
साल 2008 में जब फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप (Fermi Gamma-Ray Space Telescope) ने पृथ्वी की निचली कक्षा (Low-Earth orbit) में प्रवेश किया, तो उससे हाई एनर्जी रेडिएशन (High-energy radiation) की पूरी दुनिया नजर आई. इसकी खास खोजों में से एक थे फर्मी बबल्स (Fermi Bubbles). ये विशाल, एक जैसे बुलबुले हैं जो गैलेक्टिक प्लेन के ऊपर और नीचे फैले हुई हैं. ये आकाशगंगा (Milky Way) के केंद्र से, हर तरफ से 25,000 प्रकाश-वर्ष दूर है, जो गामा-रे की रोशनी में चमकता है.
2020 में भी eROSITA नाम के एक्स-रे टेलीस्कोप ने देखा कि इससे भी बड़े बुलबुले, गैलेक्टिक प्लेन के हर तरफ 45,000 प्रकाश-वर्ष से भी दूरी पर फैले हुए हैं, लेकिन ये पहले से कम ऊर्जा की एक्स-रे उत्सर्जित कर रहे थे. वैज्ञानिक तब इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बुलबुलों के दोनों सेट शायद गैलेक्टिक सेंटर और उसमें सुपरमैसिव ब्लैक होल से होने वाले किसी तरह के विस्फोट की वजह से हैं.
अब, सिमुलेशन का इस्तेमाल करते हुए, टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी युताका फुजिता (Yutaka Fujita) ने एक अलग स्पष्टीकरण दिया है. इनका मानना है कि एक शक्तिशाली और तेज़-गति वाली हवा से एक्स-रे उत्सर्जन होता है, जो इंटरस्टेलर स्पेस में फैल जाता है, जिससे शॉक वेव उत्पन्न होती है. यह प्लाज्मा के ज़रिए वापस आती है, और यह तेज ऊर्जा वाली चमक पैदा होती है.
सुपरमैसिव ब्लैक होल सैजिटेरियस A*(Sagittarius A*) मिल्की वे के केंद्र को शक्ति देता है. जहां तक ब्लैक होल की बात है तो यह काफी शांत है. इसकी फीडिंग एक्टिविटी न्यूनतम है और इसे 'quiescent' यानी 'शांत' कहा गया है. अभी Sagittarius A* भले ही शांत है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह हमेशा ऐसा ही रहा हो. पिछली गतिविधियों के अवशेष के तौर पर फर्मी बबल (Fermi bubbles) को गैलेक्टिक प्लेन के चारों ओर अंतरिक्ष में पाया जा सकता है. इन अवशेषों का अध्ययन करके हम समझ सकते हैं कि यह गतिविधि कब और कैसे हुई.
फर्मी बबल को लेकर फुजिता का तथ्य रिटायर हो चुके सुजाकू एक्स-रे सैटेलाइट (Suzaku X-ray satellite) के डेटा पर आधारित है, जिसे नासा और जापानी अंतरिक्ष एजेंसी मिलकर चलाते थे. उन्होंने बबल से जुड़ी एक्स-रे संरचनाओं की जांच की और ब्लैक होल फीडिंग प्रोसेस के आधार पर, रीप्रोड्यूस करने के लिए न्यूमेरिकल सिमुलेशन किए.
शोध में कहा गया है कि जांच नतीजों से न्यूमेरिकल सिमुलेशन के नतीजों की तुलना करके, हमें पता चलता है कि बुलबुलों को गैलेक्टिक सेंटर से आने वाली तेज हवा से बने हैं, क्योंकि यह एक मजबूत रिवर्स शॉक पैदा करता है. शोध को मंथली नोटिसिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित किया गया है.