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Pakistan's Space Agency: क्या फेल हो गई पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी? चीन करेगा 800 करोड़ की मदद!

ISRO से आठ साल पहले बनी थी पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी. अब तक सिर्फ 5 सैटेलाइट छोड़े हैं उसने. क्या यह स्पेस एजेंसी फेल हो गई जो अब चीन उसे 800 करोड़ रुपये की मदद करने जा रहा है. आइए समझते हैं कि पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने अब तक कोई बड़ा काम किया है या नहीं.

पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी द्वारा छोड़ा गया रॉकेट. पहले भी चीन ने की है पाकिस्तान की मदद. (फाइल फोटोः फेसबुक/सुपार्को) पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी द्वारा छोड़ा गया रॉकेट. पहले भी चीन ने की है पाकिस्तान की मदद. (फाइल फोटोः फेसबुक/सुपार्को)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 9:41 AM IST
  • SUPARCO को अपग्रेड करेगा चीन
  • वैज्ञानिकों-इंजीनियरों को ट्रेनिंग भी देगा

पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी की शुरुआत भारत के इसरो (ISRO) से करीब आठ साल पहले हुई थी. लेकिन तब से लेकर अब तक उसने सिर्फ पांच ही सैटेलाइट्स छोड़े हैं. पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी का दुनिया में कहीं कोई नाम नहीं है. न ही उसके लॉन्च की कोई खबर आती है. जबकि, भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने पूरी दुनिया का भरोसा जीता है. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में एक है. दक्षिण एशिया में तो नंबर एक. 

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अब पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी को फिर से जिंदा करने के लिए चीन आगे आ रहा है. ऐसी खबर है कि चीन पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी को 100 मिलियन डॉलर्स यानी करीब 800 करोड़ रुपये की मदद करेगा. इस मदद के साथ ही चीन के वैज्ञानिक पाकिस्तानी साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स को ट्रेनिंग भी देंगे. अब देखना ये है कि कहीं चीन पाकिस्तान को मोहरा बनाकर भारत या अमेरिका जैसे देशों के लिए कोई नई चाल तो नहीं चल रहा है. खैर चीन ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपना नाम कमाया है. लेकिन सवाल ये उठता है कि पाकिस्तान इस मदद से कितना आगे बढ़ पाएगा. 

चीन ने कई बार पाकिस्तान की सैटेलाइट्स और रॉकेट बनाने में मदद की है. (फाइल फोटोः फेसबुक/सुपार्को)

दक्षिण एशिया में आठ देश, स्पेस साइंस में भारत अग्रणी

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दक्षिण एशिया में आठ देश हैं. भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में सिर्फ चीन ही थोड़ा बहुत प्रयास कर रहा है. पाकिस्तान से भारत इतना आगे है कि उसे भारत की बराबरी करने में कई दशक लग जाएंगे. भले ही वह चीन से मदद ले या किसी और देश से. चीन हो या पाकिस्तान... अंतरिक्ष विज्ञान में ये भारत के आगे कहीं नहीं टिकते. इस वक्त भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में अभी दुनिया का सबसे भरोसेमंद संगठन है.

पाकिस्तान ने आखिरी रॉकेट छह साल पहले छोड़ा था, जिसे भेजने में चीन ने उसकी मदद की थी. (फाइल फोटोः फेसबुक/सुपार्को)

पाकिस्तान ने पहले स्पेस एजेंसी बनाई लेकिन कुछ कर नहीं पाया

अंतरिक्ष के क्षेत्र में पाकिस्तान ने 16 सितंबर 1961 में स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (SUPARCO) बनाया. वह भी भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के आधिकारिक गठन से करीब आठ साल पहले. लेकिन आज वो रेस में ही नहीं है. इसरो की स्थापना 1969 में हुई थी. उससे पहले भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का नाम इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च था. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाई. अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत के सामने पाकिस्तान का कोई वजूद ही नहीं है. सिर्फ चीन ही है जो भारत से कुछ मामलों में आगे है. लेकिन उसके भी अभियानों ने दुनिया को उतना हैरान नहीं किया, जितना इसरो ने किया.

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पाकिस्तान ने अब तक सिर्फ 5 सैटेलाइट ही छोड़े हैं

  • पहला- 16 जुलाई 1990 को छोड़ा गया था बद्र-1. यह एक आर्टिफिशियल डिजिटल उपग्रह था. इसने 6 महीने बाद अंतरिक्ष में काम करना बंद कर दिया था.
  • दूसरा - बद्र-बी उपग्रह जो एक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट था. इसे 10 दिसंबर 2001 को लॉन्च किया गया था.
  • तीसरा - पाकात-1आर या पाकसाक-1 उपग्रह 11 अगस्त 2011 को चीन की मदद से छोड़ा गया. इसे चीन ने ही बनाया था. यह एक संचार उपग्रह है. यह अभी काम कर रहा है.
  • चौथा - आईक्यूब-1 उपग्रह है जिसे 21 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था. यह बायोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी, स्पेस डायनेमिक्स आदि जैसे प्रयोगों के लिए बनाया गया था. इसने भी दो साल काम किया.
  • पांचवां - पाकिस्तान रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट. इसे 9 जुलाई 2018 को लॉन्च कर दिया गया था. इसे भी चीन ने अपने रॉकेट से लॉन्च किया था.

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