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वैज्ञानिकों ने बना डाली ऐसी बैटरी, जिसे डिस्चार्ज होने के बाद आप खा सकते हैं

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी बैटरी बनाई है, जिससे आप किसी चीज को चार्ज कर सकते हैं. चार्जिंग खत्म हो जाए तो उसे खा भी सकते हैं. क्योंकि ये खाने वाले पदार्थों से बनी है. यह बैटरी शरीर के अंदर इस्तेमाल होने वाली मिनिएचर मेडिकल गैजेट्स को बिजली सप्लाई कर सकती है.

ऊपर है वो बैटरी जिसे खाने की चीजों से बनाया गया है. (फोटोः इटैलियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ऊपर है वो बैटरी जिसे खाने की चीजों से बनाया गया है. (फोटोः इटैलियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी)
aajtak.in
  • रोम,
  • 19 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

अब ऐसी बैटरी बना ली गई है, जिससे आप शरीर के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को रीचार्ज कर सकते हैं. बैटरी की चार्जिंग खत्म होने के बाद आप उसे खा भी सकते हैं. इस बैटरी को खाने वाले पदार्थों से बनाया गया है. ताकि इससे किसी तरह का नुकसान इंसानों को न हो. 

यह एक प्रोटोटाइप बैटरी है जिससे 0.65 वोल्ट या 12 मिनट तक 48 माइक्रोएंपीयर करंट बहता है. यानी शरीर में इस्तेमाल की जाने वाली छोटी मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को चार्ज कर सकता है. इसके बाद जब इसकी चार्जिंग खत्म हो जाएगी. तब यह अपने आप आपके पेट में घुल जाएगी. क्योंकि इसे खाने वाली चीजों से बनाया गया है. 

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इसे बनाया है इटैलियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में मॉलीक्यूलर इलेक्ट्रॉनिक्स के शोधकर्ता मारियो कैरोनी ने. मारियो कहते हैं कि भविष्य में खाने लायक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और सेंसर्स भी बनेंगे. ताकि शरीर के अंदर फूड स्टोरेज की पूरी प्रक्रिया को देखा जा सके. इन बैटरी से बच्चों के खिलौने बना सकते हैं. ताकि वो उन्हें निगल ले तो दिक्कत न हो. 

इसे बनाने में कई खाने वाली चीजों का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन बैटरी के निगेटिव हिस्से के लिए विटामिन राइबोफ्लेविन का इस्तेमाल हुआ है. जबकि पॉजिटिव हिस्से के लिए सप्लीमेंट क्वेरसेटिन का उपयोग किया गया है. इलेक्ट्रोलाइट बनाने के लिए पानी आधारित तरल पदार्थ का इस्तेमाल हुआ है. सेपरेटर के लिए नोरी का इस्तेमाल हुआ है. यह एक समुद्री वीड है. इसे आप सूशी रेस्टोरेंट में आसानी से पा जाएंगे.  

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खाने लायक बैटरी से बिजली सप्लाई करने के लिए खाने योग्य सोने का इस्तेमाल किया जाता है. जबकि बिजली पैदा करने के लिए एक्टीवेटेड चारकोल की जरूरत पड़ती है. लेकिन ये सब शरीर के बाहर इस्तेमाल करने के लिए. हां एक बात है कि इस बैटरी में कोई स्वाद नहीं है. जो इसका सबसे बुरा पक्ष है. इसिलए इसे खाने पर आपको शायद अच्छा न ही लगे. 

इस प्रोटोटाइप बैटरी का आकार एक वर्ग सेंटीमीटर है. लेकिन वैज्ञानिकों की टीम इसे और छोटा बनाने का काम कर रही है. मारियों ने कहा कि हम ऐसी बैटरी बनाना चाहते हैं, जो बेहद छोटी लेकिन काम की हो. शरीर को नुकसान भी न पहुंचाए. इतना ही नहीं हम भविष्य में खाने लायक रोबोट्स भी बनाएंगे. 

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