
पृथ्वी से मात्र 138 प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसा ग्रह मिला है, जो धीरे-धीरे पानी वाले ग्रह में बदल रहा है. यानी ये बाहरी ग्रह (Exoplanet) भी धरती की तरह रहने योग्य हो सकता है. हालांकि इसे लेकर थोड़ा रहस्य बना हुआ है. ये पहले क्यों नहीं दिखा. यह धरती से 6.1 गुना ज्यादा वजनी है. इसका रेडियस धरती से 2.25 गुना ज्यादा है.
इस एक्सोप्लैनेट का नाम है HD-207496b. इसका वायुमंडल गैसों से भरा हुआ है. या फिर यहां पूरे ग्रह पर समुद्र है. या फिर दोनों का मिश्रण है. वैज्ञानिक इसकी जांच कर रहे हैं. लेकिन यह लगातार सिकुड़ रहा है, जैसा पृथ्वी के साथ करोड़ों साल पहले हुआ था. लेकिन यह ग्रह इतना बड़ा है कि अगर यह सिकुड़ कर शांत हुआ तो महा-पृथ्वी कहलाएगा.
अगर रहस्यमयी ग्रह के बारे में ज्यादा जानकारी मिलेगी तो वैज्ञानिक पृथ्वी से बड़े पथरीले ग्रह और नेपच्यून से छोटे गैसीय ग्रहों की पहेली सुलझा पाएंगे. लेकिन जब भी वैज्ञानिक इसकी तरफ नजदीक से देखते हैं. डेटा की स्टडी करते हैं, तो लगता है कि इसके पास गैसीय वायुमंडल है. साथ में बड़ा समुद्र भी. जो बाद में पानी में बदल जाएगा.
5300 से ज्यादा बाहरी ग्रहों की हो चुकी है खोज
दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने अब तक 5300 से ज्यादा बाहरी ग्रहों की खोज की है. ये सभी हमारे सौर मंडल से बाहर हैं. इन ग्रहों की स्टडी करके वैज्ञानिक प्लैनेटरी सिस्टम की जानकारी हासिल कर सकते हैं. कई ऐसे ग्रह भी मिले हैं, जो दिखते हैं धरती की तरह. उससे 100 दिन कम में अपने सूरज का चक्कर लगाते हैं. साथ ही पृथ्वी से डेढ़ से दोगुना बड़े हैं.
अगर इन ग्रहों के रेडियस में अंतर है, पर वो पथरीले हैं तो उनकी तुलना पृथ्वी, मंगल, शुक्र से की जाती है. इन्हें महा-पृथ्वी यानी सुपर अर्थ कहते हैं. लेकिन ग्रह अगर गैसीय है. उसका घना वायुमंडल है तो उसकी तुलना नेपच्यून से की जाती है. इन्हें मिनी-नेपच्यून कहते हैं. इन ग्रहों से इनके तारे यानी सूरज अपने रेडिएशन से इन ग्रहों के गैस को भाप बनाते रहते हैं.
भविष्य में पृथ्वी की तरह रहने लायक हो सकता है!
HD-207496b की खोज चिली स्थित यूरोपियन साउदर्न ऑब्जरवेटरी ने की है. बाद में इसे पुख्ता करने का काम नासा के TESS एक्सोप्लैनेट टेलिस्कोप को दिया गया. उसने भी इस बात की पुष्टि की ये ग्रह पृथ्वी की तरह ही बदल रहा है. धीरे-धीरे पानी वाले ग्रह में बदल रहा है. यानी भविष्य में इस ग्रह पर जाकर रहा जा सकता है. पर समय लगेगा.
TESS सुदूर अंतरिक्ष में मौजूद कम रोशनी वाले ग्रहों को खोज लेता है. जब उनकी रोशनी कम या ज्यादा होती है, तब टेलिस्कोप बारीक नजर रख लेता है. फिर उनकी कम या ज्यादा होती रोशनी के आधार पर स्टडी करता है. इसी से ग्रह के रेडियस और वजन की गणना की जाती है. हमारे सौर मंडल से बाहर कई विशालकाय तारे हैं. जो सूरज से भी बडे़ हैं.
हमारे 6.44 दिन के बराबर है इसका एक दिन
HD-207496b ग्रह अपने तारे यानी सूरज के चारों तरफ 6.44 दिन में एक चक्कर लगाता है. यानी इसका एक दिन हमारे हिसाब से करीब एक हफ्ता हो गया. रेडियस धरती से 2.25 गुना ज्यादा है. यानी इसका वजन पृथ्वी से 6.1 गुना ज्यादा है. ग्रह का घनत्व 3.27 ग्राम प्रति क्यूबिक सेंटीमीटर है. जबकि पृथ्वी का 5.51 ग्राम प्रति क्यूबिक सेंटीमीटर. यानी इस ग्रह का घनत्व पृथ्वी से फिलहाल कम है. यानी इस पर पत्थर और गैस दोनों मौजूद हैं.
नीचे पथरीली दुनिया और ऊपर गैसीय वायुमंडल है. यानी इस ग्रह पर पानी या गैसीय वायुमंडल या फिर दोनों का मिश्रण है. जो कि भविष्ट में जीवन के लिए जरूरी है. यह हमारी धरती की तुलना में बेहद युवा ग्रह है. इसकी उम्र 52 करोड़ साल है. भविष्य में यह बाहरी ग्रह क्या दूसरी पृथ्वी बन पाएगा, फिलहाल इसकी स्टडी चल रही है. इसके बारे में स्टडी हाल ही में arXiv में प्रकाशित हुई है.