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अंटार्कटिका के पेंग्विन पर मंडरा रहा है खतरा, ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो सकते हैं विलुप्त

जलवायु परिवर्तन के असर से अब अंटार्कटिका (Antarctica) के एम्परर पेंगुइन (Emperor penguin) भी नहीं बच सके हैं. इनपर भी अब विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है. अमेरिकी सरकार ने इन पक्षियों को U.S. Endangered Species Act के तहत सुरक्षित रखने की बात कही है.

अमेरिकी सरकार अब एम्परर पेंगुइन को कानून के तहत संरक्षित रखेगी (Photo: Pixabay) अमेरिकी सरकार अब एम्परर पेंगुइन को कानून के तहत संरक्षित रखेगी (Photo: Pixabay)
aajtak.in
  • न्यूयॉर्क ,
  • 27 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

हम सब ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) के प्रभावों को अपने आस-पास देख रहे हैं. और अफसोस यही है कि ये प्रभाव नकारात्मक हैं. वैश्विक तापमान बढ़ने और समुद्री बर्फ के पिघलने से अब अंटार्कटिका (Antarctica) के एम्परर पेंगुइन (Emperor penguin) पर भी खतरा मंडराने लगा है.

जलवायु परिवर्तन की वजह से एम्परर पेंगुइन के विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है. अमेरिकी सरकार ने कहा है कि इन पक्षियों को अमेरिकी लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम (U.S. Endangered Species Act) के तहत सुरक्षित रखा जाएगा.

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जलवायु परिवर्तन से इनके प्रजनन पर हो रहा है असर (Photo: Reuters)

यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस का कहना है कि एम्परर पेंगुइन को कानून के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि ये पक्षी कॉलोनी में रहते हैं और अंटार्कटिक की बर्फ पर अपने बच्चों को पालते हैं, जो फिलहाल जलवायु परिवर्तन की वजह से खतरे में है.

वाइल्ड लाइफ एजेंसी का कहना है कि पिछले 40 सालों के सैटेलाइट डेटा और बाकी सबूतों की जांच से पता चलता है कि पेंगुइन पर वर्तमान में तो विलुप्त होने का खतरा नहीं हैं, लेकिन बढ़ते तापमान ये संकेत दे रहे हैं कि ऐसा हो सकता है. एजेंसी ने पर्यावरण समूह, सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी द्वारा इंडेन्जर्ड स्पिशीज़ एक्ट के तहत इस पक्षी को रखने के लिए 2011 में लगाई गई एक याचिका की मदद ली. 

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2016 में पेंगुइन के सभी नवजात चूजे डूब गए थे (Photo: Pixabay)

सरकार के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से इन पक्षियों में प्रजनन असफल हो रहे हैं. वेडेल सागर ( Weddell Sea) में हैली बे कॉलोनी (Halley Bay colony), जो दुनिया में एम्परर पेंगुइन की दूसरी सबसे बड़ी कॉलोनी है. इसने कई सालों तक समुद्री बर्फ की खराब स्थिति का सामना किया है, जिसकी वजह से 2016 में सभी नवजात चूजे डूब गए थे.

 

मंगलवार के सरकार ने चेतावनी दी कि एम्परर पेंगुइन को 'अर्जेंट क्लाइमेट एक्शन' की ज़रूरत है. सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी के जलवायु विज्ञान निदेशक शाय वुल्फ (Shaye Wolf) का कहना है कि पेंगुइन का अस्तित्व इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी सरकार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ क्या कदम उठाती है. 

1973 के इंडेन्जर्ड स्पिशीज़ एक्ट को कई जानवरों को विलुप्त होने के कगार से वापस लाने का श्रेय दिया जाता है. इनमें ग्रिजली भालू, बाल्ड ईगल, ग्रे व्हेल और कई जानवर शामिल हैं.

 

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