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भारत के साइक्लोन जोन का दर्द... रेमल, आसना, दाना से फेंगल तक, इस साल देश में आए साइक्लोन से कितनी मची तबाही?

भारत में साइक्लोन आने का एक सीजन होता है. यानी मौसम. इससे तबाही भी होती है. जान भी जाती है. इसका दर्द भी होता है. इस साल अब तक चार साइक्लोन आए. जिसमें से 2 भयानक थे. इस पूरे साइक्लोनिक सीजन में 278 लोग मारे गए. पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

ये तस्वीर बांग्लादेश के कुआकाटा तट की है, जब चक्रवात रेमल की वजह से समंदर की लहरें प्रचंड रूप धारण कर रही थीं. (फोटोः गेटी) ये तस्वीर बांग्लादेश के कुआकाटा तट की है, जब चक्रवात रेमल की वजह से समंदर की लहरें प्रचंड रूप धारण कर रही थीं. (फोटोः गेटी)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 04 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

भारत का एक साइक्लोन जोन है. जिसमें हर साल तूफान और चक्रवाती तूफान आते हैं. इसरो और मौसम विभाग की चेतावनी की वजह से हजारों लोगों को जान तो बच जाती है, लेकिन तबाही होती है. भयानक बारिश होती है. समंदर की ऊंची लहरे तटीय इलाकों में बाढ़ लाती हैं. तेज हवाएं पेड़, छत, बिजली के खंभों को तोड़ देती हैं. 

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देश में इस बार चार साइक्लोन आए हैं. रेमल, आसना, दाना और फेंगल. चारों ने काफी नुकसान भी किया है. लेकिन पहले समझते हैं इनके मौसम के बारे में. यानी सीजन के बारे में. इस साल यानी 2024 में 24 मई को साइक्लोन का सीजन शुरू हुआ. अब तक जो चार साइक्लोन आए उसमें सबसे ताकतवर रेमल था. हवाएं 110 km/hr की स्पीड से चल रही थी. 

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इस साइक्लोनिक सीजन में अब तक 11 डिप्रेशन बने, 7 डीप डिप्रेशन बने, चार साइक्लोन आए, जिनमें से दो गंभीर स्तर के साइक्लोन थे. इनकी वजह से कुल मिलाकर 278 लोगों की मौत हुई है. जबकि 5334 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है. अब जानते हैं इन चार साइक्लोन के बारे में... 

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साइक्लोन रेमल

21 मई 2024 को मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन तैयार होते देखा. 24 मई तक तो ये गंभीर स्तर का भयानक चक्रवाती तूफान बन गया. 24 से 28 मई तक इसका असर रहा. यह दक्षिण भारत के पास से शुरू होकर उत्तर-पूर्वी राज्यों तक गया. इस दौरान 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं. इतने लंबे समय तक रहकर इसने लंबी यात्रा की. इसमें मदद मिली गर्म बंगाल की खाड़ी और कम गति वाली हवा से. 

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चक्रवाती तूफान आसना

24 अगस्त से 3 सितंबर 2024 तक इस तूफान ने भारी तबाही मचाई. 75 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. यह साइक्लोनिक सर्कुलेशन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश करा गया. ये तूफान बना था मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के ऊपर. यानी जमीन के ऊपर. फिर ये राजस्थान और गुजरात होते हुए अरब सागर की ओर बढ़ गया. 

यह एकदम हैरान करने वाली घटना थी. आमतौर पर समंदर से तूफान आते हैं. लेकिन इस बार जमीन से तूफान बनकर समंदर की तरफ गया था. इसकी वजह से वड़ोदरा और अहमदाबाद में 10 और 4.7 इंच बारिश एक दिन में हुई. गुजरात में भारी बाढ़ आई. 49 लोग मारे गए. 254 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ. 

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सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म दाना

20 अक्टूबर को मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने बंगाल की खाड़ी में डिप्रेशन बनते देखा. दो दिन में यह बदलकर तूफान हो गया. दाना 22 से 26 अक्टूबर तक रहा. 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं. 22 अक्टूबर को छह घंटे के अंदर ही यह सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म यानी गंभीर स्तर का चक्रवाती तूफान बन गया था. इसने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में काफी बारिश कराई. फिर कमजोर होकर खत्म हो गया. 

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साइक्लोनिक स्टॉर्म फेंगल

14 नवंबर को सुमात्रा के पास एक दबाव वाला क्षेत्र बनते देखा गया. धीरे-धीरे इसने तूफान और फिर चक्रवाती तूफान फेंगल का रूप धर लिया. 25 नवंबर से 2 दिसंबर तक इस तूफान का असर रहा. 85 km/hr की स्पीड से हवाएं चलीं. तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और श्रीलंका में इसकी वजह से काफी बारिश हुई. ये तूफान गजब का था. बंगाल की खाड़ी में पैदा होकर देश का निचला हिस्सा पार करके यह अरब सागर में जाकर खत्म हुआ. 

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