
अधिकांश प्राइमेट (Primates) से उलट, हाथी केले को छिलके समेत खा जाते हैं, छिलका उतारते नहीं. हालांकि, करंट बायोलॉजी जर्नल में हाल ही में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, बर्लिन चिड़ियाघर में पैंग फा (Pang Pha) नाम की एक हथनी ने केला छीलना सीख लिया है.
पैंग फा खास रंग के केले को छीलना ही पसंद करती है. इसके लिए वह हरे-पीले रंग का केला चुनती है. पीला केला, जो बहुत ज़्यादा पका न हो उसे वह साबुत खाती है. मज़े की बात ये है कि इंसानी बच्चों की तरह वह भी भूरे हो चुके केले खाना पसंद नहीं करती.
नीचे दिए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह पैंग फा केला छीलकर खा रही है, और कैसे नापसंद केलों को रिजेक्ट कर रही है.
शोध के लेखकों का कहना है कि हथनी ने उसकी देखभाल करने वाले लोगों को खेला छीलकर खिलाते देखकर ही केला छीलना सीखा है. शोध के नतीजे बताते हैं कि हाथियों में सामान्य तौर पर कुछ खास मैनिपुलेटिव और संज्ञानात्मक (Cognitive) क्षमताएं होती हैं.
शोध के सह लेखक और बर्लिन की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट माइकल ब्रैक (Michael Brecht) का कहना है कि हमने एक बहुत ही अनोखे व्यवहार की खोज की है. पैंग फा के केले को छीलने के पीछे, कोई एक व्यवहारिक एलिमेंट नहीं है, बल्कि स्किल, स्पीड, व्यक्तित्व जैसी बहुत सी वजहें हैं.
शोधकर्ताओं ने पैंग फा के केलों को चुनने के व्यवहार पर भी गौर किया. वह हरे या पीले केले को ही साबुत खाती है, जबकि भूरे और ज़्यादा पके केले को रिजेक्ट कर देती है. वह केवल भूरे रंग के चित्तीदार केले को ही छीलती है.
इसके अलावा शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि जब हाथियों को एक साथ केले खाने के लिए दिए जा रहे थे, तब इस हथनी ने अपना व्यवहार बदल लिया. उसने जल्दी-जल्दी पहले कई साबुत केले खाए और बाद में एक केला छीलकर खाने के लिए बचा लिया.
एनेक्डोट्स और ऑनलाइन वीडियो में और भी हाथियों को केले छीलते हुए दिखाया गया है, लेकिन यह तय करने के लिए अभी और शोध करने की ज़रूरत है कि यह वास्तव में कितना सामान्य व्यवहार है. अध्ययन के मुताबिक, बर्लिन के चिड़ियाघर का और कोई दूसरा हाथी केले छीलकर नहीं खाता.
पहले के शोधों से पता चलता है कि कुछ अफ्रीकी हाथी, इंसानों के इशारों की नकल कर सकते हैं और लोगों को अलग-अलग जातीय समूहों में वर्गीकृत भी कर सकते हैं. लेकिन शोधकर्ताओं ने माना कि केले को छीलने जैसा इंसानी व्यवहार काफी अनोखा है.