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डगमगा रही है हमारी धरती, दिन हो रहे हैं लंबे, क्या खत्म हो जाएगी रात... कौन है इस मुसीबत के लिए जिम्मेदार?

आपको पता नहीं चल रहा है लेकिन आपके दिन का समय बढ़ता जा रहा है. क्योंकि हमारी धरती के घूमने की गति बदल रही है. पृथ्वी डगमगा रही है. असंतुलित हो रही है. ठीक वैसे ही जैसे कार के पहिए का अलाइनमेंट बिगड़ने के बाद वो डगमगाते हुए चलता है. कौन है इस बड़ी घटना का जिम्मेदार?

जलवायु परिवर्तन की वजह से पृथ्वी अपनी धुरी पर धीमे घूम रही है. जिसकी वजह से दिन का समय बढ़ता जा रहा है. (फोटोः गेटी) जलवायु परिवर्तन की वजह से पृथ्वी अपनी धुरी पर धीमे घूम रही है. जिसकी वजह से दिन का समय बढ़ता जा रहा है. (फोटोः गेटी)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST

सड़क पर चलते समय जब कार के पहिए का अलाइनमेंट बिगड़ता है, तब वह डगमगाने लगता है. ठीक ऐसे ही धरती भी लड़खड़ा कर घूम रही है. पृथ्वी का संतुलन बिगड़ा हुआ है. इसके अपनी धुरी पर घूमने की गति बदल गई है. एक नई रिसर्च में यह खुलासा हुआ है. इसकी वजह से जलवायु परिवर्तन को बताया जा रहा है. 

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पहले तो धरती पर होने वाले इन बदलावों को सुधारने का चांस भी था. लेकिन अब बात हाथ से निकल गई है. जलवायु परिवर्तन की वजह से बुरे दिन आने वाले हैं. वैसे भी धरती के अपने धुरी पर घूमने की गति में बदलाव की वजह से इंसानों ने एक निगेटिव लीप सेकेंड जोड़ा है. क्योंकि क्लाइमेट चेंज का असर पृथ्वी के केंद्र तक पहुंच गया है. 

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हमारी धरती पर एक दिन में करीब 86,400 सेकेंड होते हैं. लेकिन सटीक गणना नहीं की जा सकती. क्योंकि पृथ्वी का हर रोटेशन कुछ मिलिसेकेंड्स की वजह से बदल जाता है. इसकी वजह है टेक्टोनिक प्लेट्स में मूवमेंट, पृथ्वी के कोर यानी केंद्र में बदलाव और चंद्रमा के साथ गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव. साथ में जलवायु परिवर्तन. 

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 इंसानों द्वारा किया गया क्लाइमेट चेंज बदल रहा दिन का समय

इंसानों द्वारा किया जा रहा क्लाइमेट चेंज लगातार धरती के दिन के समय को बदल रहा है. उसे बढ़ा रहा है. अगले कुछ वर्षों में इसका असर साफ-साफ दिखेगा. जब दिन कुछ और ज्यादा सेकेंड तक लंबा होगा. पिछले कुछ दशक में धरती के ध्रुवीय इलाकों में बर्फ के पिघलने की दर बढ़ गई है. खासतौर से ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में. क्योंकि ग्लोबल वॉर्मिंग हो रही है. इससे समंदर का जलस्तर बढ़ता जा रहा है. 

एक्स्ट्रा पानी से निकल रही है हमारी धरती की तोंद, घूमने में हो रही दिक्कत

जितना भी एक्स्ट्रा पानी आ रहा है, वो सब भूमध्यरेखा यानी इक्वेटर लाइन के आसपास जमा हो रहा है. ये ठीक वैसा ही है जैसे किसी इंसान की तोंद निकल आए. पृथ्वी के समंदर बल्की होते जा रहे हैं. आप खुद देखिए कैसे कोई तोंद वाला इंसान जब गोल घूमता है तो वह कैसे डगमगाता रहता है. संतुलन कम होता है. जबकि शारीरिक रूप से फिट व्यक्ति जब घूमता है तब वह सटीक गति और संतुलन से यह काम कर पाता है.  

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क्या एक दिन धरती घूमना बंद कर देगी... फिर तो न दिन होगा, न रात

ज्यादा मात्रा में पानी का होना यानी वजन बढ़ना. इससे धरती की गति धीमी हो रही है. इसलिए दिन का समय बढ़ रहा है. यह खुलासा जिस स्टडी में हुई है, वो हाल ही में PNAS जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसमें वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली है. साथ ही आज के दौर के सभी डेटा डाले. जांच-पड़ताल करने के बाद पता चला कि धरती के घूमने का समय लगातार बढ़ता जाएगा. एक दिन ऐसा आएगा जब धरती घूमना बंद कर देगी. घड़ियों का समय बदलेगा. जानवरों के सोने-उठने का समय बदलेगा. 

पिछले तीन दशकों से धीमी होती जा रही है धरती, वजह है बढ़ती गर्मी

12 जुलाई को नेचर जियोसाइंस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती गर्मी की वजह से पिघलते ग्लेशियर से धरती की भूमध्यरेखा के पास ज्यादा पानी जमा हो रहा है. इसकी वजह से धरती अपनी धुरी पर घूम नहीं पा रही है. उसकी गति धीमी होती जा रही है. धरती के दोनों मैग्नेटिक पोल भी डगमगा गए हैं. इसकी वजह से पिछले तीन दशकों से धरती के घूमने की गति धीमी होती जा रही है. 

100 करोड़ साल पहले धरती 19 घंटे में एक चक्कर पूरा करती थी

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100 करोड़ साल पहले हमारी पृथ्वी का एक दिन 19 घंटे का था. बाद में धीरे-धीरे धरती धीमी होती चली गई. जिसकी वजह से यह समय बढ़कर 24 घंटे हो गया. यह समय भी बेहद सूक्ष्म स्तर पर बदलता है. अगर 1960 की तुलना साल 2020 से करें तो धरती ज्यादा तेज घूम रही थी. 2021 में ये गति धीमी होने लगी. जून 2022 में सबसे छोटा दिन भी रिकॉर्ड किया गया. आप किसी भी समय देखो हमारे दिन का समय हर सदी में 2.3 मिलिसेकेंड बढ़ रहा है. 

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