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इस आइलैंड के 10% लोगों को नहीं दिखते रंग, इनकी दुनिया सिर्फ black & white, ये है वजह

एक आइलैंड के लोगों को बहुत ही दुर्लभ बीमारी है. यहां के 10 प्रतिशत लोगों की दुनिया ब्लैक एंड व्हाइट (Black & White) है. जनिए इतने सारे लोगों को कैसे हुई होगी ये दुर्लभ समस्या.

इस आइलैंड के लोग अजीब परेशानी से जूझ रहे हैं (Photo: Wikipedia) इस आइलैंड के लोग अजीब परेशानी से जूझ रहे हैं (Photo: Wikipedia)
aajtak.in
  • पिंगेलैप ,
  • 27 मई 2022,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST
  • 10 प्रतिशत जनसंख्या को पूर्ण अक्रोमैटोप्सिया है
  • सिर्फ काला, सफेद और ग्रे रंग ही नजर आता है

साल 1775 में प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में पिंगेलैप (Pingelap) आइलैंड में एक तूफान आया था. कहा जाता है कि इस भयानक तूफान में सिर्फ़ 20 लोग ही बचे थे, जिनमें से एक वहां का राजा था. सैकड़ों सालों के बाद, इस इलाके की जनसंख्या का एक हिस्सा कलर ब्लाइंड (Colorblind) है. इसकी वजह यहां की इतनी कम जनसंख्या थी.

कलर ब्लाइंडनेस (Colorblindness) यानी इसमें या तो रंग नहीं दिखते या फिर कुछ रंगों को देखने में परेशानी होती है. नेशनल आई इंस्टीट्यूट (National Eye Institute) के मुताबिक, उत्तरी यूरोपीय वंश के करीब 8 प्रतिशत पुरुषों और 0.5 प्रतिशत महिलाओं में हरे-लाल रंग का अंधापन है. हालांकि, पिंगेलैप आइलैंड की लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या एक दुर्लभ स्थिति की शिकार है. इस मेडिकल कंडिशन को पूर्ण अक्रोमैटोप्सिया (Complete Achromatopsia) या टोटल कलर ब्लाइंडनेस (Total Color Blindness) कहा जाता है.

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Complete Achromatopsia में कोई रंग दिखाई नहीं देता (Photo: Pexels)

ऐसी स्थिति में लोगों को कोई रंग दिखाई नहीं देता. रंगों को समझने वाले कोन शंकुओं के न होने की वजह से उन्हें सिर्फ काला, सफेद और ग्रे रंग ही नजर आता है. इसके साथ-साथ, अक्रोमैटोप्सिया वाले लोग रोशनी के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं, उनका विज़न शार्प नहीं होता साथ ही उन्हें आंखों की अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं.

आखिर पिंगेलैप के इतने सारे लोगों में ये समस्या क्यों हुई? 

पिंगेलैप की आबादी पहले से ही कम थी, लेकिन जब 1775 में तूफान आया तो 19 लोगों और उनके राजा को छोड़कर सभी लोग बह गए थे. संभावना है कि राजा के पास एक रिसेसिव जीन था जिसकी वजह से यह स्थिति बनी थी. 

अमेरिकन जर्नल ऑफ ह्यूमन जेनेटिक्स ( American Journal of Human Genetics ) में प्रकाशित एक पेपर में कहा गया है कि लेंगकीकी तूफान में दो भाई बचे थे. सेमेनुह्वे के एक बच्चा था, जबकि मवाहुले के तीन पत्नियों से सात बच्चे थे, जिनमें से एक ने अपनी कज़िन बहन यानी सेमेनुह्वे की बेटी से शादी की थी. हो सकता है कि तूफान आने के पहले ये जीन मौजूद रहा हो, लेकिन तब यह दुर्लभ था. लेकिन जीन म्यूटेशन की वजह से ये आगे बढ़ गया.

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आइलैंड पर इतने कम लोगों के बीच काफी प्रजनन हुआ और जीन आबादी में फैल गया. यह जीन दुनिया भर में 30,000 लोगों में से 1 को प्रभावित करता है, लेकिन पिंगेलैप की आबादी के 10 प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हैं. 

 

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