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साइंस न्यूज़

ये है हमारे खून का परिवार... खून की कोशिकाओं का रंग अलग पर काम सिर्फ एक

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2022,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST
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हमारे शरीर का खून दिखता लाल है. लेकिन इसमें अलग-अलग रंग की कोशिकाएं होती हैं. इनके रंग की तरह ही इनका काम भी अलग होता है. लेकिन जब ये अलग-अलग रंग की होती है? तो खून का रंग लाल क्यों दिखता है. खून काम आता है शरीर को सुचारू रूप से चलाए रखने में. स्वस्थ रखने में. विकास में. बीमारियों से बचने में. आइए समझते हैं खून की इस शानदार टीम के जानदार प्लेयर्स को... (फोटोः Steve Gschmeissner/Getty Images)

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लाल रक्त कोशिकाएं ( Red blood cells)

खून का सबसे बड़ा हिस्सा होता है लाल रंग में दिखने वाली लाल रक्त कणिकाएं (Red Blood Cells). इन्हें विज्ञान की भाषा में एरिथ्रोसाइट्स (Erythrocytes) कहते हैं. इसका मुख्य काम होता है शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन की सप्लाई करना. ये सेल्स बेहद छोटी, चपटी और कटोरीनुमा दिखती हैं. ये कार्बन डॉईऑक्साइड को फेफड़ों तक पहुंचाकर उन्हें बाहर निकालने का काम करती हैं. (फोटोः गेटी)

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लाल रक्त कोशिकाएं हड्डियों के अंदर बनती है जिसे अस्थि मज्जा (Bone marrow) कहते हैं. लाल रक्त कोशिकाओं का जीवन 120 दिनों का होता है. इसके बाद वे खुद ही नष्ट हो जाती हैं. इनकी कमी से शरीर को ऑक्सीजन पूरा नहीं मिलता. एनीमिया बीमारी हो जाती है, थकान, दिल की धड़कन कम ज्यादा होना, शरीर पीला हो जाना, लाल रक्त कोशिका की कमी से जूझ रहे बच्चों का विकास स्वस्थ बच्चों की तुलना में धीरे होता है. (फोटोः गेटी)

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प्लेटलेट्स (Platelets) 

प्लेटलेट्स आकार में छोटी होती हैं. ये भी कोशिकाएं ही होती है. ये नारंगी रंग की दिखती हैं. यह खून निकलने पर उसे रोकने के लिए मदद करती है. यानी ब्लड क्लॉटिंग (Blood Clotting) में मदद करती हैं. ये भी बोन मैरो में ही बनती हैं. इनकी लाइफ 10 दिन की होती है. इसके बाद ये खत्म हो जाती हैं. इनकी जगह नई बनती है. डेंगू होने पर लोगों को प्लेटलेट्स की कमी की शिकायत देखने को मिलती है. (फोटोः गेटी)

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सफेद रक्त कोशिकाएं (White Blood Cells) 

हमारे शरीर पर जब बैक्टीरिया या वायरस हमला करते हैं, तब हमारे खून में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं उनसे सामना करती हैं. इन्हें वैज्ञानिक भाषा में लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) कहते हैं. जब भी शरीर में बैक्टीरिया या वायरस का हमला होता है, ये सबसे पहले सक्रिय होती हैं. इनका रंग सफेद या बेहद हल्के नीले रंग का दिखता है. (फोटोः गेटी)

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सफेद रक्त कोशिकाएं (White Blood Cells) भी बोन मैरो से बनती हैं. इन्हें बनाने वाली कोशिकाओं का नाम होता है हीमैटोपोएटिक स्टेम सेल्स (Hematopoietic Stem Cells). इनमें भी कई प्रकार की कोशिकाएं होती है. टी सेल्स (T Cells), बी सेल्स (B Cells) और नेचुरल किलर सेल्स (Natural Killer Cells). (फोटोः गेटी)

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मैक्रोफेज (Macrophages)

यह सफेद रक्त कोशिकाएं (White Blood Cells) का ही एक हिस्सा होता है. ये किसी भी तरह के पैथोजेन्स, कैंसर कोशिकाएं, माइक्रोब्स, कोशिकाओं के कचरे और घुसपैठियों को शरीर से साफ करती हैं. इनकी वजह से शरीर में किसी भी प्रकार का संक्रमण रुकता है. इनका काम सिर्फ इतना ही नहीं है. ये मांसपेशियों, हाथ-पैर के विकास में मदद करती हैं. जख्म को भरने में सहायता करती हैं. (फोटोः गेटी) - ये खबर इंटर्न आदर्श ने लिखी है.

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