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साइंस न्यूज़

शनि ग्रह पर 'महातूफान', इसे पार करने में लगेंगे 100 साल... आ रहा है रेडियो सिग्नल

aajtak.in
  • सैन फ्रांसिस्को,
  • 15 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 4:20 PM IST
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शनि ग्रह पर एक विशालकाय 'महातूफान' आया हुआ है. उसने पूरे शनि ग्रह को एक छल्ले के रूप में घेर रखा है. इतना बड़ा है कि उसे पार करने में 100 साल लग जाएंगे. ऐसे भयानक महातूफान शनि ग्रह पर आम बात है. लेकिन उससे रेडियो सिग्नल निकलना दुर्लभ घटना है. (सभी फोटोः नासा/गेटी)
 

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शनि ग्रह पर आने वाले तूफानों को ग्रेट व्हाइट स्पॉट्स (Great White Spots) कहते हैं. ये हर 20 या 30 साल में एक बार ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में बनते हैं. महीनों तक चलते रहते हैं. 1876 से लेकर अब तक खगोलविदों ने छह विशालकाय महातूफान शनि ग्रह पर देखें हैं. 

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सबसे आखिरी तूफान दिसंबर 2010 में देखा गया था. जब नासा के कैसिनी स्पेसक्राफ्ट ने ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए इसकी तस्वीर ली थी. इस तूफान की उम्र करीब 200 दिन थी. लेकिन जब स्टडी की तो पता चला कि 200 दिन चलने वाला तूफान बहुत बड़ा था. यह लंबे समय तक चलता रहा. 

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रेडियो टेलिस्कोप स्कैन किया गया. पता चला कि अब भी इस ग्रह पर वह तूफान बना हुआ है. कम से कम अगले 100 सालों तक यह शनि ग्रह के वायुमंडल पर दिखता रहेगा.  मुद्दा ये है कि ये तूफान अब रेडियो सिग्नल पैदा कर रहा है. समस्या ये है कि वैज्ञानिक इसकी वजह खोज नहीं पा रहे हैं. 

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तूफान की वजह से वायुमंडल में केमिकल बदलाव हो रहे हैं. असल में तूफान दिखना भले बंद हो जाए. लेकिन उसका असर कई सदियों तक रह सकता है. कम से कम शनि ग्रह के मामले तो ये सही है. 

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हाल ही में इस बारे में एक स्टडी साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित हुई है. जिसमें बताया गया है कि बृहस्पति की तुलना में शनि ग्रह का वायुमंडल धुंधला और बिना किसी फीचर का है. वहीं बृहस्पति ग्रह का वायुमंडल ज्यादा रंगीन और वाइब्रेंट है. 

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शनि ग्रह का ऊपरी वायुमंडल बेहद धुंधला है. जब न्यू मेक्सिको में लगे वेरी लार्ज एरे रेडियो टेलिस्कोप से शनि ग्रह की स्टडी की गई तो पिछले सभी छह महातूफानों के अवशेष मिले. सबसे पहला करीब 130 साल पहले आया था. लेकिन उसका असर अब भी शनि ग्रह के वायुमंडल पर देखने को मिलता है. 

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शनि ग्रह के वायुमंडल में ऊपरी बादल अमोनिया की बर्फ से बने हैं. लेकिन रेडियो जांच करने पर पता चला कि तूफानों वाले इलाके में अमोनिया की मात्रा ग्रह के बाकी हिस्सों से कम है. यानी तूफान खत्म होने के बाद या रहते समय वायुमंडल में अमोनिया की मात्रा कम हो जाती है. 

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शनि ग्रह के ग्रेट व्हाइट स्पॉट्स की तुलना में बृहस्पति ग्रह पर उससे भी बड़ा ग्रेड रेड स्पॉट है. जो लगातार बढ़ता जा रहा है. यह अब तक किसी ग्रह पर देखा गया सबसे बड़ा तूफान है. शनि ग्रह के तूफान लंबे चलते हैं, लेकिन आकार छोटा होता है. 

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