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अंडमान की शार्क, हिमालय का फूल, कर्नाटक के डांसिंग मेंढक समेत 29 जीव IUCN रेड लिस्ट में शामिल

भारत के जीव-जंतुओं की 29 प्रजातियां IUCN की नई रेड लिस्ट में शामिल की गई है. इनमें सफेद गले वाला डांसिंग मेंढक, अंडमान स्मूथहाउंड शार्क और हिमालयल फ्रिटिलरी फूल भी है. इन खूबसूरत जीव-जंतुओं की प्रजाति कई वजहों से खत्म होने की कगार पर हैं. लेकिन मुख्य वजह हैं- प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और बीमारियां.

भारत के इन तीनों जीवों समेत 29 प्रजातियां IUCN की रेड लिस्ट में शामिल की गई हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी/सोशल मीडिया) भारत के इन तीनों जीवों समेत 29 प्रजातियां IUCN की रेड लिस्ट में शामिल की गई हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी/सोशल मीडिया)
aajtak.in
  • मॉन्ट्रियल,
  • 11 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

भारत में मौजूद जीव-जंतुओं की 29 प्रजातियां खतरे में आ गई हैं. इनका नाम इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) की Red List में शामिल कर दिया गया है. इसमें तीन जीवों पर सबसे ज्यादा खतरा है.  ये हैं- व्हाइट चीक्ड डांसिंग फ्रॉग (White-cheeked dancing frog), अंडमान स्मूथहाउंड शार्क (Andaman smoothhound shark) और यलो हिमालयन फ्रिटिलरी (Yellow Himalayan Fritillary). 

इन जीव-जंतुओं के खत्म होनवे की बड़ी वजह है अवैध शिकार, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और बीमारियां. IUCN की रेड लिस्ट दुनिया के बायोडायवर्सिटी की सेहत के बारे में बताता है. यह भी बताता है कि धरती पर मौजूद कौन से जीव-जंतु ऐसे हैं, जिनकी प्रजातियां खतरे में हैं. या फिर वो खत्म होने वाले हैं. इस संस्था में दुनिया भर के 15 हजार से ज्यादा साइंटिस्ट जुड़े हुए हैं. इन लोगों ने भारत में पौधों, जानवर और फंगस के 9472 प्रजातियों मे से 1355 प्रजातियों को खतरे में पाया है. इनमें से कुछ विलुप्त होने वाले हैं, कुछ एकदम कगार पर हैं. कुछ पर गंभीर खतरा है. 

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इस साल भारत में 239 प्रजातियों के जीव-जंतुओं की जांच की गई. जिनमें से 29 जीव-जंतुओं की प्रजातियों को खतरे में बताया गया है. IUCN के डायरेक्टर ब्रूनो ओबेर्ल ने बताया कि इंसानी गतिविधियों की वजह से जीव-जंतुओं की हालत खराब हो रही है. ये लगातार कम होते जा रहे हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो धरती से कई जीव-जंतु खत्म हो जाएंगे. असल में 7 से 19 दिसंबर तक कनाडा के मॉन्ट्रियल में IUCN के 196 सदस्य शामिल हुए हैं. इनमें भारत के भी सदस्य हैं. 

ये सभी वैज्ञानिक मिलकर बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क बना रहे हैं. साथ ही एक लैंडमार्क एग्रीमेंट करने वाले हैं ताकि प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोका जा सके. प्रजातियों के बचाया जा सके. ब्रूनो ने बताया कि हमें तत्काल बायोडायवर्सिटी और जलवायु के संबंधों को सुधारने का प्रयास करना होगा. नहीं तो धरती से जीव-जंतु कुछ सालों में खत्म हो जाएंगे. कर्नाटक के पश्चिमी घाट में पाया जाने वाला व्हाइट-चीक्ड डांसिंग फ्रॉग अब 167 वर्ग किलोमीटर में बड़ी मुश्किल से खोजने पर मिलता है. यह सबसे नया जीव है जो इस लिस्ट में शामिल हुआ है. 

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इस मेंढक की प्रजाति इसलिए खत्म हो रही है क्योंकि जंगलों को नट और कॉफी की खेती के लिए काटा जा रहा है. इससे उसके रहने का स्थान खत्म हो गया. जीजीएस इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट डॉ. सुमित डूकिया कहते हैं कि 30 फीसदी डांसिंग फ्रॉग्स की प्रजाति खतरे में है लेकिन सरकार इनके संरक्षण को लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है. प्रदूषण, बीमारियां, घुसपैठिया प्रजातियों के आने से, तापमान से ये जीव खत्म हो रहे हैं. 

अंडमान स्मूथहाउंड शार्क (Andaman Smoothhound Shark) भी खतरे मे हैं. ये शार्क अंडमान सागर, पूर्वी हिंद महासागर, म्यांमार, थाईलैंड, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास मिलती है. ये जिस गहराई में रहती है, उसी गहराई में सबसे ज्यादा मछली पकड़ी जाती है. इसकी प्रजाति तेजी से खत्म हो रही है. यह छोटी शार्क है, जिसकी खोज ही पिछले साल हुई थी. तब इसे अंडमान स्मूथहाउंड फिश नाम दिया गया था. इसे बहुत ज्यादा पकड़ा जा रहा है, इसिलए इसकी प्रजाति को खतरा बढ़ गया है. 

यलो हिमालयन फ्रिटिलरी (Yellow Himalayan Fritillary) बेहद खूबसूरत फूल होता है. यह भी खतरे में है. यह इसलिए खतरे में आया है क्योंकि इसकी खेती सही तरीके से नहीं की जा रही है. इन तीनों के अलावा कई अन्य जीव-जंतु इस लिस्ट में डाले गए हैं. अब इस रेड लिस्ट में 150,388 प्रजातियां शामिल हैं. जिसमें से 42,108 पर खत्म होने खतरा है. 17903 प्रजातियों में 1550 से ज्यादा समुद्री जीव और पेड़-पौधे जल्द खत्म होने वाले हैं. जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर समुद्री जीवों पर पड़ रहा है. इस लिस्ट में 41 फीसदी जीव समुद्री हैं. 

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