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वैज्ञानिकों की चेतावनीः धरती पर मचने वाली है बहुत अफरातफरी, इंसानी हरकतों से जीने लायक नहीं रहेगी

Climate Chaos: इंसान धरती को सिर्फ गर्म ही नहीं कर रहा है. बल्कि 'जलवायु अराजकता' भी फैला रहा है. इसकी वजह से पूरी धरती रहने लायक नहीं बचेगी. चारों तरफ अफरा-तफरी मचेगी. इसके लिए जिम्मेदार बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन होगा, जो इंसानों के द्वारा बढ़ाया जा रहा है.

Earth will become chaotic world: धरती जल रही है, इंसान ही जिम्मेदार है और वही भुगतेगा. (फोटोः रिया सोपाला/पिक्साबे) Earth will become chaotic world: धरती जल रही है, इंसान ही जिम्मेदार है और वही भुगतेगा. (फोटोः रिया सोपाला/पिक्साबे)
aajtak.in
  • पेरिस,
  • 01 जून 2022,
  • अपडेटेड 6:41 PM IST
  • दुनिया में फैलेगी 'जलवायु अराजकता'
  • इंसान संभाल नहीं पाएगा ऐसे हालात

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इंसान इस धरती को रहने लायक ही नहीं छोड़ेगा. वह धरती को न सिर्फ गर्म कर रहा है बल्कि 'जलवायु अराजकता' (Climate Chaos) भी बढ़ा रहा है. चारों तरफ पर्यावरण में बदलाव होगा. अफरा-तफरी का माहौल होगा. धरती का भविष्य एकदम अच्छा नहीं है. फ्लैश फ्लड्स, ग्लेशियरों का पिघलना, भूस्खलन, एवलांच, जंगल की आग, अचानक बारिश, हीटवेव की घटनाएं बढ़ जाएंगी. इन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होगा. 

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यह स्टडी हाल ही में प्री-प्रिंट डेटाबेस arXiv में प्रकाशित हुई है. जिसमें इंसानी गतिविधियों से होने वाले नुकसान का बेहद सटीक आकलन किया गया है. और इस रिपोर्ट में धरती की जो तस्वीर दिखाई गई है. यकीन मानिए वो एकदम अच्छी नहीं है. पुर्तगाल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्टो में डिपार्टमेंट और फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी के वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर हमनें बदलते पर्यावरण को सुधारने के लिए कुछ नहीं किया तो हालात प्रलंयकारी होंगे. 

जलवायु परिवर्तन की वजह से वैश्विक गर्मी बढ़ रही है. सभी देशों में एक्सट्रीम वेदर की मार झेलनी पड़ेगी. (फोटोः पिक्साबे)

इस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ओरफू बर्तोलामी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के नुकसान हमें पता हैं. सूखा, बाढ़, हीटवेव, एक्स्ट्रीम वेदर आदि. अगर धरती की मौसम और पर्यावरण संबंधी प्रक्रियाएं जलवायु अराजकता की ओर बढ़ती हैं तो हम किसी भी तरह से इसे रोक नहीं पाएंगे. धरती पर बढ़ी तबाही की सीरीज चलने लगेगी. जैसे भगदड़ के समय इंसान कुछ सोचने समझने की ताकत भूल जाते हैं. या फिर जंगल में जब शेर शिकार करता है तो कैसे छोटे जानवरों के झुंड़ अलग-अलग दिशाओं में भागते हैं. 

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जंगल खत्म होंगे. बारिश कम होगी. बाढ़ आएगी लेकिन ग्लेशियरों के पिघलने से. (फोटोः पिक्साबे)

ओरफू बर्तोलामी ने कहा कि ऐसी प्राकृतिक घटनाएं होंगी. इंसानों को समझ नहीं आएगा कि अगले कुछ घंटों में मौसम किस तरह से बदलेगा. ज्वालामुखी विस्फोट की संख्या बढ़ सकती है. लेकिन इंसानों की गतिविधियों की वजह से जो बदलाव आएगा वो ऊपरी वातावरण में होगा. जैसे ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्री जलस्तर का बढ़ना. अचानक से बाढ़ आना. एकदम से धरती के किसी हिस्से में बाढ़ आ रही होगी, तो दूसरे हिस्से में सूखा पड़ा होगा. कहीं तूफान होगा तो कहीं टॉरनैडो तबाही मचा रहा होगा. 

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