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भारत में मानसूनी बारिश को कैसे प्रभावित करते हैं सूरज के होल्स, वैज्ञानिकों ने खुलासा किया

एक नए अध्ययन में पता चला है कि सूर्य के अंदर बने विशाल छिद्र भारत में मानसून पर बड़ा असर डालते हैं. वैज्ञानिकों ने सूर्य के कोरोनल छिद्रों के भीतर ताप और चुंबकीय क्षेत्र संरचनाओं के भौतिक मापदंडों का सटीक अनुमान लगाया है.

कोरोनल छिद्र भारत में मानसून को प्रभावित करते हैं कोरोनल छिद्र भारत में मानसून को प्रभावित करते हैं
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि सूर्य के अंदर बने छिद्र जिन्हें कोरोनल छिद्र कहा जाता है, भारत में मानसून पर बड़ा असर डालते हैं. वैज्ञानिकों ने सूर्य के कोरोनल छिद्रों के भीतर ताप और चुंबकीय क्षेत्र संरचनाओं के भौतिक मापदंडों का सटीक अनुमान लगाया है. इससे उन्हें पता चला है कि इनका पृथ्वी समेत अंतरिक्ष के मौसम और भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है.

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ये नतीजे बेहद अहम हैं क्योंकि अंतरिक्ष का मौसम उपग्रहों को प्रभावित करता है. इन नतीजों के साथ ही इस बात का एक और सबूत मिल गया है कि सूर्य के कोरोनल छिद्रों का भारतीय मानसून पर असर होता है.

भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics, IIA) के खगोलविदों ने अब इन कोरोनल छिद्रों के भीतर तापमान और चुंबकीय क्षेत्र की ताकत की अक्षांश पर निर्भरता का सटीक रूप से पता लगाया है.

क्या होते हैं कोरोनल छिद्र?

1970 के दशक में पहली बार खोजे गए, कोरोनल छिद्र कम घनत्व वाले क्षेत्र हैं. इनमें खुले चुंबकीय क्षेत्र की संरचना होती है जो दूसरे ग्रहों तक फैले होते हैं.

ये कोरोनल छिद्र सूर्य की तेज हवाओं का कारण बनते हैं. सूर्य की हवाएं, आवेशित कणों की धाराएं हैं जो सूर्य से तेज गति से निकलती हैं. ये तेज हवाएं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आ सकती है जिससे भू-चुंबकीय तूफान और पृथ्वी के आयनमंडल में गड़बड़ी पैदा हो सकती है. इससे रेडियो तरंगों का संचार बाधित हो सकता है.

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एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में कोरोनल छिद्रों की स्टडी के लिए सोलर एंड हीलियोस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी (SOHO) अंतरिक्ष जांच से प्राप्त फूल-डिस्क कैलिब्रेटेड तस्वीरों का इस्तेमाल किया. शोधकर्ताओं ने सूर्य की छिद्रों का पता लगाया और चुंबकीय क्षेत्र संरचनाओं के भौतिक मानदंडों का सटीक अनुमान लगाया.

अध्ययन के मुख्य लेखक, IIA के डॉ. मंजूनाथ हेगड़े ने शोध के दो प्रमुख निष्कर्षों के बारे में बताया है. पहला- विभिन्न अक्षांशों पर कोरोनल छिद्रों की तापमान संरचना में कोई अहम बदलाव नहीं है. दूसरा- कोरोनल छिद्रों के भीतर चुंबकीय क्षेत्र संरचना की ताकत अक्षांश के साथ बदलती रहती है, जो सौर भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक बढ़ती रहती है.

इन निष्कर्षों से पता चलता है कि कोरोनल छिद्र संभवतः सूरज के अंदरूनी भाग से उत्पन्न होते हैं. ये अल्फवेन तरंग गड़बड़ी के सुपरपोजिशन से बन सकते हैं.

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