Advertisement

Chandrayaan 4 Lunar Exploration: जानें इसरो और जापानी स्पेस एजेंसी के उस मिशन के बारे में जिसे बता रहे हैं Chandrayaan-4

भारत का चंद्रयान-3 मिशन चल रहा है. उधर, Chandrayaan-4 की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. इस मिशन में भारत के साथ जापानी स्पेस एजेंसी भी काम करेगी. फिलहाल बेहद शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है. जापानी वैज्ञानिक इस साल इसरो दौरे पर भी आए थे. आइए जानते हैं इस मिशन के बारे में...

ये है भारत-जापान के लूपेक्स मिशन के लैंडर-रोवर की शुरुआती तस्वीर. (इलस्ट्रेशनः JAXA) ये है भारत-जापान के लूपेक्स मिशन के लैंडर-रोवर की शुरुआती तस्वीर. (इलस्ट्रेशनः JAXA)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST

भारत का महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-3 चंद्रमा की तरफ अपनी यात्रा पर है. इस बीच बात उठ रही है चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) मिशन की. ये कब शुरू होगा? भारत इसे अकेले करेगा या किसी देश के साथ मिलकर? तो आपको बता दें कि जापान के साथ मिलकर भारत एक मून मिशन करने जा रहा है, जिसका नाम है लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX). इसे लोग चंद्रयान-4 भी बुला रहे हैं. 

Advertisement

इस मिशन में इसरो और जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा (JAXA) चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जांच-पड़ताल करने के लिए लैंडर और रोवर उतारेंगे. उम्मीद है कि यह मिशन 2026-28 के बीच पूरा हो सकता है. फिलहाल यह मिशन कॉनसेप्ट और बातचीत के लेवल पर ही है. लेकिन इसे लेकर दोनों देशों के वैज्ञानिक काफी सकारात्मक हैं. भारत को इस मिशन के लिए लैंडर बनाना है. जबकि रोवर और रॉकेट जापान का होगा. 

ये भी पढ़ेंः चंद्रमा तक अपना रास्ता खुद कैसे खोजता है चंद्रयान...

चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के बाद इसरो चीफ डॉ. एस सोमनाथ से जब लूपेक्स मिशन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट की फाइनल रिपोर्ट अभी सबमिट करनी है. ताकि सरकार से क्लियरेंस मिल सके. लेकिन इससे पहले कुछ मुद्दों को सुलझाना है. जैसे लैंडर और रोवर का वजन बड़ा मुद्दा है. इस पर दोनों देशों के वैज्ञानिक मिलकर प्लानिंग कर रहे हैं, कि कैसे दोनों के वजन को कम किया जाए. 

Advertisement

चंद्रयान-4 मिशन में काफी ज्यादा चुनौतियां

डॉ. सोमनाथ ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर फिलहाल काफी विचार चल रहा है. दोनों देशों के वैज्ञानिक अपने-अपने आइडिया शेयर कर रहे हैं. अभी तक लूपेक्स मिशन का आर्किटेक्चर को अंतिम स्वरूप तय नहीं हुआ है. इस मिशन में काफी ज्यादा चुनौतियां हैं, जिसे सुलझाने का प्रयास जारी है. अगर इसरो इन लैंडर-रोवर को अंतरिक्ष में भेजता है, तो ये हमारे रॉकेट की क्षमता से ज्यादा वजनी है. पहले उसे कम करना जरूरी है. 

नए लैंडर-रोवर के लिए बनाना पड़ेगा नया इंजन

उन्होंने बताया कि लैंडर हमें बनाना है. जबकि रोवर जापानी स्पेस एजेंसी देगी. रोवर का वजन भी ज्यादा है. इससे पूरे लैंडर-रोवर मॉड्यूल का वजन बढ़ेगा. इसलिए हम चंद्रयान-3 वाले इंजन और रॉकेट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. हमें वजनी लैंडर-रोवर के लिए नया इंजन बनाना होगा. इसलिए दोनों देश अपनी तकनीकी क्षमताओं के अनुसार इसे सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं. फिलहाल इस मिशन पर कई स्तर पर काम चल रहा है. 

ये भी पढ़ेंः Chandrayaan-3: भारत तीसरी बार चंद्रमा पर क्यों जा रहा है

अप्रैल में आया था जापान से डेलिगेशन 

चंद्रयान-3 से मिलने वाली सीख से भारतीय वैज्ञानिक चंद्रयान-4 मिशन में काफी कुछ बदलाव करेंगे. इस साल अप्रैल में जापानी डेलिगेशन भारत आया था. जिसने चंद्रमा पर लैंडिंग साइट के बारे में इसरो से बातचीत की थी. आइडिया शेयर किए गए थे. साथ ही अन्य लैंडिंग लोकेशन को भी खोजा गया था. इसके अलावा रोवर, एंटीना, टेलीमेट्री और पूरे प्रोजेक्ट के एस्टीमेट पर भी चर्चा की गई थी. 

Advertisement

NASA भी हो सकता है मिशन में शामिल

माना जा रहा है कि इस पूरे मिशन का कुल वजन 6000 किलोग्राम होगा. जबकि पेलोड का वजन 350 किलोग्राम के आसपास होगा. साल 2019 में भारत और जापान ने लूपेक्स मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को भी शामिल करने की चर्चा की थी. अगर यह मिशन सफल होता है तो भारत-जापान मिलकर चंद्रमा की सतह पर 1.5 मीटर गहरा गड्ढा खोदकर वहां से मिट्टी का सैंपल लाएंगे. इसमें ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार (GPR) का इस्तेमाल भी हो सकता है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement