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Glacial Lake Outburst: भारत के हिमालय में 28 हजार से ज्यादा ग्लेशियल लेक, सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियां किसी भी समय बरपा सकती हैं कहर

भारत के हिमालय में 28043 ग्लेशियल लेक्स हैं, जिनसे गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र बेसिन में किसी भी समय आपदा आ सकती है. सरकार ने इनका नक्शा बनवाया है. लगातार नजर रखी जा रही है. सबसे ज्यादा मुसीबत ब्रह्मपुत्र बेसिन में आने की आशंका है. जानिए किस नदी के बेसिन में कितना खतरा मंडरा रहा है?

इस फोटो में बीच में नीचे की तरफ जो झील दिख रही है उसे ही ग्लेशियल लेक कहते हैं. इनके टूटने से ही बड़े फ्लैश फ्लड आते हैं. (सभी फोटोः NRSC) इस फोटो में बीच में नीचे की तरफ जो झील दिख रही है उसे ही ग्लेशियल लेक कहते हैं. इनके टूटने से ही बड़े फ्लैश फ्लड आते हैं. (सभी फोटोः NRSC)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST

भारत के हिस्से में आने वाले हिमालय में 28043 ग्लेशियल लेक्स (Glacial Lakes) हैं. ग्लेशियर से बनने वाली ये झीलें सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र की घाटी (Basin) में किसी भी समय तबाही मचा सकती हैं. भारत सरकार ने इन ग्लेशियरों का नक्शा बनवाया है. ये नक्शे नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने अपने सैटेलाइट्स से ली गई तस्वीरों की मदद से बनाए हैं. 

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कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत के हिमालय में 0.25 हेक्टेयर आकार के 28043 ग्लेशियल लेक्स हैं. 50 हेक्टेयर या उससे ज्यादा आकार के सभी ग्लेशियल लेक्स पर केंद्रीय जल आयोग नजर रखता है. उनकी मॉनिटरिंग करता है. गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु बेसिन में हिमालय से कई नदियां आती हैं. जिनका सोर्स ग्लेशियर ही है. 

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हिमालय पर पिछले साल सितंबर में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने स्विट्जरलैंड की मदद से सिक्किम में दो ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन लगाए थे. पहला साउथ लोनक ग्लेशियल लेक के पास. दूसरा शाको चो ग्लेशियर के पास. क्योंकि इन दोनों के किसी भी समय टूट कर गिरने का खतरा था. साउथ लोनक ग्लेशियल लेक टूटने की वजह से पिछले साल सिक्किम में बड़ी आपदा आई थी. 

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केदारनाथ, चमोली और सिक्किम जैसे हादसे होते हैं इन झीलों से

ऐसे ही ग्लेशियल लेक के टूटने से 2013 में केदारनाथ आपदा और 2021 में चमोली में हादसा हुआ था. सरकार ने कई जगहों पर ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन लगाने की तैयारी की है. लेकिन ये इतने खतरनाक जगहों पर हैं कि वहां तक टीम भेजना काफी मुश्किल और जोखिम भरा रहता है. वैज्ञानिक इन ग्लेशियल लेक्स पर सैटेलाइट से ही नजर रखते हैं. 

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यहां जो छोटे-छोटे बिंदु दिख रहे हैं, वो हिमालय पर मौजूद ग्लेशियल लेक्स हैं. 

तीनों नदियों के नीचे का पूरा कैचमेंट एरिया 9,89,784 वर्ग किलोमीटर है. यहां पर 45 मीटर से 8848 मीटर तक की ऊंचाई है. इस नक्शे में आपको हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, अन्य पूर्वोत्तर राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और लद्दाख देखने को मिलेंगे. इस पूरे इलाके में दस तरह के ग्लेशियल लेक्स मिले हैं. 

अगर आप इन 28043 ग्लेशियल लेक में जमा पानी स्प्रेड एरिया देखें तो यह 1.31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है. इनमें से 23,167 ग्लेशियल लेक्स 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल से कम हैं. जबकि, 4876 झीलें 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल से ज्यादा है. भारतीय हिमालय में सिर्फ 299 ग्लेशियल लेक्स 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल से ज्यादा हैं. 

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अब जानते हैं कि किस नदी की घाटी में कितने ग्लेशियल लेक हैं? 

सबसे ज्यादा ग्लेशियल लेक्स ब्रह्मपुत्र बेसिन में हैं. यहां कुल ग्लेशियल लेक्स का 64.19 फीसदी हिस्सा है. सिंधु घाटी में 19.02 फीसदी और गंगा बेसिन में 16.78 फीसदी ग्लेशियल लेक्स हैं. 50 हेक्टेयर से ज्यादा बड़े 299 ग्लेशियल लेक्स में 207 ब्रह्मपुत्र बेसिन में हैं. यहां पर ग्लेशियल इरोजन लेक्स भी सबसे ज्यादा हैं. 

इस कॉम्बो फोटो में आप अलग-अलग प्रकार के ग्लेशियल लेक्स को देख सकते हैं. 

भारत की सीमा में सिर्फ 7,570 ग्लेशियल लेक्स हैं. बाकी दूसरे देशों की सीमाओं में हैं. लेकिन ये सभी ग्लेशियल लेक्स भारत के लिए कभी भी आफत खड़ी कर सकते हैं. चाहे वह गंगा हो, सिंधु हो या फिर ब्रह्मपुत्र हो. क्योंकि ये ऊंचाई पर हैं, वहां अगर कोई हादसा होता है तो पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आएगा. जिससे नदियों में फ्लैश फ्लड आ सकता है. 

ब्रह्मपुत्र बेसिन... ठंडे पठारों से बंगाल की खाड़ी तक 

ब्रह्मपुत्र नदी बहुत ही ज्यादा विभिन्नता वाली जगहों से गुजरती है. शुरुआत तिब्बत के ठंडे पठारों से होती है. फिर बारिश वाले हिमालयी इलाके में आती है. इसके बाद असम की खेती वाली जमीनों से गुजरते हुए बांग्लादेश के बड़े डेल्टा वाले मैदान तक पहुंचती है. ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में यारलंग सांगपो कहते हैं. यह कैलाश रेंज में मौजूद Konggyu Tsho झील के दक्षिण से 5150 मीटर की ऊंचाई से निकलती है. ज्यादा ऊंचाई की वजह से उत्तरी इलाके में हमेशा बर्फ जमा रहती है. 

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ब्रह्मपुत्र नदी की लंबाई 2900 किलोमीटर है. जिसमें से सिर्फ 916 किलोमीटर का हिस्सा भारत के अंदर है. भारत के बाहर का जो हिस्सा है, वो पूरी तरह से बर्फ से ढंका रहता है. देश के अंदर वाली नदी अंत में जाकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है. इस नदी के ऊपर दर्जनों की संख्या में बांध बने हैं. बराज बने हैं. जिनकी मदद से इसके 3.99 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा के कैचमेंट एरिया में सिंचाई होती है. 

ब्रह्मपुत्र नदी के घाटी वाले इलाके में दिख रहे लाल-नीले बिंदु ग्लेशियल लेक्स हैं. 

ब्रह्मपुत्र घाटी में कई नदियां बहती हैं, जो ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती हैं. ये हैं- लोहित, दिबांग, सुबानसिरी, जियाभराली, धनसिरी, मनस, तोरसा, संकोश, तीस्ता, बूढ़ीढिहिंग, देसांग, दिखोव और कोपिली. ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी बेहद ज्यादा ठंडी रहती हैं. तिब्बत के इलाके में तो सूखी ठंड पड़ती है. असम में ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है. यहां साल भर में 400 मिलिमीटर बारिश होती है. 

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गंगा बेसिन... भारत के मैदानी इलाकों की ऊर्जास्रोत

गंगा बेसिन अपने आप में अलग हैं. यहां पर दुनिया की 8000 मीटर से ऊंची 14 चोटियों में से 9 आती हैं. गंगा रिवर बेसिन में ही माउंट एवरेस्ट आता है. बाकी कंचनजंगखा, ल्होत्से, मकालू, चो ओयू, धौलागिरी, मनासलू, अन्नपूर्णा और शीशापांगमा चोटियां हैं. यह बेसिन भारत, नेपाल, तिब्बत और बांग्लादेश के मध्य हिमालयन इलाके तक फैली है. यह नदी उत्तराखंड में 7010 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद गंगोत्री ग्लेशियर के समूह से निकलती है. वहां उसे भागीरथी कहते हैं. 

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ऋषिकेश तक आते-आते इसमें एक दर्जन से ज्यादा नदियां मिलती हैं. इसकी पूरी लंबाई 2525 किलोमीटर है. अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है. इसका डेल्टा वाला इलाका पश्चिम बंगाल के फरक्का बराज से शुरू माना जाता है. यहां से यह दो भागों में बंट जाती है. बांग्लादेश में इसे पद्मा कहते हैं. पश्चिम बंगाल में गंगा कहते हैं. इसके पास 2.47 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का कैचमेंट एरिया है. 

गंगा घाटी में गंगा के अलावा यमुना, शारदा, घाघरा, गंडक और कोसी जैसी विशालकाय और लंबी नदियां बहती हैं. गंगा नदी के बेसिन में ट्रॉपिकल मौसम रहता है. ऊंचाई वाले इलाके जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में तापमान कम रहता है. सर्दियों में यह जीरो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे तक चला जाता है. कम से कम 500 मिलिमीटर और अधिकतम 2200 मिलिमीटर बारिश होती है. तापमान 9 डिग्री सेल्सियस से 40 जिग्री सेल्सियस तक रहता है. 

सिंधु बेसिन... कैलाश से अरब सागर का लंबा रास्ता 

यह घाटी इसलिए अलग है क्योंकि यहां पर माउंट एवरेस्ट के बाद सात सबसे ऊंची चोटियां हैं. 8557 मीटर वाला K2, 8100 मीटर वाला नंगा पर्वत और 7800 मीटर वाला राकापोशी सबसे ऊंचे हैं. यह बेसिन पश्चिमी हिमालय और भारत, चीन और नेापल में फैले काराकोरम रेंज तक फैली है. इसका कैचमेंट एरिया 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है. इसकी कुल लंबाई 2880 किलोमीटर है. जिसमें से सिर्फ 709 किलोमीटर का इलाका भारत में पड़ता है. 

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सिंधु नदी माउंट कैलाश के उत्तरी स्लोप के पास मौजूद बोखर चू ग्लेशियर से निकलती है. ये इलाका तिब्बत में है. लद्दाख में यह सीधी और काफी ऊंचाई वाले इलाके से आती है. बहाव काफी तेज रहता है. सबसे खतरनाक और खूबसूरत गॉर्ज गिलगिट में बनता है. नीचे की तरफ यह नंगा पर्वत ग्लेशियर के बगल से निकलती है इसके बाद यह पाकिस्तान में चली जाती है. बाद में कराची के पास से होते हुए अरब सागर में जाकर मिल जाती है.  

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सिंधु घाटी में सतलुज, ब्यास, रावी, चेनाब, झेलम, जंस्कार, सेंगी सांगपो, श्योक और गिलगिट जैसी नदियां मिलती है. यहां पर मौसम सूखा और कम ह्यूमिडिटी वाला होता है. साल भर में 100 से 500 मिलिमीटर औसत बारिश होती है. लेकिन पहाड़ी स्लोप पर 2000 मिलिमीटर तक हो जाती है. तापमान 14 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. सर्दियों में यह 2 डिग्री से 23 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. 

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