उत्तराखंड के उत्तरकाशी में नेहरू माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट के 28 ट्रेनी ट्रैकर्स यानी पर्वतारोही द्रौपदी का डांडा-2 नाम के विशालकाय पर्वत पर आए एवलांच में फंस गए हैं. उन्हें बचाने के लिए सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगी हुई हैं. वायुसेना ने दो चीता हेलिकॉप्टरों को रेस्क्यू के लिए तैनात कर दिया है. लेकिन ये जगह है कहां पर...
द्रौपदी का डांडा (Draupadi ka Danda) यानी द्रौपदी पीक गढ़वाल इलाके में आने वाले हिमालयों (Garhwal Himalaya) में बने गंगोत्री रेंज (Gangotri Range) में स्थित है. यहीं से डोकरियानी ग्लेशियर (Dokriani Glacier) की शुरुआत होती है. यानी द्रौपदी पीक के उत्तरी सिरे की तरफ से. (फोटोः FB/Devasheesh Pant)
द्रौपदी पीक पर अक्सर लोग, पर्यटक और माउंटेनियर यानी पर्वतारोही ट्रैकिंग के लिए जाते हैं. या फिर वहां पर पर्वतारोहण की ट्रेनिंग लेते हैं. द्रौपदी पीक की ऊंचाई 5771 मीटर यानी 18,934 फीट है. गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में जो प्रमुख ऊंचाई वाली चोटियां हैं, उनमें आती हैं- नंदा देवी, कामेत, सुनंदा देवी, अबी गामिन, माना पीक और मुकुट पर्बत. (फोटोः FB/Sandeep Saini)
हिंदुओं का पवित्र धार्मिक स्थल और भागीरथी की उत्पत्ति का स्थान गंगोत्री इस द्रौपदी पीक से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित है. आप इस मैप में यह देख सकते हैं.
द्रौपदी का डांडा पहाड़ पर ट्रैकिंग करने के लिए आपको डोकरियानी ग्लेशियर और बर्फ से लदे रास्तों पर चलना होता है. अगर बारिश हुई है या ताजा बर्फ गिरी है तो आपके लिए खतरा बढ़ जाता है. (फोटोः FB/Kavita Adhikari)
लोग इस द्रौपदी पीक पर फतह हासिल करने के बाद खुशी में भारतीय तिरंगे के साथ फोटो भी खिंचवाते हैं. लेकिन इससे आपको यहां की ऊंचाई का अंदाजा लग जाएगा. (फोटोः FB/Hardik Singh)
नेहरू माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट अपने ट्रेनी ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों के अलग-अलग ग्लेशियर और पर्वतों पर चढ़ने की ट्रेनिंग कराता है. अक्सर लोग उसके ट्रेनर्स के साथ ऊपर पहाड़ पर जाते हैं. (फोटोः FB/माधव जुनेजा)
पर्वतारोहियों का कैंप ऊंची-ऊंची चोटियों के बीच बेहद ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर के ऊपर बनाया जाता है. यहां चारों तरफ से ग्लेशियर के खिसकने और एवलांच आने की आशंका बनी रहती है. (फोटोः FB/Prakash Gooner Bisht)
आप इन कैंप्स को देखकर समझ सकते हैं कि यहां पर कितनी मुश्किलें होती होंगी. पहली माइनस डिग्री में ठंड. फिर तेज हवाएं. उसके बाद हवा पतली. यानी सांस लेने में दिक्कत. बहुत कम लोग ही यहां पर ट्रेनिंग या पर्वतारोहण के लिए आते हैं. (फोटोः FB/Sandeep Saini)
द्रौपदी का डांडा पीक पर चढ़ाई करने के बाद या ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अक्सर पर्वतारोही सामूहिक फोटोग्राफ्स खिंचवाते हैं. (फोटोः FB/Sohan Maladkar)