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खुदाई में मिली 2000 हजार साल पुरानी कंघी, इंसानों की खोपड़ी से बनाई गई थी!

एक 2000 साल पुरानी कंघी मिली है, जिसे इंसानी खोपड़ी से बनाया गया है. यानी लकड़ी, धातु या प्लास्टिक की कंघी नहीं. बल्कि इंसानी खोपड़ी को काटकर कंघी में बदल दिया गया है. वैज्ञानिक अब ये पता कर रहे हैं कि क्या इससे बाल संवारा जाता था, या फिर इसे किसी और काम में इस्तेमाल किया जाता था.

ये है उस कंघी का हिस्सा जो इंसानों की खोपड़ी से बनाई गई थी. (फोटोः MOLA) ये है उस कंघी का हिस्सा जो इंसानों की खोपड़ी से बनाई गई थी. (फोटोः MOLA)
aajtak.in
  • लंदन,
  • 03 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

आमतौर पर प्राचीन कंघियां लकड़ी या धातु की होती थीं. लेकिन अब पुरातत्वविदों को एक ऐसी कंघी मिली है जिसके बारे में आप जानकर हैरान हो जाएंगे. इस कंघी को इंसान की खोपड़ी से बनाया गया था. यह प्राचीन कंघी 2000 साल पुरानी है. इसे इंग्लैंड के कैंब्रिजशायर में मौजूद बार हिल गांव में खोजा गया. 

बार हिल गांव में तीन साल से खनन चल रहा था, जो 2018 में खत्म हुआ. कई पुरातन वस्तुएं मिलीं. ये करीब 750 बीसी से एडी 43 तक की हैं. यानी लौह युग (Iron Age) जिस कंघी का बात हो रही है वो 2 इंच लंबी है, इसमें करीब एक दर्जन दांत हैं. इसे म्यूजियम ऑफ लंदन आर्कियोलॉजी (MOLA) में रखा गया है. पुरातत्वविदों ने इसे बार हिल कॉम्ब नाम दिया है. 

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ये है उस कंघी के टूटे हुए हिस्से का इल्सट्रेशन. (फोटोः MOLA)

बार हिल गांव में हुई खनन से करीब 2.80 लाख प्राचीन वस्तुएं मिली हैं. जिनकी अब भी जांच चल रही है. फिलहाल इस कंघी के इस्तेमाल को लेकर आर्कियोलॉजिस्ट पुख्ता नहीं हैं. इसका इस्तेमाल बाल संवारने के लिए होता था. सजावट के मकसद से होता था. या फिर इसे ताबीज की तरह पहनते थे. क्योंकि इस कंघी के बीच में एक गोल छेद भी है. 

समाज में जरूरी स्थान था इस कंघी का

इस कंघी को देख कर पुरातत्वविदों ने अंदाजा लगाया है कि लौह युग के लोग किस तरह से इंसानी शरीर के अवशेषों का इस्तेमाल करते थे. इनमें कुछ परंपराएं भी हो सकती हैं. प्राचीन वस्तुओं के जानकार माइकल मार्शल कहते हैं कि बार हिल कंघी से लगता है कि उसका लौह युग में कितना महत्वपूर्ण स्थान था. यह स्थानीय समुदायों के बीच ताकतवर वस्तु मानी जाती रही होगी. 

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इससे पहले भी दो बार मिली हैं ऐसी चीज

माइकल ने कहा कि इन कंघियों की वजह से लोग अपने दिवंगत लोगों को याद करते होंगे. या फिर इसे बुरी आत्माओं से बचाने के लिए ताबीज की तरह सर पर सजाते होंगे. ये भी हो सकता है कि इससे बाल सवांरते हों. कैंब्रिजशायर से दो और इसी तरह की वस्तुएं मिली थीं. 1970 में और 2000 में. दोनों कंघी जैसी ही दिखती थीं. 

लौह युग के परंपराओं को समझना आसान नहीं है. माइकल कहते हैं सभी पुरातत्वविद पुराने वस्तुओं की जांच करने के बाद यह अंदाजा लगाते हैं कि इनका किस तरह से इस्तेमाल होता रहा होगा. 

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