
जब एक तूफान धरती कि सतह से टकराता है, तो उससे होने वाला नुकसान वर्षों या दशकों तक दिखाई देता है. महासागरों में आने वाले तूफान बहुत शक्तिशाली होते हैं. एक नई स्टडी से पता चला है कि तूफान केवल सतह पर नही बल्कि पानी के नीचे भंवर पैदा करते है. इन चक्रवाती तूफान से ही महासागरो का तापमान बढ़ता है.
इस दौरान तूफान वायुमंडल कि गर्मी को समुद्र कि गहराई तक पहुचांते हैं. हवा में दबाव के कारण चक्रवाती तूफान यानी साइक्लोन पैदा होते हैं, जिनका असर आसपास के इलाकों में देखने को मिलता है. तूफान पैदा होते हैं गर्मी से. समुद्र की ऊपरी सतह जब गर्म होती है. उसके भाप से बादल बनते हैं. ज्यादा बादल बनने और लो-प्रेशर एरिया बनने पर चक्रवाती तूफान या तूफान आते हैं.
समुद्री सतह के गर्म होने से ऊपर मौजूद पानी में नमी बढ़ जाती है. यह धीरे-धीरे ऊपर उठने लगती है. यहां तक कि कई बार ये माउंट एवरेस्ट से ज्यादा ऊंचाई पर बादल बना देती है. आमतौर पर ऐसे तूफान ट्रॉपिकल रीजन यानी भूमध्यरेखा के 1000 किलोमीटर ऊपर और नीचे की तरफ बनते हैं. क्योंकि यहां पर अमेरिका की तरफ से गर्म हवाएं आती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि तूफान गर्मी सोख कर उसे अपने में जमा कर लेते हैं. इससे सिर्फ बारिश ही नहीं होती बल्कि समुद्र को गर्म करते हैं.
जब तूफान समुद्र कि गहराई में गर्मी छोड़ते हैं तो वह सतह पर ही नहीं रहती. तूफान द्वारा पानी के नीचे बनी धाराएं गर्मी को लगभग चार गुना ज्यादा गहराई में ले जाती हैं. इतनी गहराई में मौजूद गर्मी एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक समुद्र की गहराइयों में यात्रा करती रहती है. यानी गर्म समुद्र की धाराएं अमेरिका के प्रशांत महासागर से चलकर अरब सागर या हिंद महासागर तक आती हैं.
शोधकर्ता थॉमस जी का कहना है कि उन्होंने दो महीने की खोज से पता लगाया है कि फिलीपीन सागर बदलते मौसम के लिए कैसे जिम्मेदार है, जिससे प्रभावशाली तूफान पैदा होते है. इस प्रयोग के पहले हिस्से में आसमान साफ था. शांत हवाएं चल रही थी. लेकिन दूसरे महीने में देखा कि तीन तूफान देखने को मिले, जिन्होंने समुद्र में हलचल मचा दी थी.
समुद्र की सतह के नीचे अशांत धाराएं गर्मी को ट्रांसफर करती हैं. ट्रॉपिकल इलाकों में समुद्र की ऊपरी सतह 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म होती है. सूरज की गर्मी से इसका तापमान बढ़ता है. इस गर्मी का असर करीब 50 मीटर गहराई तक रहता है. इसके नीचे पानी ठंडा होता चला जाता है. इसी से समुद्र में तापमान के आधार पर पानी के अलग-अलग लेयर बनते हैं. जिसमें अलग प्रकार के जीव-जंतु रहते हैं. वह भी तापमान के हिसाब से.
जैसे ही एक तूफान ट्रॉपिकल इलाके के समुद्रों से गुजरता है. तूफान कि तेज हवाएं पानी की परतों को हिला देती हैं. ठंडे और गर्म पानी के आपस में मिलने से सतह पर ठंडे पानी का स्तर बढ़ जाता है, जो तूफान के बाद के दिनों में गर्मी को सोखता है. तीन तूफानों से पहले और बाद में समुद्र के ऊपरी सतह के डेटा से पता चला कि तूफान के दौरान समुद्री की गहराई में चलने वाली धाराएं ज्यादा गर्मी सोखती हैं. जबकि तापमान के हिसाब से बनी पानी की परतें ऐसा नहीं करतीं. तूफानों के जरिए पैदा हुई समुद्री गर्मी वापस वायुमंडल में नहीं जाती.
एक बार जब यह गर्मी बड़े पैमाने पर महासागर की धाराओं द्वारा ऊपर उठाई जाती है, तो यह बड़े इलाके में फैल जाती है. फिलीपीन सागर में किए गए अध्ययन से पता चला कि तूफान द्वारा जमा कि गई गर्मी इक्वाडोर या कैलिफोर्निया के तटों पर बहती है. पश्चिम से पूर्व की तरफ तक पानी की ऊपरी सतह के सहारे बहती रहती है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में बताया गया है तूफान खुद समुद्र को गर्म करने और पृथ्वी की जलवायु को आकार देने की क्षमता रखते हैं.