
Chandrayaan-2 के ऑर्बिटर का नया संदेश आया है. उसने लिखा है कि वह चंद्रयान-3 के लैंडर की जासूसी कर रहा है. असल में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने चंद्रयान-3 के लैंडर की ऊपर से तस्वीर ली है. दो तस्वीरों के कॉम्बीनेशन है. जिसमें बाईं तरफ वाली फोटो में जगह खाली है. दाहिनी फोटो में विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरा हुआ दिखता है.
दाहिनी तरफ वाली तस्वीर में लैंडर दिख रहा है, जिसे जूम करके इनसेट में भी दिखाया गया है. चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा (OHRC) लगा है. चांद के चारों तरफ इस समय जितने भी देशों के ऑर्बिटर घूम रहे हैं, उनमें सबसे बेहतरीन कैमरा चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगा है.
दोनों ही तस्वीरें लॉन्चिंग वाले दिन ली गई थीं. बाएं तरफ की पहली तस्वीर 23 अगस्त की दोपहर दो बजकर 28 मिनट पर ली गई थी, जिसमें चांद की सतह पर कोई लैंडर नहीं दिख रहा है. दूसरी तस्वीर 23 अगस्त की रात दस बजकर 17 मिनट पर ली गई थी. जिसमें विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरा हुआ दिख रहा है.
जब ऑर्बिटर ने तस्वीर ली, तब धरती पर रात थी
इससे कन्फ्यूज होने की जरुरत नहीं कि लैंडर की तस्वीर रात सवा दस बजे के आसपास की है. फिर फोटो कैसे आ गई. चांद पर जहां लैंडर उतरा है, वहां पर इस समय अगले 14-15 दिनों तक दिन रहेगा. इसलिए 23 अगस्त की शाम को लैंडिंग का समय चुना गया था. ताकि सूरज की रोशनी लगातार मिल सके. हमारे लिए धरती पर रात थी. पर वहीं तो अभी सूरज उगा ही है. अगले 14-15 दिनों तक उगा ही रहेगा.
इसरो ने जारी किया रोवर के बाहर आने का वीडियो
ISRO ने विक्रम लैंडर में से प्रज्ञान रोवर के निकलने का वीडियो भी जारी किया है. यह वीडियो बेहद शानदार है. आप यहां पर आप देख सकते हैं कि कैसे लैंडर के रैंप से उतरकर बाहर आ रहा है रोवर. रोवर के सोलर पैनल्स उठे हुए दिख रहे हैं. यानी वह सूरज से एनर्जी लेकर काम करना शुरू करेगा.
लैंडिंग से ठीक पहले का शानदार वीडियो भी जारी
इसके बाद इसरो ने लैंडिंग से ठीक पहले का वीडियो जारी किया. यह वीडियो लैंडर में लगे लैंडर इमेजर कैमरे से बनाया गया है. इस वीडियो में साफ पता चलता है कि कैसे लैंडर ने 30 किलोमीटर से नीचे आकर चांद की सतह पर लैंडिंग की है. सिर्फ यही नहीं यह भी दिखता है कि वह लैंडिंग के लिए उपयुक्त जगह खुद सेलेक्ट कर रहा है. ताकि सुरक्षित लैंडिंग कर सके.
लैंडर के चार में से तीन पेलोड्स किए गए ऑन
आपको बता दें कि इससे पहले इसरो ने ट्वीट करके बताया था कि चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर से संबंधित सभी काम सही से चल रहे हैं. दोनों की सेहत भी ठीक है. लैंडर मॉड्यूल के पेलोड्स इल्सा (ILSA), रंभा (RAMBHA) और चास्टे (ChaSTE) को ऑन कर दिया गया है. रोवर की मोबिलिटी ऑपरेशन शुरु हो चुकी है. इसके अलावा प्रोपल्शन मॉड्यूल पर लगा पेलोड SHAPE की ऑन किया जा चुका है.
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी है या नहीं?
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जमा हुआ पानी (Frozen Water) होने की संभावना है. ऐसा दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां और निजी कंपनियां मानती हैं. इसका मतलब ये है कि भविष्य में पानी वाली जगह के आसपास मून कॉलोनी बनाई जा सकती है. चांद पर खनन का काम शुरू हो सकता है. यहीं से मंगल ग्रह के लिए मिशन भेजे जा सकते हैं.
2008 में ब्राउन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बताया कि चांद पर मौजूद ज्वालामुखीय ग्लास के अंदर हाइड्रोजन फंसा मिला है. 2009 में Chandrayaan-1 में लगे नासा के एक यंत्र ने चांद की सतह पर पानी की खोज की. उसी साल नासा का प्रोब चांद के दक्षिणी ध्रुव से टकराया. उसने सतह के नीचे पानी होने की जानकारी दी.
नासा का 1998 में भेजा गया लूनर प्रॉसपेक्टर मिशन भी इस बात की पुष्टि कर चुका है कि दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ जमा है. खासतौर से उन गड्ढों में जहां पर सूरज की रोशनी कभी पड़ी ही नहीं. अगर चांद पर पानी की खोज होती है, तो इससे भविष्य में इंसान बस्ती बसा सकते हैं. पानी को तोड़कर ऑक्सीजन तैयार किया जा सकता है.
दक्षिणी ध्रुव पर जाना इतना कठिन क्यों है?
रूस बहुत तेजी से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के इलाके में लैंडिंग कराने जा रहा था. चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट से करीब 150 किलोमीटर दूर. लेकिन Luna-25 मिशन फेल हो गया. दक्षिणी ध्रुव का इलाका बेहद जटिल, खतरनाक है. यहां बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे हैं. चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक उतर गया लेकिन चंद्रयान-2 का लैंडर हार्ड लैंडिंग कर गया था. अभी अमेरिका और चीन दोनों ने दक्षिणी ध्रुव के लिए मिशन प्लान करके रखा हुआ है.