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चांद पर जब पहली बार इंसान ने रखा था कदम, देखें दुर्लभ तस्वीरें

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 2:57 PM IST
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चंद्रयान-3 पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया की निगाहें हैं. इस मौके पर चांद पर इंसान का पहला कदम याद आ रहा है. अमेरिका का अपोलो मिशन और नील आर्मस्ट्रांग की चांद पर चहलकदमी. आइये आपको दिखाते हैं वो दुर्लभ तस्वीरें.

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चांद की सतह पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग की आवाज आज हर किसी के कानों में गूंज रही है. उस समय नील आर्मस्ट्रांग ने कहा था- "ईगल लैंड कर चुका है, इंसान के लिए छोटा सा कदम लेकिन मानवजाति के लिए लंबी छलांग" (ईगल लूनर मॉड्यूल का नाम था).

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चंद्रयान-तीन के लैंडर विक्रम आज, 23 अगस्त 2023 को चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. ऐसे में अमेरिका के उस अपोलो मिशन की यादें ताजा हो गई हैं जब इंसान ने चांद पर पहला कदम रखा था.

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वो 20 जुलाई, 1969 की तारीख थी, जब ओपोलो-11 मिशन ने अंतरिक्ष विज्ञान में कामयाबी का नया इतिहास रचा था. अपोलो -11 के अंतरिक्ष यात्री नील आर्म स्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रखा. 

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आर्मस्ट्रांग के 19 मिनट बाद एडवर्ड बज एलड्रिन चांद पर कदम रखने वाले दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने. दोनों ने चांद पर करीब दो घंटे बिताए. परीक्षण के लिए दोनों ने चांद से करीब साढ़े इक्कीस किलो चीजें उठाई.

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अपोलो-11 के बाद कुछ रोबोटिंग और इंसानी मिशन कामयाब रहे लेकिन अमेरिका के अपोलो मिशन में दूसरी सबसे बड़ी कामयाबी सात दिसंबर 1972 को मिली. जब हैरिशन श्मिट अपोलो-17 मिशन के साथ चांद पर पहुंचे.

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हैरिशन चांद पर कदम रखने वाले पहले पेशेवर वैज्ञानिक थे. सैन्य विमानन में पृष्ठभूमि के बिना चांद पर चहलकदमी करने वाले वो एकमात्र व्यक्ति हैं. अपोलो मिशनों में अपोलो-17 आखिरी था. हैरिसन चंद्रमा पर कदम रखने वाले बारहवें और दूसरे सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने.

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बता दें कि अब चंद्रयान-3 की लैंडिंग कामयाब रही तो भारत पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा. साथ ही चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक में महारथ पाने वाला चौथा देश बन जाएगा. 

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इससे पहले अमेरिका, चीन और पूर्व संवियत संघ ही ये उपलब्धि हासिल कर सके हैं. चंद्रयान-3 की 40 दिनों की लंबी यात्रा अब निर्णायक और बेहद नाजुक पड़ाव पर है. 

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चंद्रयान के विक्रम लैंडर की ये सॉफ्ट लैडिंग चांद पर हिन्दुस्तान के मजबूत कदम की छाप छोड़ने वाली साबित होगी क्योंकि चांद के जिस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने में अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियां नाकाम रही हैं, वहां भारत सबसे पहले पहुंचने वाला देश होगा.

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