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इस दिन धरती से टकराएगा उल्कापिंड, ये है तारीख... 22 परमाणु बम विस्फोट जैसी होगी टक्कर

उस तारीख का पता चल गया है, जब धरती से उल्कापिंड की टक्कर होगी. NASA इस एस्टेरॉयड की दिशा बदलने के प्रयास में लग गया है. लेकिन अगर यह उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया तो 22 परमाणु बमों जितना बड़ा धमाका और तबाही होगी. आइए जानते हैं कि कब होगी पृथ्वी से इस एस्टेरॉयड की टक्कर...

159 साल बाद धरती पर आएगी प्रलय. उल्कापिंड की टक्कर से मचेगी तबाही. (सभी फोटोः गेटी) 159 साल बाद धरती पर आएगी प्रलय. उल्कापिंड की टक्कर से मचेगी तबाही. (सभी फोटोः गेटी)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

पृथ्वी को अगर सबसे बड़ा खतरा किसी चीज से है तो वो है उल्कापिंड (Asteroid). एक उल्कापिंड की टक्कर ने धरती से डायनासोरों की पूरी प्रजाति खत्म कर दी थी. अब एक उल्कापिंड धरती की ओर आ रहा है. जिसके टकराने की सटीक तारीख का पता चल गया है. इस टक्कर में 22 परमाणु बमों के बराबर तबाही मचाने की ताकत होगी. 

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जिस उल्कापिंड की बात चल रही है, उसका नाम है बेनू (Bennu). यह उल्कापिंड हर छह साल में हमारी धरती के बगल से निकलता है. लेकिन इसकी टक्कर 24 सितंबर 2182 में होगी. यानी 159 साल बाद. डेलीस्टार नाम की वेबसाइट में प्रकाशित खबर के अनुसार प्रलय की यह तारीख काफी दूर है, लेकिन NASA ने इससे बचने की तैयारी शुरू कर दी है. 

नासा इस प्रयास में लगा है कि किसी तरह से बेनू उल्कापिंड की दिशा में परिवर्तन किया जा सके. हाल ही में नासा का एक यान बेनू से मिट्टी और पत्थर का सैंपल लेकर धरती की ओर आ रहा है. संभावना है कि वो इसी महीने 24 तारीख को किसी समय धरती पर लैंड करेगा. लैंडिंग उटाह के ग्रेट सॉल्ट लेक रेगिस्तान में किसी जगह होने की संभावना है. 

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टक्कर की आशंका कम, लेकिन खतरा ज्यादा

सैंपल लेकर वापस लौट रहे नासा के कैप्सूल OSIRIS-REx के प्रोजेक्ट मैनेजर रिच बर्न्स ने कहा कि हमनें सात साल पहले इस यान को बेनू से सैंपल लाने भेजा था. अब हम इस प्रोजेक्ट के आखिरी चरण में हैं. ये बात अलग है कि बेनू के टकराने से जो नुकसान होगा वो बेहद भयानक होगा. लेकिन उसकी संभावना 2700 में एक ही है. 

टक्कर से बनेगा 10 km चौड़ा गड्ढा

बेनू उस उल्कापिंड से 20 गुना कम चौड़ा है, जिसने डायनासोरों को पृथ्वी से खत्म कर दिया था. लेकिन अगर यह टकराया तो तबाही बड़ी होगी. चाहे जमीन से टकराए या फिर समुद्र में गिरे. इसकी वजह से पूरी दुनिया से कई जीवों की आबादी खत्म हो सकती है. इसकी टक्कर से बनने वाला गड्ढा करीब 10 किलोमीटर चौड़ा होगा. 

सुनामी आएगी... समंदर में कहीं भी गिरा तो

इतना ही नहीं इसकी वजह से टक्कर वाली जगह के चारों तरफ करीब 1000 किलोमीटर तक कुछ भी नहीं बचेगा. लेकिन अगर यह समुद्र में गिरा तो तबाही ज्यादा हो सकती है, क्योंकि इसकी टक्कर से उठने वाली सुनामी लहर आसपास के द्वीपों या देश में भयानक तबाही मचा सकती है. हालांकि नासा का मानना है अब से साल 2300 तक बेनू के धरती से टकराने के चांस 1750 में एक ही है. 

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सैंपल तेजी से आ रहा है धरती की तरफ

OSIRIS-REx का सैंपल लेकर आ रहा कैप्सूल एक मिनी फ्रिज के आकार का है. इसके अंदर 250 ग्राम मिट्टी और पत्थर का सैंपल रखा है. उसने बेनू से मिट्टी का सैंपल 2020 में लिया था. तब से वह धरती की तरफ यात्रा कर रहा है. ये कैप्सूल फिलहाल धरती की तरफ 45 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आ रहा है. जब यह धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेगा, तब यह लावा की गर्मी से दोगुना तापमान बर्दाश्त करेगा. 

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