
घास आमतौर पर जहरीली नहीं होती. लेकिन चारे के तौर पर सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल होता है. मवेशियों को इस भरपूर खिलाया जाता है. उनके लिए यह पोषक तत्व का काम करती है. लेकिन इंसानों के पाचन क्रिया में घास का न्यूट्रिशनल वैल्यू कम क्यों हो जाती है. क्यों घास जैसी हरी फसल को इंसान पचा नहीं पाता?
असल में घास में कई ऐसी उच्च सांद्रता (High Concentration) वाले पदार्थ होते हैं जिन्हें इंसान पचा नहीं सकते. घास में लिगनिन (Lignin), सेलुलोज (Cellulose) और ऑर्गैनिक पॉलीमर होते हैं, ये प्लांट की कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं. लिगनिन की वजह से पौधों को उनका मजबूत स्वरूप मिलता है. यह एक बेहद सख्त रासायनिक पदार्थ है, जिसे पचा पाना मुश्किल होता है. घास में यह सबसे ज्यादा पाया जाता है.
हालांकि कुछ सबूत ऐसे मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि हमारी आंतों में ऐसे बैक्टीरिया हैं, जो लिगनिन को तोड़ सकते हैं. लेकिन पूरी तरह से नहीं. क्योंकि ऐसे एंजाइम हमारे शरीर में मौजूद नहीं हैं जो घास को पूरी तरह से तोड़कर उन्हें पचाने लायक बना सकें. इंसान सेलुलोज़ को भी नहीं पचा सकता. यह पदार्थ भी आंतों में पूरी तरह से टूटती नहीं है. यह आंतों से होते हुए बाहर निकल जाती है. अपने असली रूप में. हां इसकी वजह से हमारे मल को एक आकार मिलता है.
क्यों घास नहीं पचा पाते इंसान?
हम जो फल और सब्जियां खाते हैं, उनमें भी सेलुलोज और लिगनिन होता है. लेकिन उनमें इनकी मात्रा बेहद कम होती है. इंसान इन्हें पचा सकता है. या यूं कहें कि अपने पाचन क्रिया में संतुलित कर सकता है. इसे ऐसे समझें, लॉन में उगने वाली घास में ज्यादातर पानी और लिगनिन होता है. लेकिन गाजर में यह 1 से 2 फीसदी ही होता है. यानी ये खाने योग्य फाइबर है, जिसे सेलुलोज कहते हैं. बाकी कार्बोहाइड्रेट होता है. इसलिए गाजर पच जाता है.
मवेशी घास को चबाते क्यों रहते हैं?
गाय, बकरी, भेड़, जिराफ आराम से घास को पचा लेते हैं. उनकी पाचन प्रक्रिया को रूमिनेशन (Rumination) कहते हैं. इन जीवों का पेट कई हिस्सों में बंटा होता है. ये सभी जीव घास को कई बार चबाते हैं. उन्हें निगलते हैं. जो हिस्सा नहीं निगला जाता, उसे फिर से चबाते हैं. फिर से निगलते हैं. इस पूरी प्रक्रिया को करते-करते घास पूरी तरह से पच जाती हैं. इसको करने से इन जीवों का पाचन सुधरता भी है. इतने चबाया हुआ घास जब इनके कई कंपार्टमेंट वाले पेट में जाता है, तो वह पच जाता है. इनके पेट में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो घास को पचा देते हैं.
पेट ही नहीं दांतों के लिए घास नुकसानदेह
इंसान और कई अन्य जीवों के पेट इतने जटिल नहीं होते, जितने गाय-भेड़-बकरी के होते हैं. घास आपके पेट में न तो पचती है, न सही होती है. यहां तक कि अगर आपने घास खाने की कोशिश की तो आपके दांत खराब हो सकते हैं. क्योंकि घास में सिलिका (Silica) की मात्रा ज्यादा होती है. यह आपके दांतों को गिरा सकती है. तो मुद्दा ये है कि आपको खाना ही है घास तो खा लीजिए... लेकिन आपका पेट खराब हो जाएगा. दांत खराब हो जाएंगे. आप कुपोषण के शिकार हो सकते हैं.
घास की कुछ प्रजातियां हैं, जो इंसान खा सकते हैं
ऐसा नहीं है कि इंसान घास नहीं खा सकते. घास की कुछ प्रजातियां हैं... जो इंसान खा सकते हैं. पचा सकते हैं. उनसे पोषण भी हासिल कर सकते हैं. जैसे- इंडियन राइस ग्रास, नटग्रास, ब्रिस्टल ग्रास, टिमोथी ग्रास, व्हीट ग्रास, बार्ले ग्रास, कैनरी ग्रास, क्रैब ग्रास, शोरगम और वाइल्ड ओट. इन घास को इंसान आसानी से खाकर पचा सकते हैं.