
26 मार्च 2024 की अलसुबह अमेरिका के बाल्टीमोर में डाली (Dali) नाम के विशालकाय कार्गो शिप ने फ्रांसिस स्कॉट की ब्रिज (Francis Scott Key Bridge) को टक्कर मार दी. लोहे का आर्क ब्रिज ताश के पत्तों की तरह गिर गया. इसे लेकर बड़े कार्गो जहाजों को चलाने वाले वेटरन शिप ऑफिसर कैप्टन एलन पोस्ट ने कई वजहें बताईं. बताया कि बंदरगाह पर कैसे जहाज को लाया और निकाला जाता है?
कैप्टन एलन पोस्ट ने कहा कि अच्छी बात ये थी कि हादसा रात में हुआ. इस समय बंदरगाह और उसके आसपास यातायात और लोग कम रहते हैं. दिन में यह हादसा होता तो ज्यादा लोग मरते या घायल होते. आमतौर पर बंदरगाह के शिप पायलट आसपास के बड़े जहाजों के मास्टर या कैप्टन को सुरक्षित निकलने का रास्ता बताते हैं.
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बंदरगाह या प्रशासन के लोग जहाज को सुरक्षित निकलने का सही तरीका गाइड करते हैं. क्योंकि उन्हें लोकल चीजों की जानकारी होती है. जबकि बाहर से आने वाले जहाज के साथ ऐसा नहीं है. उसके कैप्टन को भी नहीं पता होता कि कौन सी दिक्कत, कहां और किस तरह से आएगी?
बंदरगाह के शिप पायलट और जहाज के कैप्टन में कॉर्डिनेशन जरूरी
आमतौर पर इतने बड़े जहाज के कैप्टन क्लोज-क्वार्टर मैन्यूवरिंग में एक्सपर्ट होते हैं. यानी टगबोट्स के साथ सामंजस्य और डॉकिंग जैसे काम. साथ ही सही बर्थ पर जहाज को खड़ा करना. पायलट जहाज के मास्टर यानी कैप्टन को सलाह देते हैं कि किस तरह से ऐसे हादसों से बचा जा सकता है. ताकि सुरक्षित तरीके से नदी या ऐसे रास्तों को पार किया जा सके.
समंदर में जाने से पहले जहाज बाल्टीमोर ब्रिज की तरफ बढ़ता है. यानी वह बंदरगाह से निकल कर समंदर की तरफ जा रहा होता है. यही समय होता है जब बंदरगाह प्रशासन, पायलट और जहाज का मास्टर एकदूसरे से विदाई लेते हैं. इसके बाद जहाज को इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डेटा इन्फॉर्मेशन सिस्टम के साथ जोड़ दिया जाता है. मास्टर पायलटों को यह बताता है कि हम किधर जा रहे हैं.
जहाज की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई बतानी होती है ब्रिज पार करने से पहले
इस जहाज का स्पेसिफिकेशन क्या है. ब्रिज पर कौन-कौन है. बातचीत के लिए उनकी पहली भाषा क्या होगी. जहाज की ऊंचाई, गहराई, चौड़ाई बताई जाती है. ताकि ब्रिज पार करते समय बंदरगाह प्रशासन को दिक्कत न हो. सुरक्षित तरीके से जहाज ब्रिज के नीचे से निकल सके. इसके बाद पायलट जहाज के कैप्टन को निर्देश देना शुरू करता है.
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पायलट बताता है कि कहां जहाज लगाना है. कहां से हटाना है. किधर और किस तरफ कैसे लेकर जाना है. ये निर्देश जहाज के मूवमेंट के हिसाब से बदलते रहते हैं. अगर पायलट को लगता है कि स्थितियां सही नहीं हैं, तो वह बीच में ही जहाज को रोकने का निर्देश देता है. ताकि ब्रिज को पार करते समय किसी तरह का नुकसान न हो.
बंदरगाह के सभी टगबोट्स, अन्य जहाज, कोस्ट गार्ड किए जाते हैं सूचित
इस दौरान शिप पायलट कोस्ट गार्ड वेसल ट्रैफिक सर्विस और इलाके में मौजूद अन्य जहाजों से संपर्क साधता है. टगबोट्स के साथ बातचीत करता है. लाइन हैंडलर्स को सचेत किया जाता है. ताकि वो जहाज को सुरक्षित निकाल सकें. उसे सही जगह पहुंचा सकें.
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एलन पोस्ट ने बताया कि यह 1000 फीट लंबा जहाज है. जो आजकल सामान्य बात है. इससे बहुत बड़े जहाज भी होते हैं. किसी भी बंदरगाह पर जब बाहरी जहाज आता है. तो जरूरी नहीं कि उसके कैप्टन को उस जगह के बारे में सबकुछ पता हो. इसलिए उसे गाइड करने के लिए स्थानीय बंदरगाह पर शिप पायलट तैनात होते हैं.
इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की वजह से हुआ होगा यह हादसा
शिप पायलट आमतौर पर स्थानीय मछुआरों के एसोसिएशन से चुने जाते हैं. उन्हें कम से कम 10 साल का अनुभव होता है. न्यूयॉर्क हार्बर में सैंडी हुक पायलट्स एसोसिएशन 300 वर्षों से जहाजों को गाइड कर रहा है. उसी के शिप पायलट तैनात होते हैं. वहीं सभी जहाजों को सही दिशा, गति, अवरोध आदि बताते हैं.
एलन पोस्ट कहते हैं कि कैप्टन, पायलट और अन्य क्रू के लिए यह हादसा किसी बुरे सपने जैसा ही रहा होगा. ऐसा लगता है कि जहाज में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट हुआ है, जिसकी वजह से नियंत्रण खो गया. वो उसे टक्कर होने से रोक नहीं पाए. लेकिन जहाज के क्रू ने पहले ही बंदरगाह प्रशासन को चेतावनी दे दी थी.