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अगली महामारी भी बन सकता है Zika Virus! जानिए इसकी वजह

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST
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केरल में जीका वायरस (Zika Virus) के संक्रमण की पुष्टि हुई है. कोरोना लहर के बीच इस वायरस के आने से खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है. केरल से 19 लोगों के सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (National Institute of Virology) में भेजे गए हैं. आशंका है कि इनमें से 13 लोग जीका वायरस से संक्रमित हो सकते हैं. जीका वायरस मच्छरों से फैलता है. जीका वायरस से संक्रमित होने के लक्षण (Symptoms of Zika Virus) डेंगू जैसे ही होते हैं जैसे बुखार आना, शरीर पर चकत्ते पड़ा और जोड़ों में दर्द. (फोटोः गेटी)

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हाल ही में ब्राजील के मानौस स्थित फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ अमेजोनास के बायोलॉजिस्ट मार्सेलो गोर्डो ने कहा था कि अगली महामारियों में जीका वायरस भी हो सकता है. फियोक्रूज अमेजोनिया बायोबैंक की जीव विज्ञानी अलेसांड्रा नावा ने मार्सेलो की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था कि जिस तरह से इंसान जंगलों पर कब्जा कर रहे हैं, ऐसे में वहां रहने वाले जीवों में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया और पैथोजेन्स इंसानों पर हमला करके संक्रमण फैला रहे हैं. ठीक ऐसा ही हुआ है चीन में, जहां से कोरोनावायरस निकला. (फोटोः गेटी)

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ब्राजील में बंदरों में जीका और चिकनगुनिया के वायरस मिले हैं. ये वायरस इंसानों से बंदरों में गया था. जिसकी वजह से ब्राजील में कई मादा बंदरों का गर्भपात कराना पड़ा था. क्योंकि मादा बंदरों के भ्रूण और शरीर में इंसानों वाले सारे लक्षण दिखाई दे रहे थे. जीका वायरस (Zika Virus) एडीज प्रजाति के मच्छरों से फैलता है. यह बंदरों को काटता है, उससे इंसानों तक यह पहुंच जाता है. (फोटोः गेटी)

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जीका वायरस के वाहक एडीज मच्छर केरल में उच्च घनत्व में मिलते हैं. एडीज मच्छर डेंगू भी फैलाते हैं. ये ठहरे हुए मीठे पानी में प्रजनन करते हैं और ज्यादातर घर के अंदर रहते हैं. जीका वायरस (Zika Virus) की वजह से अक्सर जन्म दोष और गुइलेन-बैरे सिंड्रोम  भी होता है. इसकी वजह से इम्यूनिटी पर भी असर पड़ता है. कई बार लोगों को जीका वायरस की वजह से दिखने वाले लक्षण भी नहीं दिखते हैं. इसकी वजह से ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं को हो सकती है. इसका संक्रमण विकासशील भ्रूण को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है. इसकी वजह से बच्चों में जन्मजात बीमारियां या विसंगतियां हो सकती हैं. (फोटोः गेटी)

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फिलहाल जीका वायरस का कोई टीका या इलाज नहीं है. वैसे भी हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भविष्य में आने वाली महामारियों में एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं आएंगी. अगली महामारी ऐसी होगी, जिसपर एंटीबायोटिक, एंटीमाइक्रोबियल, एंटीबैक्टीरियल दवाओं का असर नहीं होगा.  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिसटेंस को वैश्विक खतरा बताया है. संगठन ने कहा कि यह भविष्य में विकराल रूप ले सकता है. ऐसी बीमारियों दुनिया के किसी भी देश के किसी भी कोने से फैल सकती हैं. ये किसी भी उम्र के लोगों को चपेट में ले सकती हैं. (फोटोः गेटी) 

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जीका वायरस (Zika Virus) मच्छर, यौन संबंध, गर्भ और खून दान करने से भी फैल सकता है. WHO ने दुनिया भर की दवा कंपनियों को निर्देश दिया है कि इस वायरस को निष्क्रिय करने के लिए इनएक्टीवेटेड वैक्सीन विकसित किए जाए. ताकि गर्भवती महिलाओं को किसी तरह का नुकसान न हो. मार्च 2016 से लेकर अब तक दुनिया भर की 18 दवा कंपनियां जीका वायरस (Zika Virus) की वैक्सीन विकसित करने में लगी हैं. लेकिन इन कंपनियों का कहना है कि इसकी वैक्सीन बनने में करीब 10 साल का समय लगेगा. (फोटोः गेटी)

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जून 2016 में FDA ने जीका वायरस की वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए पहली बार अनुमति दी थी. मार्च 2017 में फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल के लिए डीएनए वैक्सीन को अप्रूवल मिला. इस वैक्सीन में वायरस का पूरा डीएनए नहीं है, इसलिए इससे संक्रमण होने का खतरा कम है. लेकिन अभी तक किसी भी वैक्सीन का बाजार में उत्पादन शुरु नहीं हुआ है. इसलिए यह बीमारी ज्यादा खतरनाक है. (फोटोः गेटी)

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जीका वायरस (Zika Virus) को पहली बार अप्रैल 1947 में यूगांडा के जीका जंगलों (Zika Forest) में रहने वाले रीसस मकाउ बंदर से निकाला गया था. जीका वायरस डेंगू, यलो फीवर, जैपैनीज इंसेफलाइटिस और वेस्ट नाइल वायरस के साथ अपना जीनस शेयर करता है. 1950 तक यह वायरस सिर्फ अफ्रीका और एशिया के इक्वेटर लाइन के आसपास स्थित इलाकों में फैला था. लेकिन साल 2007 से 2016 के बीच यह प्रशांत महासागर के देशों और अमेरिका में भी फैल गया. साल 2015-16 में अमेरिका में जीका वायरस को महामारी घोषित किया गया था. (फोटोः गेटी)

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जीका वायरस के अलावा भविष्य में होने वाले अन्य महामारियों में जो बीमारियां हैं, वो हैं- अलेसांड्रा और उनकी टीम ने ऐसे वायरस की स्टडी कर रहे हैं, जिसके बारे में दुनिया को कम पता है. इस पर स्टडी भी कम हुई है. इसका नाम है ओरोपाउच वायरस (Oropouche Virus). ये वायरस मच्छरों की एक प्रजाति मिज से फैलता है. इसका साइंटिफिक नाम है कलिकॉयड्स पैराएनसिस (Culicoides Paraensis). इस वायरस की वजह से बुखार, तेज सर दर्द, जोड़ों में दर्द होता है. (फोटोः गेटी)

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ओरोपाउच वायरस (Oropouche Virus) की खोज 1955 में हुई थी. तब से लेकर अब तक इसने ब्राजील में 30 बार महामारी का रूप लिया है.  इसकी वजह से करीब 5 लाख लोग बीमार हुए हैं. अब यह वायरस पनामा, 6 दक्षिण अमेरिकी देश, त्रिनिदाद और टोबैगो तक फैल चुका है. सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इस वायरस को लेकर घूमने वाला मच्छर कलिकॉयड्स पैराएनसिस (Culicoides Paraensis) अमेरिकी महाद्वीप के कई हिस्सों में पाया जाता है. (फोटोः गेटी)

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वहीं साउदर्न हाउस मॉस्कि्विटो (Culex Quinquefasciatus) ऐसा मच्छर है जो वेस्ट नाइल एंड सेंट लुईस इंसेफलाइटिस वायरस को लेकर घूमता है. यह मच्छर ओरोपाउच वायरस का वाहक भी बन सकता है. यानी इसकी वजह से अफ्रीका, एशिया और ऑ़स्ट्रेलिया में भी ओरोपाउच वायरस (Oropouche Virus)  का हमला हो सकता है. ओरोपाउच वायरस (Oropouche Virus) विभिन्न प्रकार के जीवों में पाया जाता है जैसे- स्लॉथ, मर्मोसेट्स, फिंचेस, पक्षी और कुछ स्तनधारी जीव. इस वायरस की जांच करने के लिए इंसान के पेशाब और थूक का सैंपल लेना होता है. (फोटोः गेटी)

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अलेसांड्रा और उनकी टीम एक और वायरस को लेकर चिंतित हैं. इस वायरस का नाम है मायारो वायरस (Mayaro Virus). यह वायरस अब तेजी से दक्षिण अमेरिकी देशों में फैल रहा है. इसके संक्रमण से फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं. सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि अगर किसी इंसान को संक्रमित करता है तो डॉक्टर यह पता करने में परेशान हो जाएंगे कि यह मायारो वायरस है, या मरीज को चिकनगुनिया या डेंगू हुआ है. क्योंकि ये वायरस लगातार शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को धोखा देता है. (फोटोः गेटी)

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