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China Climate Change: चीन की हालत खराब... भयानक भूकंप के बाद माइनस 40 डिग्री तापमान का कहर, 72 साल का रिकॉर्ड टूटा

China अभी भूकंप से उबरा भी नहीं था कि ठंड और बर्फबारी ने उसकी हालत खराब कर दी. चीन का उत्तरपूर्वी इलाका माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान से जूझ रहा है. 11 दिसंबर से अब तक 300 घंटे तापमान शून्य से नीचे रहा है. पूरे चीन को कंपकंपा देने वाली ठंडी हवा और बर्फ आर्कटिक से निकली हवा का नतीजा है.

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आजतक साइंस डेस्क
  • बीजिंग,
  • 25 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST

72 साल बाद चीन में दिसंबर महीने में तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गया है. 11 दिसंबर से अब तक 300 घंटे ऐसे रहे हैं, जब तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया. ये है चीन का उत्तर-पूर्वी इलाका जहां ये आफत आई है. बर्फीले तूफान आ रहे हैं. ये तूफान आर्कटिक की तरफ से बहने वाली ठंडी हवा की वजह से आ रहे हैं. 

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राजधानी बीजिंग में सब-जीरो तापमान का रिकॉर्ड 1951 के बाद टूटा है. चीन का उत्तरी और उत्तर-पूर्वी इलाका भयानक ठंड से जूझ रहा है. 1951 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतने ज्यादा घंटों तक तापमान जीरो के नीचे रहा हो. बीजिंग खुद 9 दिनों तक लगातार माइनस 10 डिग्री सेल्सियस के तापमान से जूझता रहा है. 

मध्य चीन के हेनान प्रांत और बीजिंग के दक्षिण-पश्चिम वाले इलाकों में गर्मी प्रदान करने वाली सिस्टम फेल हो गए हैं. जियाओजुओ शहर में थर्मल पावर सप्लायर ज्यादा डिमांड की वजह से बंद हो चुके हैं. जियाओजुओ वांगफांग एल्यूमिनियम मैन्यूफैक्चरिंग में हीटिंग बॉयलर्स हैं, जो इस समय खराब हो चुके हैं. अब वो गर्म पानी की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं. उन्हें ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है. 

इस हफ्ते के अंत तक राहत की उम्मीद

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हेनान प्रांत के पूयांग और पिंगडिशान शहरों में ही सरकारी विभागों और प्रशासनिक कार्यालयों में गर्मी पानी की सप्लाई रोक दी गई है. ताकि आम लोगों को ये सुविधा मिलती रहे. इन दोनों शहरों की भी हालत बहुत खराब है. भयानक सर्दी है. मौसम विभाग का मानना है कि चीन के इस इलाके को राहत तब मिलेगी, जब गर्म हवाएं उत्तर से दक्षिण की ओर बहेंगी. ऐसा इस हफ्ते के अंत तक होने की संभावना है.  

भूकंप से 1.45 लाख लोग विस्थापित

चीन के आधुनिक इतिहास का सबसे भयानक भूकंप हफ्ता भर पहले आया था. 6.2 तीव्रता के इस भूकंप की वजह से 149 लोगों की मौत हो गई. दो लोग लापता हैं. इस भूकंप की वजह से गांसू और किंगहाई प्रांत हिल गए हैं. इन प्रांतों में ज्यादातर Hui समुदाय के लोग रहते हैं. ये एक अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं. गांसू में 2 लाख से ज्यादा मकान गिरे हैं. 

15 हजार मकान गिरने की कगार पर हैं. गांसू से 1.45 लाख लोगों को विस्थापित करना पड़ा है. यहां पर 117 लोगों की मौत हुई. जबकि 781 लोग जख्मी हुए. किंगहाई में 32 लोग मारे गए. दो लापता हैं. प्रशासन का कहना है कि भूकंप की गहराई ज्यादा न होने की वजह से नुकसान ज्यादा हुआ है. क्योंकि इस इलाके में नरम सेडिमेंट्री पत्थर ज्यादा हैं. 

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इस वजह से आ रहे हैं चीन में भूकंप

ज्यादातर मकान लकड़ी और ईंटों के बने हैं. भूकंप के हिसाब से इन्हें बनाया नहीं गया था. इसलिए ये गिर गए. किंगहाई और तिब्बतन पठारों के नीचे टेक्टोनिक प्लेट्स की टक्कर से ऐसा भूकंप आते रहते हैं. जिसकी वजह से तिब्बत, किंगहाई, गांसू, शिनजियांग और सिचुआन में नुकसान होता है. दस साल पहले सिचुआन में 6700 लोग जख्मी हुए थे. तब 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था. 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे. 2010 में 7.1 तीव्रता के भूकंप से 2700 लोग मारे गए थे. 

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