धरती पर अधिकतर जीवों की उत्पत्ति के लिए दो जैविक वस्तुओं की जरूरत होती है. पहला वीर्य यानी स्पर्म (Sperm) और दूसरा अंडा यानी (Eggs). ज्यादातर जीव बने भी इन्हीं के मिश्रण से. लेकिन इन्हीं दोनों से बने इंसान ने अपनी सुविधा के लिए प्लास्टिक बनाया. जिससे धरती को भारी नुकसान हो रहा है. प्लास्टिक प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. अब वैज्ञानिकों ने स्पर्म के जरिए धरती को बचाने का तरीका खोजा है. स्पर्म के जरिए वो धरती से प्लास्टिक का प्रदूषण खत्म कर सकते हैं. हैरान करने वाली इस खोज में उम्मीद तो है लेकिन जिस जीव का स्पर्म उपयोग किया जाएगा, उसके विलुप्त होने का खतरा भी हो सकता है. (फोटोः गेटी)
चीन (China) के वैज्ञानिकों ने समुद्र और साफ पानी में मिलने वाली सैल्मन मछली (Salmon Fish) के स्पर्म से एक ऐसी वस्तु बनाई है जो प्लास्टिक की जगह ले सकती है. ये प्लास्टिक की तरह मजबूत, लचीली होती है लेकिन यह बायोडिग्रेडेबल भी है. यानी यह प्लास्टिक की तरह गलने में सैकड़ों सालों का समय नहीं लेगी. बल्कि जल्द से गलकर धरती को नुकसान नहीं पहुंचाएगी. न ही इसमें कोई जहरीला रसायन होता है. (फोटोः पिक्साबे)
चीन के वैज्ञानिकों ने सैल्मन मछली के स्पर्म से DNA के दो स्ट्रैंड यानी लड़ियों में सब्जियों के तेल से मिलने वाले एक रसायन को मिलाकर ऐसा पदार्थ बनाया है जो स्पॉन्ज की तरह नर्म, गद्देदार, प्लास्टिक की तरह मजबूत और लचीला है. वैज्ञानिकों ने इसे हाइड्रोजेल (Hydrogel) नाम दिया है. (फोटोः गेटी)
सैल्मन मछली के स्पर्म और सब्जियों के तेल से निकले रसायन से बने इस हाइड्रोजेल (Hydrogel) को किसी भी प्रकार के आकार में ढाला जा सकता है. अगर इसमें से नमी निकाल दिया जाए तो ये बेहद सख्त और मजबूत पदार्थ बन जाता है. यानी इसे आप किसी भी आकार में ढालकर फ्रीज-ड्राई कर दीजिए. यानी उसकी नमी पूरी तरह से निकाल दीजिए. बस आपके सामने किसी भी तरह के आकार का मजबूत और टिकाऊ ढांचा तैयार मिलेगा. (फोटोः गेटी)
चीन के शोधकर्ताओं ने इस हाइड्रोजेल (Hydrogel) से अब तक कप, पजल पीस, डीएनए का ढांचा बना लिया है. वैज्ञानिक इसे इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) प्लास्टिक बता रहे हैं. चीन के वैज्ञानिकों ने सैल्मन मछली के डीएनए से जेनेटिक कोड लेकर हाइड्रोजेल (Hydrogel) बनाया है. साल 2015 में आई एक स्टडी के मुताबिक दुनिया में इस समय 50 बिलियन टन यानी 50,000,000,000,000 किलोग्राम DNA मौजूद हैं. (फोटोः गेटी)
अगर दुनिया में 50,000,000,000,000 किलोग्राम DNA मौजूद हैं तो हम इनसे प्लास्टिक का विकल्प तैयार कर सकते हैं. जैसे फसलों से, एल्गी से या फिर किसी बैक्टीरिया के डीएनए से. इससे फायदा ये होगा कि धरती पर प्लास्टिक की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा. चाहे वह लचीली थैली हो या फिर सख्त ईंट. आप हाइड्रोजेल जैसे पदार्थों का जैसा चाहे उपयोग कर सकते हैं. (फोटोः गेटी)
पर्यावरण के लिए प्लास्टिक कचरा एक बहुत बड़ी दिक्कत है. प्लास्टिक को पेट्रोकेमिकल्स से बनाया जाता है. इसे बनाने में बहुत ज्यादा ऊर्जा, गर्मी और जहरीले पदार्थों की जरूरत होती है. इन पदार्थों की वजह से वायु, जल और जमीन पर भी प्रदूषण होता है. प्लास्टिक को गलने में सैकड़ों साल लगते हैं. रिसाइकिल करने की प्रक्रिया बेहद कम है. जिसकी वजह से दुनियाभर के कई देशों में प्लास्टिक कचरे का पहाड़ जमा होता जा रहा है. (फोटोः गेटी)
दुनियाभर के वैज्ञानिक बरसों से प्लास्टिक के विकल्पों को खोज रहे हैं. वह यह जानना चाहते हैं कि कम ऊर्जा, प्राकृतिक स्रोतों के जरिए और प्रदूषण न फैलाने वाले विकल्प क्या-क्या हो सकते हैं. ऐसे पदार्थों की खोज लगातार जारी है जो प्लास्टिक के बदले उपयोग में लाए जा सकें और उनसे पर्यावरण को नुकसान भी न पहुंचे. बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (Biodegradable Plastic) का निर्माण हो चुका है, जिसे बनाने के लिए मकई के स्टार्ट (Cornstarch) और एल्गी का उपयोग किया जाता है. (फोटोः गेटी)
तियानजिन यूनवर्सिटी के साइंटिस्ट डेयोंग यांग और उनकी टीम का कहना है कि बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (Biodegradable Plastic) बनाने में जो सबसे बड़ी समस्या है वो ये है कि इसमें काफी ज्यादा ऊर्जा लगती है, इसे रिसाइकिल करने में काफी ज्यादा समय लगता है. डेयोंग यांग और उनकी टीम का दावा है कि उन्होंने सैल्मन मछली के स्पर्म और सब्जियों के तेल से निकले रसायन से जो हाइड्रोजेल (Hydrogel) बनाया है, वो इन सारी समस्याओं का समाधान है. (फोटोः गेटी)
डेयोंग का दावा है कि सैल्मन मछली के स्पर्म और सब्जियों के तेल से निकले रसायन से बने इस हाइड्रोजेल (Hydrogel) से प्लास्टिक की तुलना में 97 फीसदी कम कार्बन उत्सर्जन होता है. यह एक तरह का जेल होता है जो किसी भी रूप में ढाला जा सकता है. सख्त, नरम या लचीला. यह किसी भी रूप में हो, इसे रिसाइकिल करना आसान होता है. इससे बने पदार्थों को रिसाइकिल करने के लिए DNA गलाने वाले एंजाइम की जरूरत भी नहीं होगी. (फोटोः गेटी)
डेयोंग कहते हैं कि सैल्मन मछली के स्पर्म बने हाइड्रोजेल (Hydrogel) आसानी से रिसाइकिल किया जा सकता है. इनके ऊपर वॉटरप्रूफ कोटिंग लगाई जा सकती है. लेकिन ऐसा करने पर इन्हें रिसाइकिल करना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि ये कुछ ऐसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. खास तरह की पैकेजिंग आदि के लिए. (फोटोः एपी)