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साइंस न्यूज़

जिस बुलडोजर ने CM योगी की दोबारा सरकार बनाने में की मदद, वो कब और क्यों बना?

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 6:19 PM IST
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'बुलडोजर बाबा', 'बुलडोजर योगी' और न जाने किन-किन नारों का उपयोग उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हुआ. हम राजनीतिक खबरों में नहीं जाते. मुद्दा ये है कि जिस यंत्र ने योगी की सरकार बनाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर मदद की, क्या उसके बारे में हमें कुछ पता भी है. उसे किसने बनाया? उसका इतिहास क्या है? बुलडोजर नाम का यंत्र कब से धरती पर काम कर रहा है? आइए जानते हैं इंसानों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस शानदार यंत्र के बारे में... (फोटोः डिमित्रि वेटसिकास/पिक्साबे)

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बुलडोजर नाम क्यों पड़ा? (Why is it called a bulldozer?)

बुलडोजर शब्द का इतिहास 19वीं सदी से शुरु होता है. बुलडोजर एक हॉरीजोंटल फोर्जिंग प्रेस था, जो धातु को आकार देने और उसे मोड़ने के लिए उपयोग किया जाता था. दूसरा शब्द है Bull-Dose यानी इतनी बाड़ी मात्रा का डोज जो किसी बैल के लिए प्रभावी हो. या उसकी तरह प्रभावी हो. इस शब्द का उपयोग किसी दवा या सजा के लिए भी किया जाता था. इस शब्द का जबरदस्ती और धमकाना भी मतलब था. (फोटोः रिचबी क्लार्क/पिक्साबे)

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कब और किसने बनाया गया बुलडोजर? (Who Invented Bulldozer and When?)

बुलडोजर असल में कई यंत्रों का मिश्रण है. उसमें खुदाई का यंत्र अलग, तोड़फोड़ का अलग और चीजों को एक लेवल पर करने का यंत्र अलग या फिर जरूरत पड़ने पर छेद करने के यंत्रों को जोड़ा जा सकता है. इन सभी को अलग-अलग लोगों ने खोजा या बनाया. इन्हें या इनमें से एकाध चीजों को जोड़कर 1904 में कैलिफोर्निया के किसान बेंजामिन होल्ट ने शुरुआती बुलडोजर बनाया था. इसका व्यवसायिक उत्पादन 1923 में आयोवा किसान जेम्स कमिंग्स और इंजीनियर जे. अर्ल मैक्लियॉड ने किया. इन लोगों ने ही पहला आधुनिक बुलडोजर बनाया. (फोटोः सिगी नोवाक/पिक्साबे)

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कितना पुराना है बुलडोजर? (How Old is the Bulldozer?)

बुलडोजर की शुरुआती मौजूदगी 1880 से दर्ज होती है. ये शुरुआती बुलडोजर क्रॉलर ट्रैक्टर्स में लगाए जाते थे. इनका उपयोग खेती-बाड़ी में होता था. 1910 में इसका उपयोग निर्माण कार्यों के लिए करने का आइडिया आया. फिर अलग-अलग कामों के हिसाब से इसके रूप बदलते चले गए. कोई क्रॉलर बन गया. तो कोई एक्सकेवेटर. कुछ जेसीबी बन गए तो कुछ ब्लेड बुलडोजर तो कुछ रिपर बुलडोजर. (फोटोः डिमित्रिस वेटसिकास/पिक्साबे)

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बुलडोजर के प्रकार (Types of Bulldozer)

मुख्य रूप से बुलडोजर के दो ही प्रकार होते हैं. पहला ब्लेड बुलडोजर (Blade Bulldozer) यानी वो बुलडोजर जिसके आगे की तरफ लोहे की ब्लेड लगी हो, जो एक बार ढेर सारा मलबा उठा ले. ये ब्लेड्स तीन प्रकार के होते हैं सीधे, यू ब्लेड और एस-यू ब्लेड. दूसरा प्रकार होता है रिपर बुलडोजर (Ripper Bulldozer) यानी बुलडोजर के आगे पंजे जैसे धातु के यंत्र लगाए जाते हैं. ये नुकीले और तेज होते हैं. ये खुदाई या किसी चीज को ढीला करने के लिए उपयोग किया जाता है. (फोटोः पॉल ब्रेनन/पिक्साबे)

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बुलडोजर के वैरिएंट्स (Variants of Bulldozers)

बुलडोजर के दो वैरिएंट्स आमतौर पर उपयोग किए जाते हैं. पहला वो जो हम सामान्य तौर पर उपयोग करते हैं. इसमें अब उन बुलडोजर्स को शामिल किया गया है, जिसका उपयोग सेना करती है. ये बुलडोजर आर्मर्ड होते हैं. यानी इनपर गोलियों-बमों का भी असर नहीं होता. इनका उपयोग युद्द के दौरान किया जा सकता है. इजरायल की सेना के पास ऐसे बुलडोजर बहुत हैं. दूसरे होते हैं रिमोट कंट्रोल्ड डोजर्स (Remote Controlled dozers). ये बुलडोजर्स का अत्याधुनिक रूप है. इन्हें 1000 फीट दूर से कंट्रोल किया जाता है. ऐसे बुलडोजर्स से खतरनाक काम किये जाते हैं. (फोटोः पॉल ब्रेनन/पिक्साबे)

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बुलडोजर और जेसीबी में अंतर (Difference Betweeen Bulldozer and JCB)

जेसीबी (JCB) बुलडोजर का ही एक रूप है. लेकिन बुलडोजर एक ताकतवर ट्रैक्टर होता है, जो ब्लेड या रिपर लगाकर भारी कचरे को खिसकाने या एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रखने के काम आता है. सतह की लेवलिंग करने, इमारतों को गिराने के काम में आता है. जेसीबी एक अर्थमूविंग मशीन है, जिसे जेसीबी कंपनी बनाती है. यह बुलडोजर का छोटा रूप है. यह गड्ढा करने के काम आता है. कुछ भारी उठाने में काम आता है. यह बुलडोजर का हल्का लेकिन कई स्तरीय काम करने में सक्षम रूप है. यह असल में खुदाई करने वाला यंत्र है. यानी एक्सकेवेटर (Excavator). (फोटोः रे श्रुबेरीज/पिक्साबे)

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सबसे छोटा और बड़ा बुलडोजर (World's Smallest and Biggest Bulldozer)

पिछली साल अमेरिका की कोमात्सू कॉर्प ने दुनिया का सबसे छोटा बुलडोजर D39i-24 बनाया है. सबसे बड़ा बुलडोजर इसी कंपनी ने बनाया है. इसका नाम है D575A-3SD. यह 153 टन का है. इसमें 858kW का इंजन लगा है. यह 1800 rpm पर 1167 हॉर्स पॉवर की ताकत पैदा करता है. इसकी ब्लेड 3.6 मीटर ऊंची और 7.4 मीटर चौड़ी है. (फोटोः पिक्साबे)

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जैसा काम वैसा बुलडोजर (Bulldozer According to Work)

अलग काम के लिए अलग बुलडोजर. जैसे - क्रॉलर बुलडोजर (Crawler Bulldozer) भारी वस्तुओं को खिसकाने के लिए होता है. मिनी बुलडोजर (Mini Bulldozer) पार्सल कंपनियों में काम आता है, ये छोटो कामों के लिए होता है, अक्सर एयरपोर्ट, प्रिंटिंग प्रेस में दिख जाता है. व्हील बुलडोजर (Wheel Bulldozer) सड़क निर्माण, भारी वस्तुओं को खिसकाने वाला यंत्र. क्रॉलर की तरह ही, बस इसमें पहिए लगे होते हैं. (फोटोः एसएम अनामुल रिजवान/पिक्साबे)

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हाइब्रिड बुलडोजर (Hybrid Bulldozer) किसी भी मौसम में काम करने वाला इलेक्ट्रॉनिक बुलडोजर. यह किसी भी जगह काम कर सकता है. सूखे में, गीले में या बर्फ में. शिपहोल्ड बुलडोजर (Shiphold Bulldozer) इनका उपयोग आमतौर पर बंदरगाहों पर होता है. लोडिंग और अनलोडिंग के लिए. मल्चर बुलडोजर (Mulcher Bulldozer) का उपयोग जंगलों और सड़कों आदि के काम में लिया जाता है. (फोटोः सिगी नोवाक/पिक्साबे)

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