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साइंस न्यूज़

भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई मिसाइल, दुश्मन का पीछा करके देती है मौत

मंजीत नेगी
  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 6:37 PM IST
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इजरायल की खतरनाक Spike-NLOS (Non-Line of Sight) मिसाइल अब भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों में लगाई जाएगी. इन मिसाइलों से लैस हेलिकॉप्टरों के चीन और पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया जाएगा. ताकि ऊंचाई वाले इलाके में दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को जरुरत पड़ने पर ध्वस्त किया जा सके. 

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अब तक इस मिसाइल को सेनाएं कंधे पर रख कर दागती थीं. इसका वायुसैनिक वर्जन भी है. जिसे हेलिकॉप्टर पर तैनात कर दो. निशाना लगाकर दाग दो. इसके बाद दुश्मन टारगेट पर यह बर्बाद कर देती है. यह मिसाइल पीछा करके मारती है. यानी टारगेट की तरफ दागो और भूल जाओ. 

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यह मिसाइल छोटी लेकिन घातक होती है. कंधे से, ट्राईपॉड से या बाईपॉड से इसे दागा जा सकता है. इस मिसाइल को टैंक पर तैनात किया जा सकता है. हेलिकॉप्टर में लगाया जा सकता है. चीन के साथ सीमा विवाद के समय भारत ने इजरायल से इमरजेंसी यूज के लिए इन मिसाइलों की छोटी मात्रा मंगाई थी. 

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इस मिसाइल का नाम है स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल कहते हैं. इसकी तकनीक इतनी अच्छी है कि टारगेट न भाग सकता है न छिप सकता है. यह उसे नष्ट करने तक पीछा करती रहती है.  इजरायल इसका उपयोग 1981 से कर रहा है. इसका उपयोग दुनिया के 35 देश कर रहे हैं. 

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यह 1982 से लेकर अब तक 6 से 7 बड़े युद्धों में उपयोग की जा चुकी है. 2019 के शुरुआत में चीन और पाकिस्तान के साथ होने वाले संघर्षों को लेकर भारत सरकार ने आपातकालीन स्थिति में 240 स्पाइक MR मिसाइल और 12 लॉन्चर्स मंगाए थे. उसी साल अंत तक इन्हें सेना में शामिल कर दिया गया. 

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सेना इसका उपयोग दुश्मनों के टैंक्स आदि उड़ाने के लिए कर सकती है. सिर्फ टैंक ही नहीं, ये कम ऊंचाई पर उड़ रहे हेलिकॉप्टर और विमानों को भी मार गिरा सकती है. Spike ATGMs के कुल मिलाकर 9 वैरिएंट्स हैं. अगर इन्हें हेलिकॉप्टर में तैनात करते हैं तो कैनिस्टर में रखी मिसाइल का वजन होता है 34 KG. लॉन्चर का 55 KG और लॉन्चर के साथ चार मिसाइलों का वजन होता है 187 KG. 

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आमतौर पर Spike ATGMs की लंबाई 3 फीट 11 इंच होती है. वैरिएंट्स के अनुसार थोड़ा-बहुत कम ज्यादा हो सकती है. अलग-अलग वैरिएंट की रेंज अलग है. 50 मीटर से 10 हजार मीटर तक इसकी रेंज है. हेलिकॉप्टर में 600 से 25 हजार मीटर रेंज वाली Spike-NLOS मिसाइल लगेगी. Spike ATGMs में टैंडेम चार्ज HEAT वॉरहेड लगाया जाता है. जिसके पीछे एक सॉलिड प्रॉपेलेंट रॉकेट उसे टारगेट तक पहुंचाता है. इसमें इंफ्रारेड होमिंग- इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सीकर लगा होता है, जो दुश्मन को किसी भी मौसम और अंधेरे में भी खोज सकता है. यानी यह टारगेट से निकल रही गर्मी को पकड़कर उसका पीछा करता है. 

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