कैसे होगी ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) की लैंडिंग?
मिशन का अंत ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) के धरती पर लौटने के बाद होगा. ओरियन धरती के वायुमंडल में पहुंचने से पहले करीब 40 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से लौट रहा होगा. लेकिन वायुमंडल में यह 480 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आएगा. उस समय इसे करीब 2800 डिग्री सेल्सियस का तापमान बर्दाश्त करना होगा. ऐसा वायुमंडल में आते ही घर्षण की वजह से होगा. यहां पर उसके हीटशील्ड के परफॉर्मेंस की जांच की जाएगी. समुद्र के पास आने से 25 हजार फीट ऊपर स्पेसक्राफ्ट के दो पैराशूट खुलेंगे. जो इसकी गति को कम करके 160 किलोमीटर प्रतिघंटा कर देंगे. इसके थोड़ी देर बाद इसके मुख्य तीन पैराशूट खुल जाएंगे जो इसकी रफ्तार कम करके 32 किलोमीटर प्रतिघंटा कर देंगे. तब यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में लैंड करेगा. (फोटोः NASA)
8. लैंडिंग के बाद की रिकवरी (Recovery of Orion)
NASA के एक्सप्लोरेशन ग्राउंड सिस्टम की लैंडिंग और रिकवरी टीम प्रशांत महासागर में पहले से तैनात रहेगी. वह ओरियन स्पेसशिप (Orion Spaceship) की लैंडिंग के बाद उसे उठाकर नौसेना के एंफिबियस पोत पर रखेगी. नौसेना के गोताखोर और अन्य इंजीनियर स्पेसक्राफ्ट को बांधकर पोत पर रखेंगे. उसे वापस लेकर केनेडी तक जाएंगे. फिर स्पेसशिप की कायदे से जांच-पड़ताल की जाएगी. (फोटोः NASA)