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अंतरिक्ष में तारों को घुमा रही है इंटेलिजेंट एलियन सभ्यता, स्टडी में दावा

एक हैरतअंगेज स्टडी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि अंतरिक्ष में जो तारे तेज गति से चल रहे हैं, उन्हें इंटेलिजेंट एलियन सभ्यता चला रही है. एलियन सभ्यता ने अपने ग्रह को तेज गति में चलने वाले यान में बदल दिया है. ताकि एक गैलेक्सी से दूसरी गैलेक्सी में जाने में किसी तरह की दिक्कत न हो. नए स्पेसक्राफ्ट न बनाने पड़े.

ब्रसेल्स के एक वैज्ञानिक ने यह दावा किया है अंतरिक्ष में तेज गति से चलने वाले तारों के पीछे एलियंस का हाथ है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी) ब्रसेल्स के एक वैज्ञानिक ने यह दावा किया है अंतरिक्ष में तेज गति से चलने वाले तारों के पीछे एलियंस का हाथ है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:31 PM IST

अंतरिक्ष में जो तारे या ग्रह तेजी से आते-जाते दिख रहे हैं, उन्हें इंटेलिजेंट एलियन सभ्यता चला रही है. यानी उनके पायलट एलियन हैं. ये दावा किया गया है एक नई स्टडी में. जिसमें यह भी कहा गया है कि इन एलियंस ने अपने तारों और ग्रहों को ही स्पेसक्राफ्ट में बदल दिया है. ताकि अलग एलियनशिप न बनानी पड़े. 

स्टडी के मुताबिक जहां जाना हो, अपने ग्रह को ही लेते चलो. लेकिन इस तरह के स्टार सिस्टम कुछ ही हैं. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ये बेहद एडवांस एलियन सभ्यताएं हैं जो आकाशगंगाओं के बीच यात्रा करती है. इसके लिए वो अपने बाइनरी स्टार सिस्टम को ट्रैवल कराती हैं. यानी उनके ग्रह और उसके तारे को. 

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 वैज्ञानिकों का मानना है कि जो सभ्यताएं अंतरिक्ष में बहुत समय से हैं, उन्हें ये प्रेरणा बहुत पहले मिल गई होगी कि उन्हें गैलेक्सियों के बीच यात्रा करनी चाहिए. या वो किसी फट रहे सुपरनोवा से बचने के लिए निकले होंगे. या फिर प्राकृतिक स्रोतों की खोज में निकले होंगे. लेकिन दिक्कत है अंतरिक्ष में दूरी को लेकर. 

तारे के साथ अपने ग्रह को भी घूमा रहे एलियन

तारों के बीच में... आकाशगंगाओं के बीच यात्रा करने में काफी ज्यादा दूरी होती है. अधिक समय लगता है. अपना सिस्टम छोड़कर दूसरे सिस्टम में जाने के बजाय एलियन सभ्यताओं ने अपने सिस्टम को ही एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का सिस्टम डेवलप कर लिया. वो अपने तारे और ग्रह को अपने साथ लेकर घूम रहे हैं.  

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बिना किसी आर्टिफिशियल सपोर्ट के यात्रा

अंतरिक्ष विज्ञानियों ने जांच की तो पता चला कि जो तारे हाइपरवेलोसिटी में चलते हैं. यानी बेहद तेज गति में उन्हें जानबूझकर एलियन सभ्यताएं धकेल रही हैं. जिसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल सपोर्ट नहीं है. इसलिए यह मामला और भी जटिल और गूढ़ हो जाता है. 

चुंबकीय क्षेत्र को बनाया जा रहा है ईंधन

नई स्टडी Vrije University के फिलॉस्फर क्लेमेंट विडाल ने की है. ये यूनिवर्सिटी बेल्जियम के ब्रसेल्स में है. इस स्टडी को अब तक पीयर-रिव्यू नहीं किया गया है. उन्होंने एक मॉडल सिस्टम बनाया, जिसमें कम मास का न्यूट्रॉन स्टार अपने तारे के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है. इस मॉडल से यह कॉन्सेप्ट आया कि तारों की यात्रा हो सकती है. ये यात्रा चुंबकीय क्षेत्र का लाभ उठाते हुए पूरी हो रही है. 

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