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साइंस न्यूज़

Future of Indian Navy: फ्यूचर वॉर स्ट्रेटजी, मेड इन इंडिया का दम... भारत के इन 61 जंगी जहाजों के सामने दुश्मन की एक न चलेगी

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST
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डेस्ट्रॉयर्स... सबसे पहले जानते हैं प्रोजेक्ट 18 (Project 18) के बारे में. इंडियन नेवी का प्लान है कि राजपूत क्लास गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स की जगह लाया जाएगा. इसके तहत 5 से 10 युद्धपोत बनेंगे. इनमें 8 कवच डिकॉय लॉन्चर्स होंगे. 4 टॉरपीडो काउंटरमेसर्स होंगे. 2 क्वाड कैनिस्टर लॉन्चर्स होंगे. 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम होगा. इसमें XRSAM, Barak 8, VL-SRSAM, BrahMos, Nirbhay, SMART मिसाइलें लगाई जाएंगी. साथ ही रोमियो और ध्रुव हेलिकॉप्टर तैनात होंगे. इसके अलावा सात प्रकार के गन लगे होंगे. 

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INS Vishkhapatnam Class... विशाखापट्टनम क्लास में चार युद्धपोत शामिल हैं. दो तैनात हैं ड्यूटी पर. दो इंफाल और सूरत इस साल और अगले साल कमीशन हो जाएंगे. इसमें 32 बराक 8 मिसाइलें, 16 ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइल 4 टॉरपीडो ट्यूब्स, 2 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स, 7 प्रकार के गन्स होते हैं. ध्रुव और सी किंग हेलिकॉप्टर तैनात हैं. ये ऐसे युद्धपोत हैं, जिनसे लगातार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया जा रहा है.

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इसमें से विशाखापट्टनम और मोरमुगाओ को नौसेना में शामिल कर लिया गया है. लेकिन अभी आईएनएस इंफाल और सूरत का शामिल होना बाकी है. इनमें से इंफाल इस साल और सूरत अगले साल नौसेना में कमीशन होंगी. इनकी लॉन्चिंग हो गई है, लेकिन अभी समुद्री ट्रायल्स चल रहे हैं. 

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फ्रिगेट्स... नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स असल में गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स हैं. इन्हें मजगांव डॉक और गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स बना रहे हैं. इनके तहत सात जंगी जहाज बनाए जा रहे हैं. इनमें पांच लॉन्च हो चुकी हैं जो इस साल फरवरी 2025 तक भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएंगे. लॉन्च किए गए फ्रिगेट्स के नाम हैं- नीलगिरी, उदयगिरी, तारागिरी, हिमगिरी और दूनागिरी. 

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ये फ्रिगेट्स 6670 टन डिस्प्लेसमेंट करते हैं. इनमें 32 बराक-8 मिसाइलें, 8 ब्रह्मोस मिसाइलें, 2 वरुणास्त्र टॉरपीडो लॉन्चर, 2 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, तीन गन्स लगे होते हैं. इसके अलावा इन पर ध्रुव और सीकिंग हेलिकॉप्टर तैनात हो सकते हैं. चार कवच डिकॉय लॉन्चर्स लगे हैं. 2 टॉरपीडो काउंटरमेजर्स सिस्टम लगे हैं. 

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तलवार क्लास फ्रिगेट भी तैयार हो रहे हैं. ये भी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स होंगे. एक युद्धपोत लॉन्च हो चुका है. तीन का निर्माण हो रहा है. इन युद्धपोतों पर 24 मीडियम रेंज मिसाइलें, 8 इगला सैम मिसाइलें, 8 क्लब मिसाइलें, 8 ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात होंगी. इसके अलावा इसमें पांच गन्स, 2 टॉरपीडो ट्यूब्स और 1 रॉकेट लॉन्चर होगा. 

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कॉर्वेट्स... इनमें तीन तरह के युद्धपोत हैं. पहला एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट हैं. ये 16 बनेंगे. एक INS Arnala लॉन्च हो चुका है. 13 का निर्माण हो रहा है. 2 की प्लानिंग है. इनका काम तटीय इलाकों की पेट्रोलिंग और दुश्मन की पनडुब्बियों की खोज और जरुरत पड़ने पर उन्हें नष्ट करना है. 2026 तक सभी कॉर्वेट्स नौसेना को मिल जाएंगे. इनमें कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम है. साथ ही हल्के टॉरपीडोस से लैस.

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सिर्फ इतना ही नहीं इसमें एंटी-सबमरीन रॉकेट्स भी लगाए गए हैं, जो दुश्मन की पनडुब्बियों की कब्र समुद्र के अंदर ही बना देंगे. इस जहाज पर 7 अधिकारियों के साथ 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं. इसमें लगे मरीन डीजल इंजन के साथ तीन वाटर जेट्स लगे हैं, जो इसे करीब 47 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार देंगे. यह 88 फीसदी स्वदेशी है.  इन कॉर्वेट्स को लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) के लिए बनाया गया है. इनकी रेंज 3334 किलोमीटर है. 

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दूसरे हैं- नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स. ऐसे 6 जंगी जहाज बनाने की योजना है. ये 2200 टन डिस्प्लेसमेंट के होंगे. इनमें ब्रह्मोस, एंटी-शिप मिसाइल, लैंड अटैक मिसाइल तैनात होंगे. इन पर 80 नौसैनिक और 13 अधिकारी तैनात रहेंगे. इनकी रेंज 5200 किलोमीटर होगी. इनपर 32 वर्टिकली लॉन्च्ड शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, 8 ब्रह्मोस या 16 एंटी शिप VSHORADS मिसाइलों को तैनात करने की योजना है. 

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तीसरा है नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट. ये 3500 टन डिस्प्लेसमेंट वाले जंगी जहाज होंगे. इनकी रेंज 7400 किलोमीटर होगी. इनपर 32 VL-SRSAM, 8 ब्रह्मोस, 16 नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल यानी VSHORADS और 2 वरुणास्त्र टॉरपीडो ट्यूब्स होंगे. 

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इनके अलावा 7 नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट अटैक क्राफ्ट्स की भी प्लानिंग हैं. इनकी गति ही इन्हें मारक बनाएगी. ये 83 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेंगे. ये आकार में छोटे और 320 टन के होंगे. इन 1 30 मिमी के ऑटोकैनन, एक 12.7 मिमी की SRCG गन और VSHORADS मिसाइलें लगी होंगी. 

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