पाकिस्तान के मौसम विभाग ने आशंका जताई है कि इस बार फिर भयानक मॉनसूनी बारिश होगी. अगर ऐसा हुआ तो बड़े इलाके में बाढ़ तबाही मचाएगी. जैसा पिछले साल हुआ था. 10 लाख से ज्यादा घर बह गए थे. 90 लाख मवेशियों की जान गई थी. करीब 1700 लोग मारे गए थे. (फोटोः रॉयटर्स)
पिछली साल दक्षिण एशिया के कई देश भारी मॉनसूनी बारिश और पिघलते ग्लेशियरों की वजह से बाढ़ग्रस्त थे. पिछले साल पाकिस्तान का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया था. करीब 80 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. इस बार भी इस्लामाबाद, पेशावर, लाहौर, रावलिंडी और गुजरानवाला को ज्यादा खतरा है. (फोटोः एएफपी)
ये इलाके निचले हैं. अगर मॉनसूनी बादलों ने हिंदूकुश के हिमालयी इलाकों ने रोक दिया तो पाक अधिकृत कश्मीर, गिलगिट-बाल्टिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे ऊंचे इलाकों से पानी निचले इलाकों की तरफ आएगा. इसका नुकसान पाकिस्तान के निचले इलाकों को होगा. वो डूबेंगे. फिर से पिछले साल जैसा दुखी करने वाला नजारा दिख सकता है. (फोटोः एपी)
पाकिस्तान के उत्तर में ही काराकोरम रेंज है. इस रेंज समेत पूरे पाकिस्तान के ऊपरी इलाके में 7200 से ज्यादा ग्लेशियर्स हैं. बढ़ रहे तापमान से ग्लेशियर पिघल रहे हैं. ये मॉनसूनी बारिश में और ज्यादा खतरा बढ़ा रहे हैं. ग्लेशियर का पिघलता पानी मॉनसूनी बारिश की गति और मात्रा को बढ़ा देता है. जिससे फ्लैश फ्लड का खतरा रहता है. (फोटोः रॉयटर्स)
प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के मामले में पाकिस्तान दुनिया का आठवां सबसे रिस्की देश है. पाकिस्तान हर गर्मी के मौसम में मार्च से मई तक जलता-भुनता रहता है. इसके ठीक पीछे आती है मॉनसूनी तबाही. इससे पाकिस्तान की रीढ़ की हड्डी टूट जाती है. अरबों-खरबों का नुकसान हो जाता है. (फोटोः रॉयटर्स)
आमतौर पर पाकिस्तान में मॉनसून भारत की तुलना में कम समय के लिए होता है. पाकिस्तान में औसत बारिश 130 मिलिमीटर होती है. पिछले साल वहां पर 385 मिलिमीटर बारिश हुई. सिंध में 784 फीसदी, बलूचिस्तान में 522 फीसदी, गिलगिट-बाल्टिस्तान में 225 फीसदी, पंजाब में 62 फीसदी और खैबर पख्तूनख्वा में 54 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी. (फोटोः रॉयटर्स)
पिछली साल पाकिस्तान में लगातार आठ हफ्तों तक बिना रुके बारिश हुई थी. इससे पूरा देश पानी में डूब गया था. पिछले साल की बारिश 2010 की आपदा से भी बुरी थी. वैश्विक गर्मी से पाकिस्तान में सुपरफ्लड की स्थिति आ रही है. गर्म समुद्र और आर्कटिक का बढ़ता तापमान भी पाकिस्तान के मौसम पर बुरा असर डालता है. (फोटोः रॉयटर्स)