
भारत के लोगों ने मिलकर ऐसा जलवायु परिवर्तन किया है, जिसका नतीजा ये है कि अब बारिश की तीव्रता 10 फीसदी ज्यादा हो गई है. इसी वजह से केरल के वायनाड में भूस्खलन हुआ. 350 से ज्यादा लोग मारे गए. वैज्ञानिकों की एक इंटरनेशनल टीम ने अपनी स्टडी में इस बात का खुलासा किया है.
30 जुलाई 2024 को वायनाड में हुआ भूस्खलन साल 2018 के बाद सबसे बुरी आपदा थी. पिछली बार बाढ़ की वजह से 400 से ज्यादा लोग मारे गए थे. यह स्टडी की है वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन ग्रुप (WWAG) ने. इसके मुताबिक वायनाड में हादसे से पहले 24 घंटे जो बारिश हुई है, वो तीव्रता के आधार पर 10 फीसदी ज्यादा थी. वजह है जलवायु परिवर्तन.
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राज्य के मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन ने इस आपदा का आरोप तेज बारिश पर मढ़ दिया. उन्होंने बताया कि हादसे वाले इलाके में 48 घंटे के अंदर 23 इंच बारिश हुई है. यानी 572 मिलिमीटर. जबकि 8 इंच बारिश यानी 204 मिलिमीटर बारिश होने की भविष्यवाणी की गई थी. यानी दोगुना ज्यादा बारिश हुई. लेकिन इसमें बारिश की गलती नहीं है.
जिस हिसाब से गर्म हो रही धरती, वायनाड जैसी घटनाएं औऱ होंगी
जिस गति से भारत और दुनिया में जीवाश्म ईंधन जलाया जा रहा है. उस हिसाब से दुनिया बहुत जल्द 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म होगी. ऐसे में जो घटना वायनाड में घटी है. वो 4 फीसदी ज्यादा खतरनाक हो जाएगी. बारिश का चार फीसदी बहुत ज्यादा हो जाता है. ये वैसा ही होगा जैसे, केदारनाथ या हिमाचल में बादल फटा था.
ऐसी आपदा के लिए सिर्फ और सिर्फ इंसान ही जिम्मेदार हैं
इंसानों द्वारा कार्बन उत्सर्जन बढ़ाए जाने से जलवायु बदल रहा है. इसकी वजह से बारिश के आने के समय, अवधि और तीव्रता में अंतर आ रहा है. इसकी वजह से भूस्खलन के मामले बढ़ते जा रहे हैं. जंगलों की कटाई, खनन, बेतरतीब निर्माण, बेहिसाब पर्यटन की वजह से पहाड़ों और ऐसे इलाकों में भार पड़ रहा है. क्लाइमेट बदल रहा है.
भारत में तेजी से बढ़ रही हैं भूस्खलन की घटनाएं
भारत में भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. ये इस देश के लिए नई आपदा है. जिस हिसाब से बारिश बढ़ रही है. पहाड़ों और पठारी इलाकों में बारिश तेज होती चली जाएगी. भूस्खलन भी बढ़ते जाएंगे. इससे पहले मई-जून में एशिया ने गर्मी का प्रकोप देखा था. यह भी जलवायु परिवर्तन का ही नतीजा है.