
मौसम विभाग ने कहा है कि हिमालय से आने वाली ठंडी हवाओं की वजह से उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान गिरा है. पारा और गिरेगा. अगले चार-पांच दिनों तक हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में ठंडी बढ़ेगी. सिंपल सी बात है, इन इलाकों में सर्दी बढ़ेगी तो दिल्ली-NCR की हालत भी बिगड़ेगी. हवा में नमी बढ़ने पर स्मोग का खतरा बढ़ेगा. प्रदूषण नमी के साथ हवा में कम ऊंचाई पर जमा होगा.
असल में सर्दियों में तापमान कम होने की वजह से हवा ठंडी पड़ जाती है. उसमें नमी भी रहती है. भारी हवा ऊपर नहीं जा पाती. ऐसे में हवा में मौजूद जहरीली गैसें भी नहीं निकल पाती. इसलिए कोहरा और प्रदूषण वाली भारी हवा मिलकर स्मोग बना देते हैं. अगर हवा ऊपर जाएगी नहीं तो यही स्मोग आपको परेशान करेगा. यानी वायु गुणवत्ता इंडेक्स (Air Quality Index) खराब हो जाएगा. जो कि पिछले छह महीने में तीन महीने बहुत खराब था.
अगर आप जून से नवंबर तक बुरे AQI वाले दिनों की बात करें तो दिल्ली-NCR की हालत खराब थी. AQI के हिसाब से दिल्ली में जून महीने में 13 दिन खराब थे. जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश की वजह से हवा से जहर धुल गया. आसमान थोड़ा साफ रहा और हवा भी. लेकिन अक्टूबर में फिर 17 दिनों तक AQI बुरी हालत में था. नवंबर तो तीसों दिन AQI खराब ही रहा है. यह जानकारी पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में 19 दिसंबर 2022 को दी.
गाजियाबाद-नोएडा में हवा जहरीली
गाजियाबाद (Ghaziabad) की बात करें तो जून में 15 दिनों तक AQI बुरा था. यहां भी जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश ने प्रदूषण का स्तर कम कर दिया. अक्टूबर में एक्यूआई 19 दिनों तक बुरी हालत में था. नवंबर में 25 दिन. वहीं, नोएडा (Noida) में जून में 15 दिन वायु प्रदूषण बढ़ा था. यानी एक्यूआई खराब था. उसके बाद अक्टूबर में 17 दिन और नवंबर में 24 दिनों तक AQI निचले स्तर पर था.
हरियाणा के ये दो जिले भी प्रभावित
अब बात करते हैं Delhi-NCR के गुरुग्राम (Gurugram) की. जून महीने में यहां पर एक्यूआई के मामले में 16 दिन खराब थे. जुलाई में दो दिन. अगस्त और सितंबर साफ-सुथरे बीते लेकिन अक्टूबर में 17 दिन एक्क्यूआई की हालत फिर खराब हो गई. नवंबर महीने में 29 दिनों तक हवा जहरीली थी. फरीदाबाद (Faridabad) में जून के 11 दिन खराब थे. फिर अक्टूबर में 15 और नवंबर में 29 दिन हवा जहरीली रही थी.
जितनी ज्यादा सर्दी, उतनी ज्यादा दिक्कत
असल में इस बार सर्दी लेट जरूर आई है लेकिन आगे कड़ाके की सर्दी होगी. आम बोलचाल में जिसे पश्चिमी विक्षोम (Western Disturbance) कहते हैं. उसकी वजह से ठंड बढ़ती है. साइंस की भाषा में इसे वेस्टर्लीज (Westerlies) कहते हैं. ये भूमध्यसागर (Mediterranean) के आसपास बनती है.
कुमाऊं यूनिवर्सिटी के रिसर्चर प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया ने बताया कि यह पश्चिमी विक्षोभ मिडिल-ईस्ट से होते हुए अफगानिस्तान, पाकिस्तान और फिर भारत में आता है. पाकिस्तान से यह कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड पहुंचता है. इसकी मैक्सिमम रेंज आगरा है. लेकिन इस बार इसकी दो ब्रांचेस निकल रही है. एक आगरा की तरफ जा रही है, दूसरी राजस्थान, हरियाणा से होते हुए दिल्ली की तरफ आ रही है. यानी सर्दी बढ़ने वाली है.
ज्यादा सर्दी माने ज्यादा प्रदूषण
इस बार इसमें नमी बहुत ज्यादा है. ज्यादा नमी यानी हवा में ज्यादा पानी होना. ज्यादा पानी होने का मतलब हवा का भारी होना. वह ऊपर उठ नहीं पाएगी. नीचे का प्रदूषण उसमें मिलेगा तो स्मोग के दिन बढ़ेंगे. यानी आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर को वायु प्रदूषण से जूझना पड़ेगा. पश्चिमी विक्षोभ यानी नमी वाली भारी हवा की वजह से हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी हो सकती है. साथ ही मैदानी इलाकों में बारिश होगी.
दिल्ली-NCR की हवा भारी यानी स्मोग ज्यादा
वेस्टर्लीज समुद्री सतह के तापमान (Sea Surface Temperature) से बनता है. मेडिटेरेनियन में समुद्री सतह का तापमान नॉर्मल रहता है तो सर्दियों में बारिश कम होती है. पारा चढ़ता है तो नमी बढ़ती है. इस बार पश्चिमी विक्षोभ में नमी ज्यादा है. यानी जितनी ज्यादा भारी हवा, उतना ज्यादा प्रदूषण से सामना. दिल्ली-एनसीआर में हवा भारी होना नुकसानदेह होगा. आने वाले दिनों में भारी हवा का खामियाजा भी भारी भुगतना होगा.