रूस अब अलग चाल चल रहा है. वह समुद्री जीवों को यूक्रेन की जासूसी करने के लिए ट्रेनिंग दे रहा है. रूस की नौसेना अपनी समुद्री मिलिट्री में डॉल्फिंस की भर्ती कर रहा है. डॉल्फिंस की ट्रेनिंग काला सागर में स्थित सेवास्तोपोल नेवल बेस पर हो रही है. ये खास तरह की बॉटलनोस डॉल्फिन हैं. (सभी फोटोः गेटी)
रूस अब अलग चाल चल रहा है. वह समुद्री जीवों को यूक्रेन की जासूसी करने के लिए ट्रेनिंग दे रहा है. रूस की नौसेना अपनी समुद्री मिलिट्री में डॉल्फिंस की भर्ती कर रहा है. डॉल्फिंस की ट्रेनिंग काला सागर में स्थित सेवास्तोपोल नेवल बेस पर हो रही है. ये खास तरह की बॉटलनोस डॉल्फिन हैं. (फोटोः यूके डिफेंस मिनिस्ट्री)
डॉल्फिंस इंसानों के साथ क्लोज कॉम्बैट तो नहीं करेंगी. लेकिन वो ये पता कर सकती हैं कि यूक्रेन के नौसैनिक कहां पर क्या गतिविधियां कर रहे हैं. अगर इन डॉल्फिंस को कवच और हथियार पहनाकर भेजा जाए तो ये हमला भी कर सकती हैं. हथियारों का नियंत्रण रिमोट से किया जा सकता है.
डॉल्फिंस अपने ऊपर कैमरा लगाकर दुश्मन के इलाके की तस्वीरें और वीडियो लेकर वापस आ सकती हैं. ये भी पता कर सकती हैं कि रूस पर हमला करने के लिए यूक्रेन ने समुद्र में कहां-कहां पनडुब्बियां तैनात कर रखी हैं. इन प्रशिक्षित डॉल्फिंस को ये पता होता है कि कैसे दुश्मन पर नजर रखी जाए.
पूरी दुनिया में कोई भी प्रशिक्षित इंसानी गोताखोर या तैराक डॉल्फिन को नहीं पिछाड़ नहीं सकता. ये दुनिया की सबसे बुद्धिमान, शानदार और तेज गोताखोर होती हैं. इसलिए इन डॉल्फिंस को ट्रेनिंग देकर इन्हें बिना किसी राडार में आए जासूसी कराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. ये काम डॉल्फिंस आसानी से कर भी देंगी.
बॉटलनोस डॉल्फिंस अधिकतम 29 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गोता लगाती हैं. जो कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ इंसानी तैराक से 10 किलोमीटर प्रतिघंटा ज्यादा है. ऐसी जानकारी आई है कि रूस इस समय सेवास्तोपोल नेवल बेस पर सात डॉल्फिंस को ट्रेनिंग दे रहा है. कुछ तो पूरी तरह से प्रशिक्षित भी हो चुकी हैं.
इन डॉल्फिंस को कई बार गहरे समुद्र में नाव से बंधे क्रैडल के जरिए ले जाया जाता है. ताकि ट्रेनिंग दी जा सके. इनकी सुरक्षा के लिए भी हथियारबंद बोट्स तैनात की गई हैं. सिर्फ डॉल्फिन ही नहीं इस नेवल बेस की सुरक्षा करती हैं. बल्कि यहां एंटी-टॉरपीडो नेट्स हैं. डेप्थ चार्ज सिस्टम हैं. रॉकेट लॉन्चर्स हैं.
दुश्मन गोताखोर अगर ये सब पार कर भी लेते हैं तो उन्हें डॉल्फिंस से संघर्ष करना होगा. सेवास्तोपोल नेवल बेस पर रूस ने 2014 में कब्जा किया था. ये बात क्रीमिया पर हमला करते समय की है. इसलिए यहां पर यूक्रेन का सीधा हमला होने की पूरी आशंका है. इसके पहले भी रूस समुद्री जीवों की भर्ती कर रहा था.
रूस ने जासूसी व्हेल मछलियां भी तैनात की थीं. ये व्हेल मछलियां अपने ऊपर यंत्रों को लेकर मॉनिटरिंग के लिए लंबी दूरी तक जाती थीं. ये इंसानों के प्रति ज्यादा प्यार दिखाती थीं. जो कि व्हेल मछलियों के व्यवहार से उलटा होता है. रूस ही नहीं अमेरिका भी डॉल्फिंस को ट्रेनिंग दे रहा है. यह प्रक्रिया 1960 से चल रही है.