
अब भारतीय सेनाएं 40-50 साल पुरानी स्थिति में नहीं है. जमीन हो, पहाड़ हो, रेगिस्तान हो, आसमान हो, अंतरिक्ष हो या समुद्र, हर तरफ हमारे हथियार कहर बरपा सकते हैं. हम अपने तोपों से दुश्मन का सीना छलनी कर सकते हैं. तो मिसाइलों से जमीन, जल, हवा और अंतरिक्ष में प्रलय ला सकते हैं. चीन और पाकिस्तान एकसाथ भी हमला करते हैं तो भारत की तीनों सेनाओं के पास कुछ ऐसे हथियार हैं, जो दोनों दुश्मन देशों की हालत पस्त कर सकते हैं. उनकी अकड़ ढीली कर सकते हैं. इन हथियारों की वजह से चीन और पाकिस्तान बड़ा हमला करने की नहीं सोच सकते.
टू-फ्रंट वॉर में चीन और पाकिस्तान की हर कुटिल चाल का सिरफोड़ जवाब देने के लिए भारतीय मिलिट्री तैयार है. पाकिस्तान ऐसे हमला नहीं करेगा. उसे चीन के हमले का इंतजार रहेगा. क्योंकि उसे पता है भारत के पास ज्यादा बेहतर हथियार हैं. भारत के वो कौन से हथियार हैं, जो LAC और LOC के पास तैनात हैं. कौन से ऐसे हथियार हैं, जो लंबी दूरी से ही चीन-पाकिस्तान में तबाही मचा सकते हैं.
अंतरिक्ष का ब्रह्मास्त्र ASAT
भारत के पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के लिए पृथ्वी एयर डिफेंस (पैड) सिस्टम है. इसे प्रद्युम्न बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर भी कहते हैं. यह एक्सो-एटमॉसफियरिक (पृथ्वी के वातावरण से बाहर) और एंडो-एटमॉसफियरिक (पृथ्वी के वातावरण से अंदर) के टारगेट पर हमला करने में सक्षम हैं. हमारे वैज्ञानिकों ने पुराने मिसाइल सिस्टम को अपग्रेड किया है. उसमें नए एलीमेंट जोड़े हैं. इसका मतलब ये है कि पहले से मौजूद पैड सिस्टम को अपग्रेड कर तीन स्टेज वाला इंटरसेप्टर मिसाइल बनाया गया. फिर मिशन शक्ति के परीक्षण में उसी का मिसाइल का इस्तेमाल किया गया.
भारतीय ASAT मिसाइल की रेंज 2000 किमी है. यह 1470 से 6126 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से सैटेलाइट की तरफ बढ़ती है. हालांकि, बाद में इसे अपग्रेड कर ज्यादा ताकतवर और घातक बनाया जा सकता है. डीआरडीओ ने बैलिस्टिक इंटरसेप्टर मिसाइल के जरिए 300 किमी की ऊंचाई पर मौजूद उपग्रह को मार गिराया.
प्रलय मिसाइल (Pralay Missile)
प्रलय मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के किसी भी तरह के अड्डे को बर्बाद कर सकती है. सटीक मारक क्षमता और तेज रफ्तार इसे ज्यादा घातक बनाती है. यानी सीमा के पास से इसे दागा जाए तो चीन-पाकिस्तान के बंकरों, तोपों, बेस आदि को खत्म करने में समय नहीं लगेगा. जमीन से जमीन पर मार करने वाली प्रलय को पृथ्वी मिसाइल प्रणाली पर बनाया गया है. यह मिसाइल 5 टन वजनी है. 500 से 1000 KG वजन के पांरपरिक वॉरहेड ले जा सकती है. ये इनर्शियल गाइंडेंस सिस्टम पर चलती है और इसमें सॉलिड प्रोपेलेंट फ्यूल है. प्रलय के वॉरहेड में हाई एक्सप्लोसिव, पेनेट्रेशन, क्लस्टर म्यूनिशन, फ्रैगमेंटेशन, थर्मोबेरिक, केमिकल वेपन लगा सकते हैं.
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अग्नि-5 मिसाइल (Agni-V Missile)
भारत की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक ICBM. 50 से 56 हजार KG वजन वाली इस मिसाइल की लंबाई 17.5 मीटर है. यह 1500 KG वजन का वॉरहेड उठा सकती है. इसमें सॉलिड फ्यूल रॉकेट लगा है. जो इसे पारंपरिक और परमाणु हथियार ढोने की ताकत देता है. रेंज 5500 KM है. यानी इसकी रेंज में चीन-पाकिस्तान समेत आधी दुनिया आती है.
बराक-8 मिसाइलें (Barak-8 Missiles)
ये लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इंडियन मिलिट्री के सभी विंग इसका इस्तेमाल करते हैं. 275 किलोग्राम की मिसाइल की लंबाई 4.5 मीटर है. इस पर 60 KG का हथियार लगा सकते हैं. ये डेटोनेशन हार्ड टू किल है. यानी यह मिसाइल गिरी तो दुश्मन राख में तब्दील. इसका रॉकेट बिना धुआं छोड़े उड़ता है, इसलिए आसमान में दिखता नहीं. रेंज 16 से लेकर 30 किलोमीटर तक है. जो 2469 किमी/ घंटा की स्पीड से उड़ती है.
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल (BrahMos Supersonic Missile)
ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक और घातक मानी जाती है. यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इसके कई वर्जन भारतीय मिलिट्री में तैनात हैं. 3000 KG वजनी यह मिसाइल 8.4 मीटर लंबी है. यह 200 से 300 KG वजन का पारंपरिक, सेमी-आर्मर पीयर्सिंग और परमाणु हथियार ले जा सकती है. अलग-अलग वर्जन 400 से लेकर 700 KM रेंज के हैं. इसकी सबसे खतरनाक बात ये है कि ये जमीन या समुद्र से मात्र 3 से 4 मीटर ऊपर उड़कर जा सकती है. इससे दुश्मन के राडार को इसके आने का पता नहीं चलेगा. इसकी गति 4939 किमी/घंटा है.
वीएल-एसआरएसएएम (VL-SRSAM)
भारतीय नौसेना (Indian Navy) की स्वदेी निर्मित वीएल-एसआरएसएएम (VL-SRSAM) मिसाइल. इसका पूरा नाम है- वर्टिकल लॉन्च-शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल. इसे बराक-1 की जगह जंगी जहाजों में लगाए जाने की योजना है. यह मिसाइल 154 किलोग्राम वजनी है. यह मिसाइल करीब 12.6 फीट लंबी है. इसका व्यास 7.0 इंच है. इसमें हाई-एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड वॉरहेड लगाया जाता है. यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के जहाज या मिसाइल को मार सकती है. इसकी रेंज 25 से 30 किलोमीटर है. यह अधिकतम 12 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकती है. इसकी गति बराक-1 से दोगुनी ज्यादा है. यह मैक 4.5 यानी 5556.6 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ती है. वीएल-एसआरएसएएम (VL-SRSAM) मिसाइल को किसी भी जंगी जहाज से दागा जा सकता है.
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पिनाका रॉकेट सिस्टम (Pinaka Rocket System)
पिनाका रॉकेट सिस्टम का नाम भगवान शिव के धनुष 'पिनाक' पर रखा गया है. पिनाका सिस्टम 44 सेकेंड में 12 रॉकेट दागता है. मतलब हर 4 सेकेंड में एक रॉकेट. इसकी रेंज 7 से 90 किलोमीटर है. पिनाका रॉकेट के ऊपर हाई एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन (HMX), क्लस्टर बम, एंटी-पर्सनल, एंटी-टैंक और बारूदी सुरंग उड़ाने वाले हथियार लग सकते हैं. यह रॉकेट 100 KG वजन का हथियार उठाने में सक्षम है. यह 5757.70 KM प्रतिघंटा की रफ्तार से दुश्मन की ओर बढ़ता है. यानी एक सेकेंड में 1.61 KM की स्पीड से हमला. दुश्मन को मौका नहीं मिलेगा कि वह टारगेट एरिया से दूर भाग पाए.
एलसीए तेजस (LCA Tejas)
देश में बना लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस (LCA Tejas) छोटी लड़ाई के लिए घातक फाइटर जेट है. यानी 400 किलोमीटर से थोड़ी ज्यादा रेंज. मतलब ये है कि इसे क्लोज-एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशंस में इस्तेमाल कर सकते हैं. दुश्मन के इलाके में छोटा मिशन करना है तो यह फाइटर जेट सबसे उपयुक्त है. अधिकतम स्पीड 1980 किमी/घंटा है. यानी ध्वनि की गति डेढ़ गुना ज्यादा. रेंज 1850 किलोमीटर है लेकिन कॉम्बैट रेंज 500 किलोमीटर ही है. यानी पूरे हथियारों और ईंधन के साथ ये दुश्मन के इलाके में 500 किलोमीटर अंदर जाकर तबाही मचाकर आ सकता है. अधिकतम 53 हजार किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें आठ हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी हवा से हवा, हवा से सतह, एंटी-रेडिएशन और एंटी शिप मिसाइलें तैनात की जा सकती है. इसके अलावा कई प्रकार के बमों से लैस किया जा सकता है.
सुखोई-30एमकेआई (Su-30MKI)
भारत का एक और दमदार फाइटर जेट है सुखोई-30 एमकेआई. वायुसेना में ऐसे 272 विमान मौजूद हैं. इसे उड़ाने के लिए दो पायलट लगते हैं. 21.93 मीटर लबें फाइटर जेट की अधिकतम गति 2120 किमी/घंटा है. युद्ध के दौरान यह पूरे हथियार के साथ 3000 किलोमीटर तक लगातार उड़ान भर सकता है. अधिकतम 17,300 मीटर की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स हैं, जिनमें रॉकेट्स, मिसाइल और बम या फिर इनका मिश्रण बनाकर लगाया जा सकता है. यह राफेल के साथ मिलकर किसी भी युद्ध में कहर बरपा सकता है.
राफेल फाइटर जेट (IAF's Rafale Fighter Jet)
इंडियन एयरफोर्स का मल्टीरोल फाइटर जेट डैसो राफेल अधिकतम 1912 किमी/घंटा की स्पीड से उड़ता है. कॉम्बैट रेंज 1850 KM है. अधिकतम 51,952 फीट की ऊंचाई पर जा सकता है. इसमें 30 मिमी की एक 125 राउंड वाली ऑटोकैनन लगी है. इसमें 14 हार्डप्वाइंट्स हैं वायुसेना के वर्जन के लिए और 13 नौसैनिक वर्जन के लिए. यानी सेनाओं के हिसाब से हथियार लगाने की सुविधा. इसमें हवा से हवा, हवा से जमीन, हवा से शिप और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. इसके अलावा इसमें कई तरह के बम लगा सकते हैं.
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के-9 वज्र टैंक (K-9 Vajra Tanks)
के9-वज्र टी (K-9 Vajra-T) को भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और लार्सेन एंड टुब्रो (L&T) मिलकर बनाया है. यह 155 मिलीमीटर की सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी है. इसके गोले की रेंज 18 से 54 किमी तक है. मतलब इतनी दूर बैठा दुश्मन बच नहीं सकता. इसमें 48 गोले स्टोर होते हैं. ऑपरेशनल रेंज 360 KM और अधिकतम गति 67 KM प्रतिघंटा है.
धनुष हॉवित्जर तोप (Dhanush Howitzer)
155 mm कैलिबर की हॉवित्जर धनुष को साल 2019 में भारतीय सेना में शामिल किया गया है. यह बोफोर्स तोप का स्वदेशी वर्जन है. फिलहाल सेना के पास 12 धनुष है. 114 का ऑर्डर है. इसे चलाने के लिए 6 से 8 क्रू की जरूरत होती है. इसके गोले की रेंज 38 किलोमीटर है. बर्स्ट मोड में 15 सेकेंड में तीन राउंड, इंटेंस मोड में 15 राउंड और संस्टेंड मोड में 60 राउंड. यानी जैसी जरुरत हो वैसा हमला करने में सक्षम.
एम-777 हॉवित्जर (M-777 Howitzer)
अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारतीय सेना ने M-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर को तैनात कर दिया है. इन तोपों को आसानी से कहीं भी पहुंचाया जा सकता है. LAC पर पर्याप्त मात्रा में इन तोपों की तैनाती की गई है. कुछ महीने पहले एक सैन्य अधिकारी ने कहा था कि हम अब चीन से लोहा लेने के लिए ज्यादा अच्छी स्थिति में हैं. भारतीय सेना के पास 110 हॉवित्जर हैं. 145 और तोपों का ऑर्डर दिया गया है. इसे चलाने के लिए 8 लोग लगते हैं. यह एक मिनट में 7 गोले दागता है. गोले की रेंज 24 से 40 किमी है. इसका गोला करीब एक KM प्रति सेकेंड की गति से चलता है.
एलसीएच प्रचंड (LCH Prachand)
अपनी कैटेगरी में हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड दुनिया का सबसे बेहतरीन हेलिकॉप्टर है. इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता हिमालय पर मौजूद चीन सीमाओं की निगरानी में होगी. लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल वहां किया जाता है जहां पर फाइटर जेट्स की जरुरत नहीं होती. ये अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकता है. वहां पर हमला कर सकता है. सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए ये हेलिकॉप्टर ज्यादा उपयुक्त होते हैं.
15.5 फीट ऊंचे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी LCH की की लंबाई 51.10 फीट है. इसे दो पायलट उड़ाते हैं. 550 KM किलोमीटर की कॉम्बैट रेंज में 268 किमी/घंटा की गति से उड़ता है. यह 16,400 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. दुनिया में इस तरह का कोई हेलिकॉप्टर नहीं है, जो इतनी ऊंचाई पर हिमालय में उड़ सके. इसका कॉकपिट ग्लास से बना है. साथ ही बॉडी फ्रेम कंपोजिट है. यानी इस पर सामान्य असॉल्ट राइफलों की गोलियों का भी असर नहीं होगा. न ही इसके रोटर यानी ब्लेड्स पर.
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इसकी चोंच यानी कॉकपिट के ठीक नीचे 20 mm की तोप है. हेलिकॉप्टर में चार हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार एक जैसे या अलग-अलग प्रकार के हथियार लगाए जा सकते हैं. जैसे - चार 12 FZ275 लेजर गाइडेड रॉकेट्स या हवा से हवा में मार करने वाली चार Mistral मिसाइलें. चार ध्रुवास्त्र एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें. या चार क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम, ग्रेनेड लॉन्चर लगाया जा सकता है. या फिर इन सबका मिश्रण सेट कर सकते हैं.
आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant)
बराक-ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से लैस भारत का सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट करियर. अगर इसे चीन की सीमा से लगे समुद्र के आसपास तैनात कर दिया जाए तो चीन एक कदम पीछे तो जरूर हटेगा. वो तनाव में आ जाएगा. इस पर 32 बराक-8 मिसाइलें लगी हैं. 76 मिलिमीटर के चार ओटोब्रेडा कैनन लगे हैं. यानी वह तोप जो चारों तरफ घूमकर दुश्मन के विमान, हेलिकॉप्टर, फाइटर जेट, वॉरशिप या बोट पर हमला कर सकती है. यह एक मिनट में 120 राउंड फायर करती है. रेंज 20 किलोमीटर तक होती है. चार एके 630 सीआईडब्ल्यूएस (AK 630 CIWS) लगे हैं. यह एक क्लोज़-इन वेपन सिस्टम है. यानी टारगेट जिधर जाता है, उधर ही घूमकर ताबड़तोड़ फायरिंग करती है. इसे चलाने के लिए सिर्फ एक आदमी लगता है. फायरिंग रेंज 4000 राउंड्स प्रति मिनट से लेकर 10 हजार राउंड्स प्रति मिनट है. इसकी रेंज 4000 से 5000 मीटर है.
आईएसी विक्रांत पर भारत के सबसे तेज और खतरनाक फाइटर जेट्स में से एक मिग-29 मिकोयान (MiG-29 Mikoyan) को तैनात है. सिर्फ एक पायलट से उड़ने वाला यह फाइटर जेट चुटकियों में दुश्मन के छक्के छुड़ा देता है. अधिकतम 2400 KM/घंटा की गति से उड़ सकता है. इसकी रेंज 2100 किलोमीटर है. इसमें 7 हार्डप्वाइंट्स हैं.
एमएच 60आर मल्टी रोल हेलिकॉप्टर (MH 60R Multi-Role Helicopter) भी तैनात हैं. इसमें 9-10 लोग बैठते हैं. इसकी रेंज 830 KM है. अधिकतम 12 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसकी स्पीड 270 किमी प्रतिघंटा है. जरुरत पड़ने पर 330 किमी प्रतिघंटा पर भी उड़ सकता है. इस पर दो MK 46, MK 50 या MK 54s टॉरपीडो लग सकते हैं. 4 से 8 AGM-114 हेलफायर मिसाइल लग सकती है. असल में यह एक एंटी-सबमरीन हेलिकॉप्टर है. इंडियन नेवी उनका उपयोग हिंद और अरब महासागर में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए करेगी.
इस पर कामोव हेलिकॉप्टर्स (Kamov Helicopters) तैनात हैं. इसे तीन लोग उड़ाते हैं. यह 16 जवान या 4000 KG वजन लेकर उड़ सकता है. अधिकतम गति 270 KM प्रतिघंटा है. रेंज 980 किमी है. इसमें टॉरपीडो, मशीन गन, 30 मिमी की कैनन या फिर बम, रॉकेट, गनपॉड्स या म्यूनिशन डिस्पेंसर्स लग सकते हैं. भविष्य में आने वाले IAC के रिपीट वर्जन पर राफेल, एफ-18 सुपर हॉर्नेट या कोई एलसीए तैनात हो सकता है.
आईएनस चक्र परमाणु पनडुब्बी (INS Chakra Nuclear Submarine)
सोवियत समय की अकूला क्लास परमाणु पनडुब्बी भारतीय नौसेना की ताकत है. 110.3 मीटर लंबी इस पनडुब्बी की गति 19 किलोमीटर प्रतिघंटा सतह पर होती है. पानी के अंदर यह अधिकतम 65 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चल सकती है. यह अधिकतम 600 मीटर की गहराई तक जा सकती है. इसमें 28 टॉरपीडो लगे होते हैं. इसके अलावा तीन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी तैनात होती हैं. फिलहाल इसमें केएच-55 ग्रनत क्रूज मिसाइल, श्कवाल सुपर कैप्टिवेटिंग टॉरपीडोस तैनात है. अगर युद्ध की स्थिति आती है तो यह पनडुब्बी चीन की पनडुब्बियों, जंगी जहाजों आदि को नष्ट कर सकती है.
आईएनएस विक्रमादित्य (INS Vikramaditya)
भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य दुनिया के 10 सबसे बड़े एयरक्राफ्ट करियर्स में शामिल है. यह 283.5 मीटर लंबा है. इसकी बीम 61 मीटर की है. यह एक कीव-क्लास का मॉडिफाइड एयरक्राफ्ट करियर है. जो भारतीय नौसेना में साल 2013 में शामिल किया गया था. इससे पहले यह सोवियत नौसेना और फिर रूसी नौसेना के लिए सेवाएं दे चुका है. इसका डिस्प्लेसमेंट 45,400 टन है. इस पोत पर 36 लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं. जिसमें 26 मिकोयान MiG-29K मल्टी रोल फाइटर्स और Kamov Ka-31 AEW&C और Kamov Ka-28 ASW हेलिकॉप्टर्स शामिल हैं.