पैरासाइट भी आपके जीवन को लंबा बना सकता है! जी हां. लेकिन इस पर अभी रिसर्च हो रही है. क्योंकि वैज्ञानिकों को एक खास तरह का पैरासाइट मिला है, जो चीटियों के जीवन को तीन गुना लंबा कर दे रहा है. इस पैरासाइट ने टेमनोथोरेक्स नीलैंडरी (Temnothorax nylanderi) नाम की चीटी को संक्रमित कर उसका जीवन बढ़ा दिया. (सभी फोटोः पिक्साबे/पेक्सेल/फ्लिकर)
यह पैरासाइट एक तरह का टेपवर्म है. जिसका नाम एनोमोटेनिया ब्रेविस (Anomotaenia brevis) है. यह पैरासाइट चीटियों को संक्रमित करता है. लेकिन इस संक्रमण के साथ ही चीटी की उम्र बाकी साथी चीटियों से तीन गुना बढ़ जाती है.
जो चीटियां संक्रमित नहीं होती, वो अपना मजदूरों वाला काम करती रहती है. वो संक्रमित चीटी को खाना खिलाती है. उसका ख्याल रखती है. बमीठे में संक्रमित चीटी की तबियत का ख्याल रखा जाता है. यह स्टडी की है जर्मनी के गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी के चीटी विशेषज्ञ सुजेन फ्वाइटजिक और उनकी टीम कर रही है.
जब टेपवर्म यानी पैरासाइट चीटी के आंत में रहता है. यह खास तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स और प्रोटीन को चीटी के खून में डालता है. अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि इन रसायनों के शरीर में जाने के बाद चीटियों को क्या होता है. लेकिन इस पैरासाइट से संक्रमित चीटियों का जीवन बढ़ जाता है.
एनोमोटेनिया टेपवर्म का जीवन चीटीं के आंत में ही खत्म नहीं होता. वयस्क टेपवर्म कठफोड़वा पक्षी के शरीर में रहता है. इस टेपवर्म का मकसद पक्षी को लंबा जीवन देना नहीं होता. अगर यह बड़ा हो जाता है, तो पक्षी इसे अपने शरीर से उगल कर वापस इसका नाश्ता बना लेती है.
ये पैरासाइट एक और माध्यम से पक्षियों का नाश्ता बनते हैं. कठफोड़वा पक्षी जब बमीठे से चीटियों का शिकार करता है, तब संक्रमित चीटी या चीटियों के जरिए यह टेपवर्म पक्षी के पेट तक चला जाता है. लेकिन हैरानी इस बात की है संक्रमित चीटी आलसी हो जाती है. उसका सारा काम उसके बमीठे में मौजूद अन्य चीटियां करती हैं.
मजदूर चीटियों को संक्रमित चीटी का ख्याल रखना होता है. इस ख्याल रखने के चक्कर में मजदूर चीटियां अपने जीवन को पूरा नहीं कर पाती. काम के अधिक बोझ में मारी जाती हैं. उनके अंदर भी तनाव देखने को मिलता है. जैसे ही बमीठे में कोई चीटी संक्रमित होती है, मजदूरों का ध्यान रानी चीटी से हटकर बीमार चीटी पर चला जाता है.
मजदूर चीटियां संक्रमित लेकिन युवा दिखने वाली चीटी का ख्याल रखने लगती हैं. अब यह चीटी जवान कैसे दिखती है. इसकी वजह तो पता चल गई है. संक्रमित चीटी के हेमोलिंफ यानी वो स्थान जहां सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है. वहां पर पैरासाइट अपना प्रोटीन डाल देता है. जिससे दोनों के बीच नया रिएक्शन होता है.
संक्रमित चीटियों में विटेलोजेनिन-लाइक ए प्रोटीन मिला. वह भी बेहद ज्यादा मात्रा में. यह प्रोटीन काम और रिप्रोडक्शन बांटने में मदद करता है. लेकिन पैरासाइट अपने प्रोटीन के जरिए विटेलोजेनिन-लाइक ए प्रोटीन के जीन को बदल देता है. जिस वजह से इन चीटियों की उम्र बढ़ने लगती है.